आजतक सुरक्षा सभा के समापन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की सुरक्षा नीति के मूल सिद्धांतों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विद्वान हंस मॉर्गेंथाऊ का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित का मतलब देश की सीमाओं की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा तथा सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना है. सरकार ने सभी मोर्चों पर काम किया है.
उन्होंने शांति और कमजोरी में अंतर बताया...
वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराए.
शांति के लिए लड़ा गया युद्ध वंदनीय.
सीमाई बुनियादी ढांचे पर निवेश 400 प्रतिशत तक बढ़ गया है. आर्टिकल 370 हटाकर भारत की एकता और अखंडता को और मजबूत किया गया. सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के साथ उसे ताकत बनाया गया है. आज पूरी दुनिया योग दिवस मनाती है और नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसे पहलों के जरिए भारत विश्व को नेतृत्व दे रहा है. आज कोई ऐसा मंच नहीं जहां भारत की बात न सुनी जाए. 2019 से लगातार जी-7 बैठकों में आमंत्रित किया जा रहा है. 2023 में जी-20 की अध्यक्षता के दौरान मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन पास कराया गया.
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वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ और महासागर जैसे पहलों से विकासशील देशों की आवाज को नई ताकत मिली है. पड़ोसी देशों पर संकट आने पर भारत फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनकर सबसे पहले मदद पहुंचाता है. यह सक्रिय और जिम्मेदार वैश्विक भूमिका नए भारत की पहचान है.
आर्थिक सुरक्षा: राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला
राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है. आर्थिक मजबूती सिर्फ विकास का आधार नहीं बल्कि सुरक्षा की नींव भी है. मजबूत अर्थव्यवस्था ही आधुनिक सैन्य क्षमताओं में निवेश और संकट में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में सक्षम बनाती है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत 7.8 प्रतिशत विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है.
सप्लाई चेन मजबूत की गई, क्रिटिकल सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाई गई और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा दिया गया. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम खड़ा किया जा रहा है. प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना से कई क्षेत्रों में विनिर्माण बढ़ रहा है. आत्मनिर्भरता सिर्फ मिसाइल या बड़े जहाज तक सीमित नहीं. यह एक स्क्रू से लेकर परिष्कृत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कंपोनेंट से लेकर पूरे हथियार सिस्टम तक है.
यही दृष्टिकोण भारत को रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जा रहा है. दुनिया में कई देश ब्लॉक्स चुनने को मजबूर हैं लेकिन भारत स्वतंत्र एजेंसी और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ अपनी प्राथमिकताएं खुद तय कर रहा है. जब भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है.

नेतृत्व, संसाधन और सेनाओं का सामर्थ्य
किसी देश की सुरक्षा मुख्यतः तीन चीजों पर निर्भर करती है- राष्ट्रीय नेतृत्व की सोच, संसाधनों की उपलब्धता और सेनाओं का सामर्थ्य. भारतीय सेनाओं का सामर्थ्य और जवानों का साहस हमेशा मिसाल रहा है. 2014 से पहले कमी राजनीतिक नेतृत्व में थी जो सेनाओं को खुला हाथ दे और संसाधनों की कमी न होने दे. मुंबई हमले के समय जवान तैयार थे लेकिन सरकार सिर्फ डोजियर दिखाती रही.
अब सेनाओं को खुली छूट दी गई है- जैसा करे वैसा ही करो. सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारा गया. पर्याप्त संसाधन दिए गए जिससे सेनाएं बिना चिंता के कार्रवाई कर सकीं.
2014 के चुनौतियों से आत्मविश्वास भरे भारत तक
2014 में सुरक्षा से जुड़े कई फैसले लंबित थे, आयात पर जोर था और क्षमताओं पर विश्वास की कमी थी. आज सब बदल चुका है. भारत मिसाइल, ड्रोन, बड़े जहाज, छोटे स्क्रू और पांचवीं के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में काम कर रहा है. रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़ चुका है. 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य है जिसे हासिल किया जाएगा.
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रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम पूरी तरह बदल गया है. सोलह रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अब घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में हैं और अनुसंधान पर खर्च बढ़ा रहे हैं. पहले एक-दो प्रतिशत होता था, अब आठ-दस प्रतिशत तक पहुंच गया है. सोलह हजार से ज्यादा एमएसएमई रक्षा उत्पादन में लगे हैं.
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारे घोषित किए गए जहां 70 हजार करोड़ के प्रस्ताव आए और 10 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है. 2018 में दर्जन भर स्टार्टअप थे आज दो हजार से ज्यादा हो गए हैं. युवा नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि देने वाले बनें, इसके लिए रक्षा मंत्रालय के द्वार खुले हैं.
DRDO उद्योग, विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और वैज्ञानिकों को जोड़कर आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है. इस साल स्क्रैमजेट कमबस्टर का सफल परीक्षण हुआ जो हाइपरसोनिक मिसाइल की दिशा में बड़ा कदम है. पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक अब निजी उद्योग को हस्तांतरित की जाएगी जिससे उत्पादन तेज होगा और सेनाओं को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी.
दुश्मन की चालों का जवाब: साम, दाम, दंड, भेद
दुश्मन शाम, दाम, दंड और भेद चार तरीकों से सुरक्षा कमजोर करने की कोशिश करते रहे. कश्मीर के युवाओं को बहकाना, फंडिंग, हिंसा और फूट पैदा करना. 2014 के बाद चारों मोर्चों पर जवाब दिया गया. राह भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा, पुनर्वास और रोजगार दिए.
आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व विकास हुआ. सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर से दंड दिया. सिंधु जल समझौता निलंबित कर संदेश दिया कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. फूट डालने की कोशिशें नाकाम कीं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मंदिर, गुरुद्वारा और कॉन्वेंट को निशाना बनाने की साजिश को जनता ने विफल कर दिया. इंडियन फर्स्ट का संदेश मजबूत हुआ.
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भविष्य का युद्ध और फाइटिंग स्पिरिट
युद्ध का स्वरूप बदल रहा है. जमीन और हवा के साथ स्पेस और साइबर नए मैदान बन गए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और सटीक हथियार तेजी से बढ़ रहे हैं. सुरक्षा रणनीति को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है. भारत तकनीक आयात करने के बजाय खुद विकसित करे. भारत शांति में विश्वास करता है लेकिन शांति और कमजोरी में अंतर है.
जो शांति युद्ध से घबराए वह निंदनीय है. जो युद्ध शांति के लिए लड़ा जाए वह वंदनीय है. आतंकवाद बढ़ाने वाले देश से संवाद नहीं बल्कि सेना जवाब देगी. समृद्धि की ओर बढ़ते हुए फाइटिंग स्पिरिट कमजोर नहीं होनी चाहिए. सुरक्षा के बिना समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती.
भारत का लक्ष्य सिर्फ आत्मनिर्भर होना नहीं बल्कि ऐसा रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना है जो सुरक्षा मजबूत करे, अर्थव्यवस्था को गति दे और वैश्विक सुरक्षा ढांचे में भूमिका बढ़ाए. आजादी के सौ वर्ष पूरे होने पर भारत तकनीक, अर्थव्यवस्था और रक्षा में आत्मविश्वास के साथ दुनिया को नेतृत्व प्रदान करेगा. यह नया भारत है- स्वाभिमानी, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार.