उत्तर प्रदेश की सियासत में रामपुर एक बार फिर समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन गया है. इस बार आजम खान को मनाने की कोशिश के लिए अखिलेश यादव के बजाय शिवपाल यादव आगे आए हैं. शिवपाल ने जेल में बंद आजम खान से मुलाकात की और इसके बाद उनके घर जाकर पत्नी फातिमा आजम और बड़े बेटे अदीब से भी मुलाकात की. वह जौहर यूनिवर्सिटी भी पहुंचे और पार्टी तथा विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों से बातचीत की.
शिवपाल यादव के इस दौरे को समाजवादी पार्टी की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी आजम खान को नाराज नहीं करना चाहती. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक के लिहाज से आजम खान की अहमियत को देखते हुए सपा के लिए उनकी नाराजगी दूर करना जरूरी माना जा रहा है.
दरअसल, कुछ समय पहले आजम खान के जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात की थी. उस समय भी कोशिश यही थी कि आजम खान और सपा नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी को कम किया जाए. हालांकि, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद और प्रदर्शन के बीच आजम खान की नाराजगी की चर्चा दोबारा तेज हो गई.
आजम खान की ओर से यह अपेक्षा जताई जाती रही है कि अखिलेश यादव उनके मुद्दों पर खुलकर सामने आएं. लेकिन इस बार रामपुर नहीं पहुंच पाने के बीच शिवपाल यादव का वहां जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बता दें कि शिवपाल यादव और आजम खान के बीच पुराना राजनीतिक संबंध रहा है. दोनों ने समाजवादी पार्टी के पुराने दौर में साथ काम किया है. ऐसे में पार्टी के भीतर यह माना जा सकता है कि शिवपाल व्यक्तिगत रिश्तों का इस्तेमाल कर आजम खान के साथ संवाद बढ़ाने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं.
मोहिबुल्ला नदवी की सक्रियता भी बनी वजह?
आजम खान की नाराजगी की एक वजह रामपुर में सांसद मोहिबुल्ला नदवी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को भी माना जा रहा है. आरोप है कि मोहिबुल्ला नदवी की सक्रियता के साथ रामपुर में आजम खान के विरोधी खेमे के कुछ लोगों को सपा में जगह मिल रही है.
डिंपल यादव की मौजूदगी में रामपुर में कुछ लोगों के सपा में शामिल होने की भी चर्चा रही. इनमें मोहम्मद वकील एडवोकेट का नाम सामने आया, जिन्होंने अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चुनाव लड़ा था. ऐसे घटनाक्रमों को आजम खान के करीबी खेमे की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है.
जेल में आजम के साथ व्यवहार पर शिवपाल के सवाल
रामपुर पहुंचने के बाद शिवपाल यादव ने आजम खान के जेल में रहने के दौरान उनके साथ कथित व्यवहार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इतने बड़े नेता को जमीन पर लिटाया जा रहा है और दवाइयों तक का उचित इंतजाम नहीं है. उन्होंने जेल में मिलने वाली अन्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए.
शिवपाल का यह बयान इस लिहाज से अहम है कि उन्होंने आजम खान के मुद्दे को सिर्फ पार्टी के अंदर की बातचीत तक सीमित रखने के बजाय सार्वजनिक रूप से भी उठाया.
संभल के मुद्दे पर भी मुखर हुए शिवपाल
रामपुर दौरे के दौरान शिवपाल यादव ने संभल हिंसा से जुड़े मामलों को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो संभल में लगाए गए झूठे मुकदमे वापस लिए जाएंगे और गलत रिपोर्ट देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी.
उनके इस बयान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं तक सियासी संदेश पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. अखिलेश यादव जहां हाल के समय में कुछ मुस्लिम मुद्दों पर अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाते नजर आए हैं, वहीं शिवपाल के बयान ज्यादा मुखर दिखाई दे रहे हैं.
क्या ओवैसी के बढ़ते प्रभाव की भी चिंता?
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों को लेकर समाजवादी पार्टी की चुनौती सिर्फ आजम खान की नाराजगी तक सीमित नहीं है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है. बहराइच और मुरादाबाद जैसे इलाकों में ओवैसी की राजनीतिक सक्रियता ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों के समीकरण को लेकर सपा की चिंता बढ़ाई है.
इसी बीच AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने शिवपाल यादव की आजम खान से मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मुलाकात का स्वागत करते हुए सवाल उठाया कि चुनाव नजदीक आने पर ही आजम खान की याद क्यों आई.
आजम को मनाने से आगे की रणनीति?
शिवपाल यादव का रामपुर दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि इसे सिर्फ आजम खान की नाराजगी दूर करने की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जा रहा. इसके पीछे सपा के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने पुराने मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने की बड़ी रणनीति भी हो सकती है.
हालांकि, आजम खान की नाराजगी कितनी दूर हुई है और क्या शिवपाल यादव उन्हें सपा नेतृत्व के साथ पूरी तरह जोड़ पाने में सफल होंगे, इसका जवाब अभी सामने नहीं आया है. लेकिन इतना साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रामपुर और आजम खान एक बार फिर समाजवादी पार्टी की सियासत के केंद्र में आ गए हैं.