कोलाथुर सीट तमिलनाडु की सबसे खास सीटों में से एक है. यह वही सीट है जिसने DMK अध्यक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को लगातार तीन बार (2011, 2016 और 2021) विधानसभा भेजा है. मुख्यमंत्री की सीट होने के कारण यहां का चुनाव सिर्फ एक विधायक का चुनाव नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह माना जाता है.
Live Updates:-
06:55 AM:- कोलाथुर सीट के लिए वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होगी
06:45 AM:- मतगणना केंद्र के बाहर DMK समेत राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं का जमावड़ा शुरू.
मतगणना से पहले रात में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन 'कलाईनार स्मारक' पहुंचे.
औद्योगिक से रिहायशी हब तक
पेरंबूर, विल्लिवक्कम और माधवरम के बीच स्थित कोलाथुर कभी आंशिक रूप से औद्योगिक क्षेत्र था. लेकिन आज यह तेजी से बढ़ते अपार्टमेंट्स और घनी रिहायशी कॉलोनियों का केंद्र बन चुका है. आबादी के इस भारी दबाव ने यहां की नागरिक सुविधाओं पर जबरदस्त असर डाला है.
जाति से ऊपर 'रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन' का दम
कोलाथुर की सामाजिक बनावट काफी विविध है. यहां निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार, निजी कर्मचारी और छोटे व्यापारी बड़ी संख्या में रहते हैं.
नया ट्रेंड: यहां की राजनीति अब पारंपरिक जातिगत समीकरणों के बजाय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और अपार्टमेंट संघों की राय पर टिकी है.
प्रभावशाली वर्ग: अपार्टमेंट में रहने वाले लोग और प्रवासी श्रमिक यहां राजनीतिक हवा बदलने की ताकत रखते हैं.
कोलाथुर की 5 बड़ी चुनौतियां
मुख्यमंत्री की सीट होने के बावजूद, कोलाथुर कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है जो 2026 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगी:
जलभराव: मानसून के दौरान गंभीर जलभराव यहां की सबसे बड़ी समस्या है. स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज का अभाव निवासियों के लिए मुसीबत बनता है.
ट्रैफिक और संकरी सड़कें: बढ़ती आबादी के अनुपात में अंदरूनी सड़कें बेहद संकरी हैं, जिससे हर दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है.
जल संकट: गर्मियों के दौरान भरोसेमंद पेयजल आपूर्ति की मांग यहां के मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अहम मुद्दा है.
अतिक्रमण और सीवेज: नालों पर अतिक्रमण और पुरानी सीवर लाइनों के कारण ड्रेनेज सिस्टम अक्सर फेल हो जाता है.
सार्वजनिक स्थानों की कमी: युवाओं और बुजुर्गों के लिए खेल के मैदानों और पार्कों की भारी कमी महसूस की जाती है.
2026 का चुनावी मिजाज: क्या चाहता है कोलाथुर?
कोलाथुर का मतदाता बेहद जागरूक है और उसका मिजाज 'कामकाज' पर आधारित है.
महिलाएं: सुरक्षा और बेहतर कचरा प्रबंधन पर जोर दे रही हैं.
व्यापारी: बाजारों में पार्किंग की बड़ी समस्या का समाधान चाहते हैं.
बुजुर्ग: चलने लायक फुटपाथ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए चुनौती अपनी इस 'होम सीट' पर उन शहरी समस्याओं को जड़ से खत्म करने की होगी, जो पिछले एक दशक में आबादी बढ़ने के साथ विकराल हुई हैं. क्या डीएमके का यह किला 2026 में भी सुरक्षित रहेगा या शहरी असंतोष कोई नया मोड़ लेगा, इस पर पूरे तमिलनाडु की नजर रहेगी.