कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का ऐलान किया था. इसी दिन से संसद का मानसून सत्र भी शुरू होगा. लिहाजा, राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को उनकी सेहत का हवाला देते हुए उन्हें धरना स्थल से हटाकर अस्पताल शिफ्ट कर दिया था. इसके बाद जंतर-मंतर पर कुछ हलचल देखने को मिली. सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके पर काली स्याही भी फेंकी गई.
इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने दीपके और बाकी प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह पीटा. वीडियो में कुछ पुलिस वाले एक व्यक्ति को पीटते हुए और अपने साथ ले जाते हुए नजर आ रहे हैं.
वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “ये बीजेपी की तानाशाही खुलेआम की जा रही है. अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस द्वारा मारा पीटा जा रहा है. सत्ता के नाम पर बैठने वाले गुंडे सिस्टम को ना ठीक कर करके जनता पर अत्याचार कर रही है.”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो अगस्त 2025 का है, जब कॉकरोच जनता पार्टी की कोई चर्चा भी नहीं थी.
कैसे पता की सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये 16 अगस्त, 2025 के एक इंस्टाग्राम पोस्ट में मिला. इतनी बात तो यहीं साफ हो जाती है कि इस वीडियो का कॉकरोच जनता पार्टी या जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि 2025 में कॉकरोच जनता पार्टी का कोई नामोनिशान नहीं था.
इस पोस्ट में वीडियो के साथ ‘Save Delhi NCR Dogs’ हैशटैग का इस्तेमाल किया गया है. उस वक्त स्ट्रीट डॉग्स के लिए काम करने वाले और उनकी आवाज उठाने वाले कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने ये वीडियो शेयर किया था. ऐसे ही एक इंस्टाग्राम अकाउंट ने ये वीडियो करते हुए लिखा, “दिल्ली से कुत्तों को हटाए जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ आवाज उठाएं.” इसके अलावा इस वीडियो में कुछ लोग कुत्तों की तस्वीर वालीं तख्तियां पकड़े भी दिखाई दे रहे हैं.
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था. इस आदेश के खिलाफ डॉग लवर्स और एनिमल राइट एक्टिविस्ट सड़कों पर उतर आए थे.
दिल्ली के कनॉट प्लेस पर भी 16 अगस्त को ऐसा ही एक प्रदर्शन हुआ था, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इस प्रदर्शन का एक वीडियो शेयर किया था. पोस्ट के मुताबिक पुलिस ने इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था. पीटीआई के इस वीडियो में कुछ उन पुलिस वालों को भी देखा जा सकता है, जो वायरल वीडियो में भी नजर आ रहे हैं.
साफ है कि एक पुराने वीडियो को गलत दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.