राजस्थानी लोक संस्कृति और आधुनिक रैप का अनूठा मेल करने वाले जाने-माने रैपर और सिंगर 'रैपरिया बालम' जब 'आजतक पंचायत राजस्थान' के मंच पर पहुंचे, तो महफिल का मिजाज पूरी तरह से युवाओं के रंग में रंग गया.
अपने खास अंदाज और बेबाक बोलों के लिए पहचाने जाने वाले रैपरिया बालम ने मंच पर अपने सफर, राजस्थानी भाषा के प्रचार-प्रसार, 'शूरवीर' गाने पर हुए विवाद और आज की युवा पीढ़ी (जेन-जी) के साथ जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं पर खुलकर दिल की बात रखी.
साफ-सुथरा रैप और राजस्थानी संस्कृति का सफर
रैप लिखते वक्त मन में क्या विचार होते हैं, इस सवाल पर रैपरिया बालम ने बताया कि रैप संगीत असल में रिदम वाली कविताएं ही हैं. वह हमेशा साफ-सुथरे रैप करना पसंद करते हैं और उनका पूरा संगीत हमेशा राजस्थानी भाषा के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा है. उन्होंने कहा कि भाषा को बचाना और उसे आगे बढ़ाना उनकी सबसे बड़ी लड़ाई और प्राथमिकता है. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वह अपनी संस्कृति को जीवंत रखें और आने वाली पीढ़ी को उसकी जड़ों से जोड़कर रखें.
'शूरवीर' गाने के विवाद पर तोड़ी चुप्पी
'मिर्जापुर द मूवी' में अपने चर्चित गाने 'शूरवीर' पर हुए विवाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी ने उनका साथ दिया. विवाद असल में यह था कि उस गाने को किसी गलत फिल्म में और गलत जगह पर फिल्मा दिया गया था, जिसका उन्होंने खुलकर विरोध किया. आखिरकार गाना हटाया गया और उनकी जीत हुई. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनका नहीं बल्कि सभी का गाना है क्योंकि महाराणा प्रताप हमारे आदर्श हैं, और वे चाहते हैं कि आज की युवा पीढ़ी इन महान शूरवीरों को जाने और उन्हें अपना आदर्श माने.
जेन-जी पर क्या कहा?
आजकल के अलग-अलग तरह के रैप सॉन्ग्स और जेन-जी की पसंद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह हिंदी और राजस्थानी संगीत की रिचनेस के साथ आगे बढ़ रहे हैं. एक म्यूजिशियन के तौर पर उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे युवाओं को जिंदगी में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करें. इतिहास के शूरवीरों को गानों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचाना ही उनका मुख्य मकसद है.
वहीं, जब जेन-जी की पसंद को लेकर उनकी किसी शिकायत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही सहज भाव से कहा कि वह कोई शिकायत नहीं करते. उन्होंने माना कि जब वह खुद उस उम्र में थे, तब वह भी ऐसा ही जोश दिखाते थे और गलतियां करते थे. वक्त के साथ इंसान ठोकर खाकर सीख ही जाता है और ये बच्चे भी समय के साथ संभल जाएंगे.
खाने-पीने का शौक पर की बात
निजी जीवन और खान-पान पर बात करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे खाने के मामले में काफी माहिर हैं और उन्होंने अपने गानों में 'दाल बाटी' को भी जगह दी है. उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि आज यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र भी उनसे कहते हैं कि उनके गाने सुनकर उन्हें काफी मोटिवेशन मिलता है, जो उनके लिए बहुत गर्व की बात है.
पत्रिका गेट पर जैमिंग पर की बात
जयपुर के प्रसिद्ध पत्रिका गेट पर इन दिनों शुरू हुए जैमिंग सेशन के ट्रेंड को उन्होंने बेहद शानदार बताया. उन्होंने कहा कि इससे युवा कलाकारों को एक बेहतरीन मंच मिल रहा है और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें अच्छी पहुंच मिल रही है. अगर उन्हें लगता है कि किसी कलाकार को स्टूडियो बुलाना चाहिए, तो वे उन्हें स्टूडियो भी बुलाते हैं.
वहीं, गानों के गलत इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सोशल मीडिया और तमाम चीजें उनकी टीम संभालती है, इसलिए इन सब चीजों से उनका सीधा कोई लेना-देना नहीं है.
ऐसे पड़ा 'रैपरिया बालम' नाम का दिलचस्प किस्सा
अपने इस अनोखे नाम के पीछे की कहानी साझा करते हुए उन्होंने बताया कि साल 2009 में जब वह पहली बार अपना गाना रिकॉर्ड कर रहे थे, तो उसमें एक लाइन आई थी- 'केसरिया बालम, पधारो म्हारे देश'. तब उनके साउंड इंजीनियर ने मजाक में कहा कि चूंकि तुम रैप करते हो, तो अपना नाम 'रैपरिया बालम' रख लो.
बस, वहीं से उनका यह नाम पड़ गया. बालम यानी लवर और रैपर को रैपरिया. किसी के द्वारा कही गई वह बात उन्हें सीरियसली पसंद आ गई, और जो हुआ वह आज सबके सामने है.