एक समय था जब डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों को केवल मेडिकल की पढ़ाई नहीं करनी होती थी बल्कि अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का भी सामना करना पड़ता था. देश के अलग-अलग राज्यों में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित होती थीं, जिससे छात्रों को कई फॉर्म भरने, अलग-अलग पैटर्न समझने और कई परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी.
इसी समस्या को कम करने के लिए और पूरे देश में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को एक समान बनाने के उद्देश्य से NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट की शुरुआत की गई. लेकिन देशभर में एक ही मेडिकल परीक्षा लागू करना आसान नहीं था.इसे लागू करने के लिए सालों तक नीतिगत चर्चा,कानूनी लड़ाई और कई स्तरों पर बदलाव की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. आज NEET देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है, लेकिन इसके पीछे एक लंबा सफर और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को बदलने की बड़ी कोशिश छिपी हुई है.
साल 2013 में पहली बार हुई परीक्षा
मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को एक समान बनाने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का प्रस्ताव रखा. इसके बाद 2013 में पहली बार NEET-UG आयोजित की गई. इसका उद्देश्य देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक साझा परीक्षा व्यवस्था बनाना था. हालांकि, नीट की शुरुआत के बाद ही इसे लेकर तरह-तरह के विवाद सामने आए. कुछ राज्यों और संस्थानों ने अलग-अलग कारणों से इसका विरोध किया. मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी चुनौतियों के कारण NEET को लेकर स्थिति कुछ समय तक स्पष्ट नहीं रही.
साल 2016 में वापस से हुई परीक्षा
इसके बाद साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद NEET को दोबारा लागू किया गया और इसे देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की मुख्य परीक्षा बना दिया गया. इसके बाद से MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए नीट स्कोर को अनिवार्य कर दिया गया. साल 2019 से NEET परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा किया जाने लगा. समय के साथ NEET देश की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल हो गई. हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं.
NEET का सफर सिर्फ एक परीक्षा की शुरुआत की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत में मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को एक समान बनाने की कोशिश की कहानी भी है. हालांकि,आज भी परीक्षा की कठिनाई, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर बहस जारी है.
हमेशा पूछे जाते हैं ये सवाल-
1. नीट-यूजी परीक्षा की शुरुआत कब हुई थी?
इस परीक्षा की शुरुआत साल 2013 में किया गया था.
2. कब हुई पहली परीक्षा?
साल 2014 और 2015 में नीट परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ था. साल 2016 में पहली बार परीक्षा का आयोजन हुआ था.
3. पहले क्या था नीट का नाम?
बता दें कि नीट परीक्षा का नाम पहले एआईपीएमटी था जिसका ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट था.
4. कितनी भाषाओं में आयोजित होती है परीक्षा?
2016 में नीट परीक्षा तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती भाषाओं में आयोजित की गई थी. 2017 में कन्नड़ और उड़िया भाषाएं भी जोड़ दी गई थीं. लेकिन इसके बाद से यानी अब तक इसका आयोजन 13 भाषाओं में किया जाता है.
5. NTA से पहले कौन करता था आयोजन?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से पहले इस परीक्षा की जिम्मेदारी सीबीएसई को सौंपी गई थी. देश में पहली नीट परीक्षा सीबीएसई ने ही आयोजित करवाई थी.