फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की तारीख 31 जुलाई को समाप्त हो गई. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बताया कि 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक लोगों ने आईटीआर फाइल किया.
लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा भी राज्य है जहां के निवासियों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है. उनकी आमदनी लाखों में हो या करोड़ों में, उन्हें सरकार को कोई इनकम टैक्स नहीं देना होता है. इस राज्य का नाम है सिक्किम.
सिक्किम के करीब 95% निवासियों को इनकम टैक्स में 100% छूट मिली हुई है. यह छूट किसी नई सरकारी योजना या हाल में दिए गए टैक्स ब्रेक की वजह से नहीं, बल्कि खास कानूनी प्रावधानों के कारण है. सिक्किम को भारत का 'टैक्स हेवन' भी कहा जाता है. सिक्किम हमेशा से भारत का हिस्सा नहीं था और पहले यह एक स्वतंत्र राजशाही थी, जिसे किंगडम ऑफ सिक्किम के नाम से जाना जाता था. साल 1975 में जनमत संग्रह के बाद सिक्किम के लोगों ने भारत में विलय को चुना और यह देश का 22वां राज्य बना.
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सिक्किम के लोग क्यों नहीं देते इनकम टैक्स?
भारत में शामिल होने के बाद स्थानीय लोगों के अधिकारों और वहां पहले से लागू कानूनों की रक्षा के लिए संविधान में आर्टिकल 371एफ जोड़ा गया. इस खास प्रावधान के तहत सिक्किम को कानूनी और प्रशासनिक सुरक्षा दी गई, ताकि वहां के मूल निवासियों और पारंपरिक व्यवस्था के हित सुरक्षित रह सकें. सिक्किम में इनकम टैक्स छूट की जड़ें 1948 तक जाती हैं. उस समय सिक्किम के तत्कालीन शासक चोग्याल ने ऐसा नियम लागू किया था, जिसके तहत स्थानीय लोगों पर टैक्स नहीं लगाया जाता था. सिक्किम जब भारत का हिस्सा बना, तब यह तय हुआ कि राज्य के मूल निवासियों को मिल रही यह छूट जारी रहेगी.
इसी व्यवस्था के तहत संविधान में आर्टिकल 371एफ जोड़ा गया और बाद में सिक्किमी के मूल निवासियों को इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 10(26AAA) के तहत इनकम टैक्स में 100 प्रतिशत छूट दी गई. हालांकि, सिक्किम में रहने वाला हर व्यक्ति इस छूट का हकदार नहीं है. शुरुआत में यह छूट सिर्फ उन लोगों को मिलती थी, जिनके पास सिक्किम सब्जेक्ट सर्टिफिकेट (SSC) था, और उन्हें राज्य का मूल निवासी माना जाता था. बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस छूट का दायरा बढ़ाया गया.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय मूल के वे लोग भी राज्य के मूल निवासी माने जाएंगे, जो 26 अप्रैल 1975 यानी सिक्किम के भारत में शामिल होने से एक दिन पहले तक, यहां स्थायी रूप से रह रहे थे. इसके बाद राज्य की करीब 95% आबादी इनकम टैक्स छूट के दायरे में आ गई. हालांकि, कोई व्यक्ति 26 अप्रैल 1975 के बाद किसी दूसरे राज्य से आकर सिक्किम में बसा है, तो उसे इनकम टैक्स में छूट नहीं मिलती. उस व्यक्ति पर वही सामान्य इनकम टैक्स नियम लागू होंगे जो देश के बाकी हिस्सों में लागू होते हैं.