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पत्नी ने दी खुशियों की कुर्बानी, छोटे से घर में गुजारे दिन, धुरंधर कंपोजर को मुश्किलों से मिली शोहरत

शाश्वत सचदेव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बहन और पत्नी के त्याग और समर्थन को दिया है. उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने संगीत शिक्षा और पालन-पोषण में कई बलिदान दिए हैं.

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ऐसे ही कोई स्टार नहीं बनता (Photo: Instagram @shashwatology)
ऐसे ही कोई स्टार नहीं बनता (Photo: Instagram @shashwatology)

शाश्वत सचदेव हिंदी सिनेमा के जाने-माने म्यूजिशियन हैं. शाश्वत को धुरंधर, उरी वीरे दी वेडिंग और आर्टिकल 370 जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है. बेहतरीन काम के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. हाल ही में वो शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टोनाइट' में नजर आए. शो में उन्होंने अपनी सक्सेस का क्रेडिट माता-पिता, बहन और पत्नी के त्याग को दिया. संघर्ष के बारे में बताते हुए वो भावुक भी हो गए. 

शाश्वत की सक्सेस का राज 
शश्वत ने अपनी सफलता का श्रेय सबसे पहले अपने माता-पिता को दिया. उन्होंने कहा, आपने मुझे बहुत सराहा, लेकिन मुझे लगता है कि यह तारीफ मेरे माता-पिता को मिलनी चाहिए. उन्होंने मेरे लिए जीवन में बहुत कुछ त्यागा है. उन्होंने जो कमाई की, वो या तो मेरी संगीत शिक्षा पर खर्च हुई या मुझे और मेरी बहन को पालने-पोसने में.

उन्होंने बताया कि उनकी बहन ने भी अपनी संगीत की आकांक्षाओं का त्याग कर दिया. वो कहते हैं- मेरी बहन मेरे साथ संगीत सीखती थी. लेकिन क्योंकि लड़के और लड़कियां अलग-अलग स्केल पर गाते हैं, जब मैं 11 से 13 साल का था, तो उसने संगीत छोड़ दिया. ताकि मैं जारी रख सकूं. वो संगीत से गहरा प्यार करती थी. ये श्रेय उनके त्याग को जाना चाहिए.

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पत्नी का योगदान
संगीतकार ने कहा कि उनकी पत्नी को भी उनकी उपलब्धियों में उतना ही श्रेय दिया जाना चाहिए. शाश्ववत ने कहा- जब मैं 2017 में मुंबई शिफ्ट हुआ, तो मेरी पत्नी ने बहुत कुछ त्यागा. अगर मैं सारा क्रेडिट खुद ले लूं और कहूं कि देखो मैंने क्या किया, तो ये गलत होगा. उसने भी उतनी ही कड़ी मेहनत की है.

उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि एक दिव्य ऊर्जा है, जो आपको एक माध्यम चुनती है. ये मेरे लिए अहंकारी होगा कि मैं कहूं कि मैंने ये सब किया, क्योंकि वो माध्यम बनना भी मेरी पसंद नहीं थी.

अपनी पत्नी श्रुति के बारे में बात करते हुए शश्वत ने बताया कि वो बचपन से एक-दूसरे को जानते हैं. हम एक साथ पले-बढ़े. मुझसे पहले उसे प्यार हुआ, और मैंने बहुत कम उम्र में शादी कर ली. जब हम मुंबई आए, तो हम एक बहुत छोटे से एक बेडरूम वाले फ्लैट में रहते थे. उसने भी उतनी ही कड़ी मेहनत की है. उसका संगीत को समझने का नजरिया बहुत गहरा है और मैं अपने संगीत पर उसकी राय को बहुत गंभीरता से लेता हूं. यही चीज है जो मुझे उसमें सबसे ज्यादा पसंद है. 

शाश्वत ने कहा कि वो बचपन से अनुशासन में रहे. अनुशासन ने उनके व्यक्तित्व और करियर दोनों को आकार दिया. 

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