अपाचे हेलिकॉप्टर (Apache Helicopter) को दुनिया के सबसे शक्तिशाली और अत्याधुनिक अटैक हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है. इसका आधिकारिक नाम AH-64 अपाचे है, जिसे अमेरिका की बोइंग कंपनी ने विकसित किया है. यह हेलिकॉप्टर विशेष रूप से दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. अपनी घातक मारक क्षमता, उन्नत तकनीक और हर मौसम में काम करने की क्षमता के कारण अपाचे आधुनिक युद्ध का अहम हथियार माना जाता है.
अपाचे हेलिकॉप्टर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी घातक फायरपावर है. इसमें 30 मिमी की चेन गन, हेलफायर मिसाइलें और रॉकेट सिस्टम लगे होते हैं, जो बेहद सटीक निशाना साधते हैं. यह हेलिकॉप्टर “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक से लैस है, जिससे मिसाइल दागने के बाद पायलट को लक्ष्य पर नजर बनाए रखने की जरूरत नहीं होती. इससे युद्ध के दौरान जोखिम काफी कम हो जाता है.
तकनीक के मामले में भी अपाचे बेहद उन्नत है. इसमें लॉन्गबो रडार लगा होता है, जो दुश्मन के ठिकानों को छिपे रहते हुए भी पहचान सकता है. यह रडार जमीन, पहाड़ों और खराब मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम करता है. इसके अलावा, नाइट विजन और थर्मल इमेजिंग सिस्टम इसे रात के अंधेरे में भी खतरनाक बना देते हैं.
भारत ने भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए अपाचे हेलिकॉप्टरों को शामिल किया है. भारतीय वायुसेना और थलसेना दोनों के बेड़े में अपाचे मौजूद हैं, जो सीमाओं पर सुरक्षा और युद्ध क्षमता को मजबूत करते हैं. पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में यह हेलिकॉप्टर बेहद उपयोगी साबित होता है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने एक साल में 15–20 नए वेपन सिस्टम शामिल किए और 8–10 मौजूदा प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया. तेजस, अपाचे, S-400 और ड्रोन जैसे सिस्टम से सेना की ताकत, एयर डिफेंस और स्ट्राइक क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक साल में भारत ने वेपन सिस्टम को जबरदस्त मजबूत किया. इमरजेंसी खरीद और DAC मंजूरी से 15-20 नए हथियार जोड़े गए, जैसे पिनाका रेजिमेंट, अपाचे हेलीकॉप्टर, 97 तेजस Mk-1A जेट, 850 ड्रोन और एस-400 मिसाइलें. साथ ही 8-10 पुराने सिस्टम (Su-30MKI, टी-90, S-400) को मॉडिफाई किया.
भारतीय वायुसेना ने अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के साथ समझौता किया है. तेजस फाइटर जेट के F404-IN20 इंजन के लिए देश में ही डिपो बनाया जाएहा. इससे इंजन को मरम्मत के लिए विदेश भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी. डिपो IAF द्वारा संचालित होगा जबकि GE तकनीकी सहायता देगी.
अमेरिका ने 30 मिनट के रेड में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को फोर्ट टियुना मिलिट्री कॉम्प्लेक्स से पकड़ लिया. महीनों की इंटेलिजेंस, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और डेल्टा फोर्स की तैयारी से सफलता मिली. मादुरो की तीन गलतियां की- कमजोर एयर डिफेंस, काउंटर-इंटेलिजेंस फेल और सिग्नल डिसिप्लिन की कमी.