गुजरात यूनिवर्सिटी में पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है. यूनिवर्सिटी ने उनके कार्यकाल में अलग-अलग विभागों में नियुक्त किए गए 10 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. आरोप है कि इन अधिकारियों की नियुक्ति हंगामी तौर पर की गई थी और उन्हें हर महीने लाखों रुपये तक की सैलरी दी जा रही थी. इनमें कुछ अधिकारियों की सैलरी 5 लाख रुपये तक बताई जा रही है.
दिए गए जांच के आदेश
पिछले कुछ दिनों से गुजरात यूनिवर्सिटी में एबीवीपी द्वारा विरोध प्रदर्शन करके यूनिवर्सिटी में नियुक्त 10 हंगामी अधिकारियों को दूर करने की मांग की जा रही थी. जिसपर गुजरात यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति जगदीश जोशी ने 5 अगस्त को तीन सदस्यों की कमिटी का गठन करके हंगामी अधिकारियों की योग्यता, नियुक्ति के नियम और नियुक्ति को लेकर जांच के आदेश दिए थे. जिसके बाद कमिटी ने जांच करके रिपोर्ट देने के बाद यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति ने 10 हंगामी तौर पर नियुक्त अधिकारियों को अगले आदेश तक सस्पेंड किया है.

जांच के बाद लिया गया फैसला
गुजरात यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति जगदीश जोशी ने कहा कि GUSEC के ग्रुप CEO श्रीनिवास राव सुरेड्डी, IDSRF के CEO मानसिंह राजौरा, GUSEC के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट बिस्वजीत अधिकारी, अकाउंट विभाग के OSD दिनेश कुमार, CPC के डायरेक्टर और KS के इंचार्ज डायरेक्टर पावन पंडित, एस्टेट विभाग के इंजीनियर चंद्रशेखर झा, प्रोफेसर और प्रैक्टिस के डॉ.राज चावला और सोनल मल्होत्रा, लीगल ऑफिसर तुषार त्रिवेदी, फायर ऑफिसर परेश सोनी को तीन सदस्यों की जांच कमिटी की रिपोर्ट के बाद तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. इन सभी अधिकारियों की नियुक्ति पूर्व कुलपति के समय में हुई थी जिसे लेकर कई सवाल उठ रहे थे, जिसकी वजह से अगले आदेश तक सभी को सस्पेंड करने का फैसला लिया गया है.
लंबे समय से हो रहा था हंगामा
ABVP कर्णावती नगर के मंत्री ध्रुमिल अखानी ने कहा कि लंबे समय से यूनिवर्सिटी में हुई गैरकानूनी नियुक्तियों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, जिनके पास योग्यता नहीं थी, कुछ तो एसबीआई, ओएनजीसी से रिटायर्ड हो चुके थे लेकिन फिर भी उन्हें 2 से 5 लाख तक की सैलरी देकर गलत तरीके से यूनिवर्सिटी में नियुक्त कर दिया गया था. ये पैसे सामान्य छात्रों के लिए इस्तेमाल होने चाहिए थे. इसलिए UGC की गाइडलाइन की अनदेखी करके जिन 10 अधिकारियों को करोड़ों रुपये चुकाये गए है, उन्हें मात्र सस्पेंड करने से नहीं चलेगा. छात्रों के हित में जो पैसे इस्तेमाल होने चाहिए थे, उनकी सभी से रिकवरी होनी चाहिए.
4 अधिकारियों पर खर्च होते थे इतने रुपये
ध्रुमिल अखानी ने कहा कि GUSEC में पहले चार अधिकारियों का वार्षिक खर्च 30 लाख रुपये था, जो पिछले तीन वर्ष में नई नियुक्तियों के बाद बढ़कर 1 करोड़ से अधिक पहुंच गया था. GUSEC में रिटायर्ड अधिकारी की नियुक्ति करके प्रति माह 5 लाख रुपये और अन्य अधिकारी को 2.5 लाख रुपये सैलरी दी जा रही थी. अकाउंट, लीगल, फायर, CPC समेत विभागों में किसी मंजूरी के बगैर ही हंगामी अधिकारियों की नियुक्ति लाखों की सैलरी पर कर दी गई थी. इन नियुक्तियों में UGC के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा था. हमारे विरोध के बाद सभी अधिकारियों को सस्पेंड किया है लेकिन हमारी मांग ये भी है कि अब तक जो इन सभी को सैलरी के तौर पर करोड़ों रुपये यूनिवर्सिटी के चुकाए गए है, उसकी रिकवरी की भी है.