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पिनाका

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पिनाका (Pinaka) भारत में विकसित एक बहु-रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) ने भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है. इसका नाम भगवान शिव के धनुष पिनाक से लिया गया है. यह प्रणाली कई रॉकेटों को एक साथ दागने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसे ट्रक के चेसिस पर लगाया जाता है.

पिनाका के विकास की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी. वर्ष 1981 में रक्षा मंत्रालय ने लंबी दूरी की तोपखाने की प्रणाली विकसित करने से जुड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. इसके बाद 1983 में भारतीय सेना ने इस प्रणाली के लिए अपनी आवश्यकताएं तय कीं. डीआरडीओ की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट को परियोजना का मुख्य समन्वयक बनाया गया. इस परियोजना में डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं ने भी काम किया.

पिनाका का शुरुआती परीक्षण और विकास कई वर्षों तक चला. इसका इस्तेमाल पहली बार 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान किया गया था. उस समय पिनाका की दो लॉन्चर वाली एक टुकड़ी को 121 रॉकेट रेजिमेंट के साथ तैनात किया गया था. कारगिल क्षेत्र में ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद ठिकानों पर इसके इस्तेमाल ने इसे भारतीय सेना की रॉकेट आर्टिलरी प्रणाली में एक स्थान दिया.

फरवरी 2000 में पिनाका की पहली रेजिमेंट गठित की गई. वर्ष 2010 तक इसकी दो रेजिमेंट भारतीय सेना में शामिल हो चुकी थीं. बाद के वर्षों में सेना ने पिनाका की रेजिमेंटों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई. इसका उद्देश्य पुराने रॉकेट सिस्टम की जगह धीरे-धीरे आधुनिक स्वदेशी प्रणाली को शामिल करना था.

पिनाका के अलग-अलग संस्करण विकसित किए गए हैं. मार्क-1 एन्हांस्ड संस्करण की अधिकतम मारक क्षमता करीब 45 किलोमीटर बताई जाती है, जबकि लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट संस्करण की क्षमता करीब 120 किलोमीटर तक बताई गई है. एक लॉन्चर से 12 उच्च-विस्फोटक रॉकेटों की पूरी सलामी कम समय में दागी जा सकती है.

अप्रैल 2013 में पिनाका रॉकेटों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 1,388.80 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी. इसके तहत उत्पादन क्षमता को सालाना 1,000 रॉकेट से बढ़ाकर 5,000 रॉकेट करने की योजना बनाई गई थी. उत्पादन क्षमता के विस्तार का काम 2014 तक पूरा किया गया.

मार्च 2024 में भारतीय सेना की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास दो और पिनाका रेजिमेंट गठित करने की योजना की जानकारी सामने आई थी. जून 2025 तक इन रेजिमेंटों के गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई थी. इसके बाद अन्य रेजिमेंटों के लिए प्रशिक्षण और उपकरणों की व्यवस्था जारी रही.

15 मार्च 2026 तक भारतीय सेना सात पिनाका रेजिमेंट को शामिल कर उन्हें परिचालन में ला चुकी थी, जबकि आठवीं रेजिमेंट का गठन हो चुका था और उसे आधे से ज्यादा उपकरण मिल चुके थे. नौवीं और दसवीं रेजिमेंट को 2027 में शामिल किए जाने की योजना बताई गई है.

भविष्य में पिनाका को प्रलय, निर्भय और ब्रह्मोस जैसी प्रणालियों के साथ प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स का हिस्सा बनाए जाने की योजना भी सामने आई है. इस तरह पिनाका भारतीय सेना की रॉकेट आधारित मारक प्रणालियों में एक प्रमुख स्वदेशी प्रणाली के रूप में शामिल है.

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