सैलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियन की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है. छह साल पुराना केस अब सीबीआई के हाथों में आ गया हैं. सीबीआई ने हाल ही में दिशा की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की है, जिसमें जांच के लिए सूरज पंचोली, शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, रिया चक्रवर्ती समेत अन्य लोगों के नाम शामिल है. सूरज पंचोली का नाम आने के बाद जिया खान की मां राबिया खान ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया.
जिया की मां ने क्या कहा?
सूरज का साफ कहना है कि वह दिशा को किसी तरह से नहीं जानते. सूरज का नाम जिया खान केस में भी आया था. लेकिन दोषी ना पाए जाने के बाद उनको जिया के केस से स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बरी कर दिया था. अब सूरज का नाम दिशा सालियान केस में आने के बाद जिया खान की मां ने अपनी बात रखी है.
उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट लिखकर कहा कि जब में सुनती हूं कि छह साल पहले हुई एक और युवा, दिशा सालियान की मौत के मामले में वही नाम सामने आया है, तो मुझे बहुत दुख होता है. यह बात सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए. पीड़ित को धोखा देने के लिए जरूरी सबूतों को नष्ट कर दिया जाता है या फिर बदल दिया जाता है. एक बार जब सबूत नष्ट हो जाते हैं, तो सच्चाई तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाता है.
उन्होंने आगे कहा कि हाईकोर्ट ने खुद दिशा के मामले की जांच में गंभीर कमियां मानी हैं. उन्हें पता है कि अब कोई सबूत नहीं बचा है. हालांकि, जब अहम सबूत पहले ही खो चुके हो तो ऐसे में किसी भी नई जांच में बहुत बड़ी मुश्किल आएगी. वह वही तरीका अपना रहे हैं. सबूत ना होने के वजह से न्याय ना मिल पाना और इसे आत्महत्या के लिए उकसाना कहना, उकसाने वाले पहलू की जांच नहीं की गई थी. वह जिया के मामले जैसे ही तरीका अपना रहे हैं.
जिया खान की मां ने आगे कहा कि किसी भी मामले में पीड़ित और उनके परिवार को जवाब मिलने चाहिए. उन्होंने जांच एजेंसियों से हर संभावित सबूत को सुरक्षित रखने और उसकी जांच करने की बात कही, ताकि आने वाले समय में मामले की सच्चाई उजागर होने में कोई बाधा ना हो सकें. उन्होंने कहा कि दिशा भी सच जानने की हकदार हैं, ठीक वैसे ही जैसे जिया थी.
दिशा सालियान की मौत का मामला क्या है?
दिशा सालियान की 8 जून 2020 में मुंबई में इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी जो कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के कुछ दिन पहले की बात थी. उनकी मौत को पहले एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट के तौर पर दर्ज किया गया. लेकिन मौत के लगभग 6 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले मे सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की.