तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए. वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू हुई. अभिनेता विजय थलापति तमिलनाडु चुनावों में अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) की ओर से डीएमके के गढ़ पेरम्बूर से चुनावी मैदान में उतरे. उन्होंने DMK उम्मीदवार को 53715 वोटों से हराया. विजय को 120365 वोट मिले, जबकि आर. डी शेखर को 66650 वोट मिले.
उन्होंने अपना पूरा नाम सी जोसेफ विजय घोषित किया. विजय ने युवाओं को साधने की कोशिश की है. विजय ने त्रिची पूर्व से 27416 वोटों से जीत दर्ज की. उन्हें 91381 वोट मिले, जबकि DMK के उम्मीदवार इनिगो एस. इरुदयाराज को 63965 वोट मिले.
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पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व सीटों पर सभी की नजर
चूंकि अधिकांश उम्मीदवार राजनीति में नए हैं, इसलिए पेरम्बूर और त्रिची पूर्व सीटों पर खास ध्यान रहा. विजय के विरोधियों ने उनके दो सीटों से चुनाव लड़ने के फैसले को ‘सुरक्षित’ खेलने की कोशिश बताते हुए इसे ‘असमझदारी भरा’ कदम करार दिया. दरअसल, विजय ने इस मामले में जयललिता की रणनीति को दोहराने की कोशिश की है, जिन्होंने 1991 में तमिलनाडु के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बरगुर और कांगेयम, दो सीटों से चुनाव लड़ा था.
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पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व दोनों ही शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र हैं, यहां की बड़ी आबादी विजय के समर्थकों में शामिल हो सकती है. पेरम्बूर को मुख्यतः कामकाजी वर्ग का इलाका माना जाता है, जबकि तिरुचि पूर्व में ईसाई मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. इस नजरिए से देखें तो यह ‘थलपति’ विजय की दोनों सीटों पर जीत की संभावनाओं को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति लगती है.
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हालांकि, यदि सतही पहलू से हटकर देखा जाए, तो इस फैसले के पीछे गहरी राजनीतिक सोच दिखाई देती है. चेन्नई की ऐसी सीट चुनना, जहां बड़ी संख्या में ‘ब्लू कॉलर’ यानी श्रमिक वर्ग के मतदाता हों, अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है. इससे विजय को आम लोगों के नेता के रूप में अपनी छवि और मजबूत करने का अवसर मिलता है.
पेरम्बूर में विजय के लिए जीत की राह मुश्किल
चेन्नई की पेरम्बूर सीट लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का अहम गढ़ रही है. यहां का राजनीतिक समीकरण विजय के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि डीएमके के आर.डी. सेकर मौजूदा विधायक हैं और उनकी स्थानीय पकड़ काफी मजबूत है. दूसरी ओर, एआईएडीएमके ने रणनीतिक रूप से अपने सहयोगी दल पीएमके को मैदान में उतारा.
त्रिची में जातीय और युवा समीकरण का असर
त्रिची पूर्व को अक्सर तमिलनाडु की सत्ता की राह का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता रहा है. विजय द्वारा इस सीट का चयन एक बड़ा संकेत देता है, लेकिन यहां की राजनीतिक परिस्थितियां भी जटिल हैं. इस क्षेत्र की आबादी में अल्पसंख्यकों और मध्यम वर्ग की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है.