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मिड-डे मील के अनाज का ऐसा हाल, चना-गेहूं-चावल में दिखे जिंदा कीड़े, Video

गुजरात के सुरेंद्रनगर शहर के सरकारी स्कूल नंबर 2 में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील के अनाज में कीड़े और कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया. चना, गेहूं और चावल में जिंदा कीड़े पाए जाने का आरोप है. माता-पिता और स्थानीय लोगों ने खराब अनाज भेजने वाले जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई और बच्चों की सेहत पर नजर रखने की मांग की है.

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अनाज में मिले जिंदा कीड़े. (Photo: Screengrab)
अनाज में मिले जिंदा कीड़े. (Photo: Screengrab)

गुजरात के सुरेंद्रनगर शहर के सरकारी स्कूल नंबर 2 में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्कूल में बच्चों के खाने के लिए भेजे गए अनाज में कीड़े और जिंदा कीड़े मिलने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने विरोध जताया. माता-पिता का आरोप है कि बच्चों को जो खाना दिया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता खराब है. उनका कहना है कि इससे बच्चों की सेहत पर असर पड़ सकता है और बच्चे बीमार पड़ सकते हैं. 

बताया गया कि स्कूल में मिले अनाज में चना, गेहूं और चावल शामिल थे. अभिभावकों के मुताबिक इन अनाजों में जिंदा कीड़े पाए गए. इसके बाद उन्होंने खराब अनाज को हटाकर बच्चों के लिए तुरंत दूसरा खाना उपलब्ध कराने की मांग की. माता-पिता ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता का अनाज दिया जाना चाहिए और उसे अच्छी तरह पकाकर ही बच्चों को खाना दिया जाए.

मिड-डे मील के तहत पूरे गुजरात के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को खाना दिया जाता है. अभिभावकों और कम्युनिटी लीडर्स ने सवाल उठाया कि एक तरफ सरकार कह रही है कि गुजरात में कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं होना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ बच्चों को ऐसा अनाज दिया जा रहा है जिसमें कीड़े पाए जा रहे हैं.  उनका कहना है कि बच्चों की सेहत से जुड़ी ऐसी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि बच्चों की सेहत पर नजर रखी जाए और खराब खाना तुरंत बदला जाए.

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जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की मांग

अभिभावकों ने उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिसने कथित तौर पर खराब अनाज स्कूल में भेजा. उनका कहना है कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच पहले ही होनी चाहिए. माता-पिता ने यह भी मांग की कि अगर पूरे सुरेंद्रनगर जिले में इसी तरह का खराब अनाज पहुंचा है, तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए.

दूसरी ओर, सरकारी अधिकारी ने माना कि अनाज खराब था. अधिकारी के अनुसार खराब अनाज को अलग रख दिया गया है और घर के पैसे से अनाज लाकर बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा है. अधिकारी ने बताया कि खराब अनाज को अब बच्चों के खाने में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.

अधिकारी ने माना अनाज खराब था

इसके बाद अभिभावकों की मांग है कि सिर्फ स्कूल स्तर पर खराब अनाज को अलग करने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए. अगर ऐसा अनाज जिले के दूसरे स्कूलों में भी भेजा गया है, तो उसकी जांच होनी चाहिए. माता-पिता का कहना है कि बच्चों को मिलने वाला मिड-डे मील उनकी सेहत से सीधे जुड़ा है. इसलिए खाने की गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है और खराब अनाज की शिकायत सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

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रिपोर्टर- साजिदभाई बेलिम
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