आईआईटी दिल्ली में 31 वर्षीय एमएससी फिजिक्स के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उपजे जनाक्रोश और चार दिनों से जारी छात्र प्रदर्शनों के बीच संस्थान ने जांच समिति का पुनर्गठन किया है. जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता को इस पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
इससे पहले समिति की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार को सौंपी गई थी, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए खुद को इस जांच से अलग कर लिया था.
कौन हैं जस्टिस मुक्ता गुप्ता?
जस्टिस मुक्ता गुप्ता देश की जानी-मानी कानूनी हस्ती और दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज हैं. उन्होंने आपराधिक मामलों और निष्पक्ष जांच के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से बीएससी और कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 1984 में दिल्ली बार काउंसिल में नामांकित होने के बाद उन्होंने संवैधानिक, नागरिक और आपराधिक मामलों में वकालत शुरू की.
जज बनने से पहले वे दिल्ली सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) और सीबीआई की विशेष वकील रह चुकी हैं. उन्होंने देश के सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) का नेतृत्व किया है, जिनमें शामिल हैं:
संसद हमला (2001) और लाल किला हमला कांड (2000)
जेसिका लाल हत्याकांड
नैना साहनी (तंदूर कांड) और नितीश कटारा हत्याकांड
प्रियदर्शिनी मट्टू और मधुमिता शर्मा हत्याकांड
नेवल वॉर रूम लीक केस (सीबीआई की ओर से)
न्यायिक कार्यकाल: 23 अक्टूबर 2009 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का एडिशनल जज और 2014 में स्थायी जज बनाया गया. वे 27 जून 2023 को सेवानिवृत्त हुईं. अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वे त्वरित न्याय और सख्त न्यायिक फैसलों के लिए जानी गईं.
अब क्या करेगी यह जांच समिति?
जस्टिस मुक्ता गुप्ता की अगुवाई वाली इस नई समिति में एम्स (AIIMS) नई दिल्ली के मनोरोग विभाग (साइकेट्री) के अध्यक्ष डॉ. प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल हैं. यह समिति छात्र की मौत के कारणों, परिसर में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा तंत्र में हुई कथित संस्थागत खामियों की गहनता से पड़ताल करेगी और संस्थान को अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट सौंपेगी.
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस (किशनगढ़ थाना) भी इस मामले में 'आत्महत्या के लिए उकसाने' (Abetment to suicide) का मामला दर्ज कर समानांतर जांच कर रही है, जिसमें छात्र का मोबाइल फोन और काउंसलिंग रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं.