रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव के एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे 'साउथर्न ब्रिज' को निशाना बनाकर दोहरे ड्रोन हमले किए हैं. युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब रूसी ड्रोनों ने कीव के किसी मुख्य पुल पर सीधा हमला किया है. यह पुल नीपर (Dnipro) नदी के ऊपर बना है.
कीव के पूर्वी तथा पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाली प्रमुख परिवहन और मेट्रो लाइन धुरी है. हालांकि प्रारंभिक निरीक्षण के बाद प्रशासन ने पुष्टि की कि संरचना को कोई गंभीर क्षति नहीं पहुंची है. पुल को यातायात के लिए फिर से खोल दिया गया, लेकिन यह हमला रूस की बदलती और आक्रामक रणनीति का स्पष्ट संकेत प्रस्तुत करता है.
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यह हमला अचानक नहीं हुआ है, बल्कि यह यूक्रेन के ऊर्जा नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को सर्दियों के मौसम से ठीक पहले पूरी तरह ध्वस्त करने का अभियान है. हाल के हफ्तों में रूस ने पारंपरिक शाहेद (Shahed) ड्रोनों के बजाय उच्च गति वाले जेट-संचालित (jet-powered) अटैक ड्रोनों का उपयोग तेजी से बढ़ाया है.
🇷🇺 🇺🇦 Russian drones on Thursday hit a major bridge in Kyiv for the first time since the start of the conflict with Ukraine, as Moscow stepped up its strikes on key infrastructure ahead of winter.
— AFP News Agency (@AFP) October 1, 2026
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यूक्रेनी राष्ट्रपति के सलाहकार सर्गी बेसक्रेस्टनोव के अनुसार, ये नए ड्रोन विशेष रूप से उच्च-वोल्टेज बिजली के खंभों, ट्रांसमिशन लाइनों और स्टील के पुलों को काटने और तोड़ने के उद्देश्य से डिजाइन किए गए हैं. यूक्रेन का मानना है कि रूस की मंशा कड़ाके की ठंड आने से पहले पूरे देश की बिजली आपूर्ति को ठप करने की है.
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इस हमले के साथ-साथ कीव में अन्य संवेदनशील स्थानों को भी निशाना बनाया गया है. हाल ही में एक ड्रोन कीव स्थित इंस्टीट्यूट फॉर न्यूक्लियर रिसर्च के परिसर में गिरा, हालांकि इसका टेस्ट रिएक्टर पूरी तरह सुरक्षित रहा और रेडिएशन का स्तर सामान्य पाया गया. इसके अतिरिक्त, रिहाइशी इमारतों, रेलवे नेटवर्क और स्कूलों पर भी हमले जारी हैं.
सर्दियों के मौसम में तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे जाने की आशंका के बीच यूक्रेन में बिजली संकट गहरा गया है, जिससे कई इलाकों में आपातकालीन पावर कट लागू करने पड़े हैं यूक्रेनी सेना जहां डोनेतस्क क्षेत्र में "विवाल्डी" (Vivaldi) नामक काउंटर-ऑफेंसिव चलाकर कुछ जमीन वापस पाने में सफल रही है, वहीं कीव में हवाई रक्षा प्रणालियों (जैसे पैट्रियट मिसाइल) की तत्काल आवश्यकता और बढ़ गई है.