झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन यानी कि जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल खांग्याते को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्हें CID ने गिरफ्तार किया है. जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच हुई है. JPSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पिछले कुछ समय से उनपर सवाल उठ रहे थे जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इस मामले में में सीआईडी भी जांच कर रही है. इसी जांच के दौरान सीआईडी की टीम ने जेपीएससी मुख्यालय में छापेमारी की थी.
जांच के बाद दिया था इस्तीफा
बता दें कि एल. खियांग्ते ने हाल ही में जेपीएससी के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया था. उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा राजभवन भेजा था. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा को स्वीकार कर लिया था. उनका इस्तीफा ऐसे समय आया था, जब 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद चल रहा था. छात्रों ने परीक्षा के परिणाम में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया था. इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं.
कौन हैं एल. खियांग्ते?
राज्य के प्रशासनिक इतिहास में सर्वोच्च पद संभालने वाले एल. खियांग्ते (लाल बियाकतुलुआंगा खियांग्ते) की गिनती देश के बेहद पढ़े-लिखे और वरिष्ठ आईएएस अफसरों में होती रही है. मिजोरम के आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले खियांग्ते का एकेडमिक और प्रशासनिक करियर भी चर्चा में रहा है. खियांग्ते ने अपनी स्नातक की पढ़ाई इतिहास (History) विषय से पूरी की. पढ़ाई के दौरान वे एक मेधावी छात्र रहे. उन्होंने 1987 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और 1988 कैडर के IAS अधिकारी बने. वे बिहार-झारखंड कैडर में 36 साल तक सेवा में रहे हैं. इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (ATI) के महानिदेशक (DG) और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक व प्रशासनिक पदों को संभाला.
रांची में एक तरफ जहां हजारों अभ्यर्थी धुर्वा मोड़ पर सड़कों पर डटे हैं, वहीं दूसरी तरफ JPSC के इस सबसे बड़े चेहरे की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि 14वीं JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में जो गड़बड़ी हुई थी, उसके तार आयोग के सबसे शीर्ष दफ्तर से जुड़े थे.
क्या है विवाद?
सेवानिवृत्त होने से ठीक पहले वे झारखंड सरकार के सर्वोच्च प्रशासनिक पद यानी मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके थे. रिटायरमेंट के तुरंत बाद राज्य सरकार ने उन्हें फरवरी 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का अध्यक्ष नियुक्त किया था लेकिन 14वीं JPSC परीक्षा में व्यापक पैमाने पर पेपर लीक, OMR शीट में फेरबदल और आउटसोर्सिंग एजेंसी की धांधली के आरोप लगने के बाद CID ने जब शिकंजा कसा, तो उन्होंने 22 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
कौन-से बड़े विवाद और घपले जुड़े हैं इनसे?
एल. ख्यांगते का कार्यकाल JPSC के इतिहास का सबसे विवादास्पद कार्यकाल साबित हुआ. उनके दौर में हुए मुख्य विवादों में 14वीं JPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा में भारी गड़बड़ी के आरोप शामिल हैं. 14वीं JPSC परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि OMR शीट के साथ छेड़छाड़ की गई, कुछ खास सेंटरों पर आंसर-की पहले से उपलब्ध कराई गई और आउटसोर्सिंग कंपनियों (जैसे TSR Data Processing Ltd) को बिना कड़े वेरिफिकेशन के परीक्षा का काम सौंप दिया गया.
9 बड़ी परीक्षाओं का अचानक स्थगित होना
CID की छापेमारी और दफ्तरों से फर्जी दस्तावेज, मोबाइल, लैपटॉप, एडमिट कार्ड और कार्बन OMR शीट्स बरामद होने के बाद JPSC को प्रशासनिक और न्यायिक सेवा सहित 9 भर्ती परीक्षाएं रद्द/स्थगित करनी पड़ी थी.
आउटसोर्सिंग एजेंसी और कमीशन के अफसरों से साठगांठ
CID की जांच में अब तक डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता और 19 से ज्यादा आरोपी (जिनमें बाहरी बिचौलिए और आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी शामिल हैं) गिरफ्तार हो चुके हैं. आरोप है कि चेयरमैन पद पर रहते हुए एल. ख्यांगते ने इन फर्जीवाड़ों पर पर्दा डालने और धांधली को शह देने में मुख्य भूमिका निभाई.
गहन पूछताछ और सरकारी आवास पर रेड
रिजाइन करने के बाद CID ने उनसे लगातार कई चरणों में (7 से 9 घंटे तक) पूछताछ की और उनके सरकारी आवास पर रेड मारी गई. बयानों में विरोधाभास और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने के बाद आज उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया. रांची की सड़कों पर 'अहिंसक सत्याग्रह' कर रहे अभ्यर्थियों और अनशन पर बैठे नेताओं की सबसे बड़ी मांग ही यही थी कि केवल छोटे कर्मचारियों को मोहरा न बनाया जाए.