यूक्रेन ने एक नई रणनीति अपनाकर रूसी सेना की तेल और अन्य सप्लाई लाइन पर भारी प्रहार किया है. मध्यम दूरी के नए ड्रोन अब रूसी तेल टैंकरों, ट्रकों, पुलों और ट्रेनों को निशाना बना रहे हैं. इससे दक्षिणी मोर्चे पर रूसी सेना को हथियार और ईंधन की कमी हो रही है. मई 2026 से शुरू हुए इन हमलों ने रूस की गर्मियों में बड़े हमले की योजना को भी बिगाड़ दिया है.
फ्रांसीसी ओपन सोर्स एनालिस्ट क्लेमेंट मोलिन और Geoconfirmed समूह ने करीब 150 ड्रोन हमलों की वीडियो और तस्वीरों को जियो-लोकेट करके जांचा है. इनमें ज्यादातर हमले मई के बाद हुए हैं. यूक्रेन के ये ड्रोन 50 से 300 KM तक मार कर सकते हैं. ये सब यूक्रेन में ही बने हैं. इनमें FP-2 और बेहेमोथ जैसे ड्रोन शामिल हैं. बेहेमोथ 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है. 70 किलो विस्फोटक ले जा सकता है.
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यूक्रेन की अनमैन्ड सिस्टम फोर्सेज ने बताया कि पिछले एक साल में मध्यम दूरी के ड्रोन हमलों की संख्या 28 गुना बढ़ गई है. इनका मकसद रूसी हमले की क्षमता को कम करना, दुश्मन की सप्लाई को मुश्किल बनाना और रूसी एयर डिफेंस को नष्ट करना है. इससे लंबी दूरी के ड्रोन के लिए रास्ता साफ होता है.

क्रिमिया और दक्षिणी मोर्चे पर भारी असर
क्रिमिया से जुड़ी सड़कों पर अब रूसी ट्रक और टैंकर जलते नजर आ रहे हैं. एक मुख्य हाईवे जो क्रिमिया को मेलिटोपोल से जोड़ता है, पूरी तरह जलते हुए ट्रकों से भरा हुआ है. क्रिमिया में ईंधन की भारी कमी हो गई है. रूस समर्थित सरकार ने ऐलान किया कि अब आम लोगों और दुकानों को ईंधन नहीं मिलेगा, सिर्फ सरकारी कामों के लिए दिया जाएगा.
यूक्रेन के ड्रोन अब तीन मुख्य सड़कों पर पूरी तरह हावी हो चुके हैं. रूसी मिलिट्री ब्लॉगर भी मान रहे हैं कि क्रिमिया को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले रास्ते एक-एक करके कट रहे हैं. चोंहार ब्रिज पर बार-बार हमले हुए हैं. ब्रिज पर बड़े-बड़े छेद हो गए हैं. ट्रैफिक बंद हो रहा है. रूस को अस्थाई पोंटून ब्रिज लगाने पड़ रहे हैं.
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रूस की नई मुश्किलें
रूसी कब्जे वाले लुहानस्क में दो मुख्य हाईवे बंद कर दिए गए हैं क्योंकि ड्रोन हमले बहुत बढ़ गए हैं. मरियुपोल बंदरगाह पर भी हमले हुए हैं, जिससे बिजली चली गई और रूसी सेना की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है.
रूसी एयर डिफेंस इन ड्रोन हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है. रिफाइनरी नष्ट हो रही हैं. ईंधन की समस्या बढ़ रही है. अब सिविल एविएशन भी ड्रोन के डर से प्रभावित हो रही है.

यूक्रेन की रणनीति
यूक्रेन के रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने इसे लॉजिस्टिकल लॉकडाउन कहा है. उनका कहना है कि अब दुश्मन मोर्चे से काफी दूर भी सुरक्षित नहीं रहेगा. ड्रोन हमले 300 किलोमीटर तक गहरे जाकर रूसी लॉजिस्टिक्स को नष्ट कर रहे हैं. ट्रेनों पर भी हमले हो रहे हैं, खासकर ईंधन वाली ट्रेनों पर.
रूसी सेना अब वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन वे भी सुरक्षित नहीं हैं. आर्मियान्स्क इलाके में 50 ट्रकों के इकट्ठा होने पर भी हमला हुआ. इससे रूसी सेना को दक्षिणी यूक्रेन में ईंधन और गोला-बारूद की कमी हो रही है.
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क्या यह फायदा ज्यादा दिनों तक रहेगा?
यूक्रेन को अभी अच्छा मौका मिला है क्योंकि रूस इस नई चुनौती से निपटने में समय ले रहा है. लेकिन यह फायदा हमेशा नहीं रहेगा. फिर भी यूक्रेन 3स्तरों के ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है – मोर्चे पर, सप्लाई लाइन पर और रूस के अंदर गहरे हमले. इससे रूसी सेना पर दबाव बढ़ रहा है. उनकी हमले की क्षमता कम हो रही है.
दक्षिणी इलाके में रूसी सेना इस साल कुछ जगहों पर पीछे हटी है. मुख्य रूप से सप्लाई लाइन कमजोर होने की वजह से. स्वतंत्र यूक्रेनी ग्रुप Deep State का कहना है कि दक्षिणी कब्जे वाले इलाके में सब कुछ कंट्रोल करने की क्षमता यूक्रेन के पास आ रही है, जिससे रूसी सेना को भूखे रहना पड़ रहा है.

यह नई ड्रोन रणनीति युद्ध के पांचवें साल में यूक्रेन को मजबूत स्थिति दे रही है. पहले रूस लंबी दूरी तक हमला कर पाता था, लेकिन अब यूक्रेन ने भी बैकएंड सप्लाई को निशाना बनाकर जवाब दिया है. अगर यह रणनीति जारी रही तो रूस की गर्मी की ऑफेंसिव मुश्किल हो सकती है.
रूस को अब अपनी सप्लाई लाइन को सुरक्षित करने, एयर डिफेंस मजबूत करने और नए रास्ते ढूंढने पड़ रहे हैं. वहीं यूक्रेन लगातार नए ड्रोन बना रहा है. हमले तेज कर रहा है. यह युद्ध अब ड्रोन की लड़ाई भी बन गया है.
यूक्रेन के मध्यम दूरी के ड्रोन रूसी सेना की रीढ़ यानी उसकी सप्लाई लाइन को तोड़ रहे हैं. ईंधन की कमी, पुलों का नुकसान और ट्रकों का जलना रूस के लिए बड़ी मुश्किल बन गया है. हालांकि युद्ध अभी लंबा चल रहा है, लेकिन यह नई रणनीति यूक्रेन को मजबूत मुकाबला करने का मौका दे रही है.