दुनिया में AI के इस्तेमाल के साथ नए डेटा सेंटर और मशीनें तेजी से बढ़ रही हैं. लेकिन इन मशीनों के पुराने होने के बाद उनका क्या होगा, यह भी बड़ा सवाल है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 से 2050 के बीच AI से जुड़े 39.5 करोड़ से 61.7 करोड़ टन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल से बाहर हो सकते हैं. यानी अगले 25 साल में AI से बड़ी मात्रा में ई-कचरा निकल सकता है.
इसमें सिर्फ AI सर्वर और चिप शामिल नहीं हैं. डेटा सेंटर में लगे नेटवर्किंग उपकरण, स्टोरेज, बिजली के सिस्टम, बैटरी, ट्रांसफॉर्मर और कूलिंग सिस्टम भी पुराने होकर कबाड़ बन सकते हैं. अनुमान है कि 2050 तक AI से जुड़ा ई-कचरा हर साल 3.1 करोड़ से 4.6 करोड़ टन तक पहुंच सकता है.
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अगस्त 2026 तक दुनिया के 179 देशों में 12,259 डेटा सेंटर मौजूद थे. AI की बढ़ती मांग के साथ इनकी संख्या और यहां इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी बढ़ रही हैं. ऐसे में पुराने हार्डवेयर को संभालना आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है.
पहले के अनुमान से 40-60 गुना ज्यादा क्यों है आंकड़ा?
पहले AI के ई-कचरे का अनुमान लगाते समय मुख्य रूप से सर्वर और जीपीयू जैसे उपकरणों को देखा जाता था. नई रिपोर्ट में डेटा सेंटर के दूसरे जरूरी उपकरणों को भी शामिल किया गया है. सर्वर को चलाने के लिए बिजली चाहिए. डेटा रखने के लिए स्टोरेज सिस्टम चाहिए.

मशीनों को जोड़ने के लिए नेटवर्किंग उपकरण और उन्हें ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम चाहिए. ये सभी उपकरण भी समय के साथ पुराने होते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक हर साल 86 लाख से 1.31 करोड़ टन AI से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल से बाहर हो सकते हैं. यह पुराने अनुमानों से करीब 40 से 60 गुना ज्यादा है.
डेटा सेंटर में सर्वर सिर्फ 13 फीसदी
डेटा सेंटर में सिर्फ सर्वर और कंप्यूटिंग मशीनें ही नहीं होतीं. रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वर, एक्सेलरेटर और रैक का वजन पूरे इलेक्ट्रोमैकेनिकल ढांचे का करीब 13 फीसदी है. बाकी 87 फीसदी हिस्से में बिजली, नेटवर्किंग, स्टोरेज, ट्रांसफॉर्मर, बैटरी, बैकअप और कूलिंग सिस्टम आते हैं. इसलिए AI से निकलने वाले ई-कचरे का हिसाब लगाते समय इन सभी चीजों को गिनना जरूरी है.
दुनिया में 12,259 डेटा सेंटर
अगस्त 2026 तक 179 देशों में 12,259 डेटा सेंटर थे. इनमें सबसे ज्यादा 5,388 डेटा सेंटर अमेरिका में हैं. जर्मनी में 529 और ब्रिटेन में 523 डेटा सेंटर हैं. AI की मांग बढ़ने के साथ इन डेटा सेंटर में निवेश भी बढ़ रहा है. रिपोर्ट में मैकिन्से का हवाला दिया गया है.
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इसके मुताबिक, 2025 से 2030 के बीच AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हो सकता है. इस निवेश से नए सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण, बिजली के सिस्टम और कूलिंग सिस्टम लगाए जाएंगे. समय के साथ इनमें से कई उपकरण पुराने होकर बदले जाएंगे और ई-कचरा बढ़ेगा.
कचरा सिर्फ डेटा सेंटर से नहीं निकलेगा
AI की वजह से सिर्फ डेटा सेंटर का कचरा नहीं बढ़ेगा. नई तकनीक आने के साथ कंप्यूटर, मोबाइल, एज डिवाइस और टेलीकॉम उपकरण भी जल्दी पुराने हो सकते हैं. अगर कोई कंपनी नई और ज्यादा ताकतवर तकनीक पर जल्दी शिफ्ट करती है, तो पुराने उपकरणों को उनकी पूरी उम्र तक इस्तेमाल करने के बजाय पहले ही हटाया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक डेटा सेंटर के बाहर से हर साल 1.62 करोड़ से 3.07 करोड़ टन अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकल सकता है.

ई-कचरे में हो सकते हैं ‘फॉरएवर केमिकल्स’
AI से निकलने वाले कचरे की चिंता सिर्फ इसकी मात्रा को लेकर नहीं है. रिपोर्ट में पीएफएएस जैसे केमिकल का भी जिक्र है. इनमें से कई केमिकल पर्यावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं. इसलिए इन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है. अगर पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सही तरीके से रिसाइकिल नहीं किया गया, तो उनमें मौजूद केमिकल और दूसरी सामग्री पर्यावरण के लिए परेशानी पैदा कर सकती है.
दुनिया पहले से ई-कचरे से परेशान
AI से ई-कचरा ऐसे समय में बढ़ सकता है जब दुनिया पहले से ही इस समस्या से जूझ रही है. ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर के मुताबिक, 2022 में दुनिया में करीब 6.2 करोड़ टन ई-कचरा पैदा हुआ था. इसमें से सिर्फ 22.3 फीसदी कचरे को औपचारिक तरीके से कलेक्ट और रिसाइकिल किया गया. ऐसे में AI से आने वाला अतिरिक्त कचरा मौजूदा ई-कचरा मैनेजमेंट सिस्टम पर और दबाव डाल सकता है.
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2050 तक हर साल 21.1 करोड़ टन तक ई-कचरा
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, सामान्य ई-कचरे और AI से जुड़े अतिरिक्त कचरे को मिलाने पर 2050 तक दुनिया में हर साल 19.6 करोड़ से 21.1 करोड़ टन तक ई-कचरा पैदा हो सकता ह यानी AI के पर्यावरणीय असर की बात सिर्फ बिजली, पानी और कार्बन उत्सर्जन तक सीमित नहीं है.
AI को चलाने वाली मशीनें भी बड़ी मात्रा में कचरा पैदा कर सकती हैं. इसलिए पुराने सर्वर, कंप्यूटर, बैटरी और नेटवर्किंग उपकरणों को ज्यादा समय तक इस्तेमाल करने, दोबारा काम में लेने और सही तरीके से रिसाइकिल करने की व्यवस्था जरूरी होगी.