महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों ने संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन किया. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और 10 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल विक्रांत सुरेश देशपांडे मौजूद थे.
इसमें भारतीय सेना के पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर, एम777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, धनुष आर्टिलरी सिस्टम, एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, एल70 एयर डिफेंस गन और स्वाती वेपन-लोकेटिंग रडार शामिल रहे. अमेरिकी पक्ष ने हिमार्स और एम-लिड्स सिस्टम तैनात किए. ये सभी हथियार एक कठिन मैदानी माहौल में एक साथ काम करते दिखे.
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यह प्रदर्शन सिर्फ गोलाबारी का प्रदर्शन नहीं था. यह दिखाता है कि दोनों सेनाएं जटिल गतिविधियों की योजना बनाने, तालमेल बिठाने और उन्हें अंजाम देने में कितनी सक्षम हो गई हैं. नियमित ऐसे अभ्यास से एक-दूसरे के सिस्टम, प्रक्रियाएं और युद्धक तरीके बेहतर समझ में आते हैं.
Impressive to see U.S. and Indian forces training together at Mahajan Field Firing Range. This exercise reflects the strength of our defense partnership: trust, readiness, interoperability, and shared purpose. Proud of what @USArmy and @adgpi are achieving together. pic.twitter.com/TAZB3tqtsX
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) September 24, 2026
युद्ध अभ्यास 2026 भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत बना रहा है. इसमें साझा प्रशिक्षण, आपसी मेलजोल और जटिल युद्धक्षेत्रों में साथ काम करने का विश्वास बढ़ता है. अलग-अलग देशों के हथियार और तरीके एक साथ काम करें तो वास्तविक युद्ध या शांति अभियानों में फायदा होता है. हिमार्स जैसी अमेरिकी प्रणाली और पिनाका जैसी भारतीय प्रणाली का एक साथ इस्तेमाल दोनों पक्षों की ताकत को जोड़ता है.
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राजदूत और वरिष्ठ कमांडर की मौजूदगी इस अभ्यास को राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर महत्व देती है. यह बताता है कि दोनों देश अपनी रक्षा साझेदारी को सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहते बल्कि मैदान में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाना चाहते हैं.
ऐसे संयुक्त अभ्यास भविष्य के जटिल युद्धक्षेत्रों के लिए तैयार करते हैं जहां कई तरह के हथियार और सेंसर एक साथ काम करते हैं. महाजन जैसी जगह पर होने वाला प्रशिक्षण वास्तविक परिस्थितियों के करीब होता है. इससे सैनिकों में आत्मविश्वास बढ़ता है और कमांडरों को एक-दूसरे की क्षमताओं का सीधा अनुभव मिलता है. युद्ध अभ्यास 2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो दोनों सेनाओं के संबंधों को और परिपक्व बना रहा है.