सिंधु नदी प्रणाली- इंडस, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज, हिमालय से निकल‑कर भारत‑पाकिस्तान के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है. 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty, IWT) ने इन नदियों के जल‑विनियोजन को अंतर‑राष्ट्रीय कानून का रूप दिया. समझौते ने लगभग 65 वर्षों से दोनों परमाणु‑संपन्न पड़ोसियों के बीच “जल‑युद्ध” रोकने का काम किया है, परंतु कुछ घटनाक्रम ने इसकी स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं.
22 अप्रैल 2025 को हुए कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पहली बार IWT को स्थगित करने की घोषणा की, पाकिस्तानी राजनयिकों को तलब किया और ‘खून व पानी साथ‑साथ नहीं बह सकते’ की नीति दोहराई (Pahalgam Terror Attack).
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद जम्मू-कश्मीर में हिमालयी नदियों के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है. चिनाब नदी में पहली बार ड्रेजिंग और गाद निकालने का काम शुरू किया गया है.
भारत ने रावी नदी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान तक पहुंचने से रोकने का फैसला कर लिया है. शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होने के बाद पाकिस्तान को रावी नदी का अतिरिक्त पानी नहीं मिलेगा, जिससे वहां जल संकट गहरा सकता है.
सिंधु जल संधि को पाकिस्तान के साथ सस्पेंड करने के बाद मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा दिया है. एनएचपीसी ने सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है, जिससे भारत की ऊर्जा क्षमता को बड़ा बल मिलेगा.
भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थ निकाय को अवैध बताते हुए उसके सभी आदेशों और फैसलों को शून्य करार दिया.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान के 'न्यू नॉर्मल' और आतंकवाद के एजेंडे की धज्जियां उड़ा दी हैं. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की करारी हार और सिंधु जल संधि के निलंबन को लेकर भारत का सख्त रुख साफ कर दिया है.
ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स (CVPP) के तहत निर्माणाधीन पाकल दुल (1,000 मेगावाट), किरु (624 मेगावाट) और क्वार (540 मेगावाट) का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति मजबूत होगी और जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी.
चेनाब नदी पर भारत की दुलहस्ती पनबिजली परियोजना चरण-2 को लेकर पाकिस्तान अब गिड़गिड़ाने लगा है. पाकिस्तान अब सिंधु जल समझौते की दुहाई देते हुए सख्त प्रावधानों का राग अलापने लगा है.
भारत ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चेनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-II जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है, जो सिंधु जल समझौते के निलंबन के बीच आया है. पाकिस्तान ने इस कदम को पानी का हथियारीकरण बताते हुए कड़ा विरोध किया है. पाकिस्तान की पीपुल्स पार्टी की नेता शेरी रहमान ने इसे समझौते का उल्लंघन बताया और कहा कि यह द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ाएगा.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि पर भारत के कदमों की कड़ी निंदा की. उन्होंने चिनाब नदी में पानी का रुख मोड़ने को युद्ध का कृत्य (Act of War) बताया. भारत द्वारा संधि निलंबित करने और डेटा साझा न करने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना. पाकिस्तान ने जल अधिकारों पर कोई समझौता न करने की चेतावनी दी.
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत पर सिंधु जल संधि के एकतरफा निलंबन का आरोप लगाया है और समझौता बहाली की अपील की है. अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद भारत ने यह संधि निलंबित की थी. यह विवाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव गहरा कर रहा है.
इकोलॉजिकल थ्रेट रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान, जो सिंधु नदी बेसिन के पानी पर 80% निर्भर है, गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जिससे पानी के प्रवाह में बदलाव संभव हो गया है. पाकिस्तान के पास केवल 30 दिनों का पानी स्टोर करने की क्षमता है, जिससे मौसमी पानी की कमी का खतरा बढ़ गया है.
मोदी सरकार ने सिंधु नदी के पानी को लेकर एक नया मास्टर प्लान तैयार किया है. इस योजना के तहत सिंधु नदी का पानी भारत की ओर मोड़ने का ब्लूप्रिंट तैयार हो गया है. पाकिस्तान को जिसका डर था, अब वही होने जा रहा है. पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किया गया था. इस योजना से पाकिस्तान में पानी की कमी का संकट गहराएगा.
2029 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने सिंधु नदी के पानी को उत्तर भारत के कई राज्यों तक पहुंचाने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. शुक्रवार को वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समीक्षा की गई, जिसमें ब्यास और सिंधु नदी को जोड़ने के लिए बनाई जाने वाली 14 किलोमीटर लंबी सुरंग पर चर्चा हुई.
भारत ने अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था, जिस पर पाकिस्तान ने विरोध जताया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने कहा कि असली सहयोग भरोसे पर टिका होता है, आतंक पर नहीं.
पाकिस्तान ने कहा कि भारत ने हालिया बाढ़ को लेकर कूटनीतिक चैनल के जरिए जानकारी साझा की है, लेकिन यह पहले जितनी विस्तृत नहीं थी. पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि का पूर्ण पालन करने की अपील की. साथ ही, पाकिस्तान ने BRICS सदस्यता को लेकर गंभीरता जताई और बताया कि रूस उसका समर्थन कर रहा है.
भारी बारिश और भारत की तरफ से छोड़े गए पानी ने पाकिस्तान में तबाही मचा दी है. अब तक 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों घर, सड़कें और मवेशी तबाह हो गए हैं. खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. आर्थिक संकट और महंगाई झेल रहा पाकिस्तान अब क्लाइमेट चेंज और बाढ़ की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है.
India ने बाढ़ को लेकर Pakistan को किया अलर्ट, Operation Sindoor के बाद पहली बार हुई बात
भारत ने जम्मू-कश्मीर में तवी नदी में बाढ़ को लेकर पाकिस्तान को अलर्ट किया है. यह जानकारी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से साझा की गई. विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह कदम पूरी तरह मानवीय आधार पर उठाया गया है.
भारत ने पाकिस्तान में रावी नदी में आने वाली बाढ़ के बारे में सचेत किया है. यह जानकारी भारतीय उच्चायोग के माध्यम से इस्लामाबाद को सौंपी गई. भारत ने यह सूचना लोगों की जान बचाने और निचले इलाकों में रहने वालों को समय पर सतर्क करने के लिए दी. इस संदेश के बाद पाकिस्तान ने रावी नदी के निचले इलाकों में शामिल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बुलाया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत खून और पानी एक साथ नहीं बहने देगा. उन्होंने सिंधु जल समझौते को पंडित जवाहरलाल नेहरू की एक बड़ी भूल बताया. यह समझौता 19 सितंबर 1960 को कराची में पंडित नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच हुआ था. पंडित नेहरू ने इस समझौते के बारे में संसद को कोई जानकारी नहीं दी थी और सिंधु, झेलम तथा चिनाब नदी के पानी का बंटवारा बिना संसद की सहमति के कर दिया था.
पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दो टूक चेताते हुए कहा कि भारत अब न तो सिंधु जल समझौते के मौजूदा स्वरूप को स्वीकार करेगा और न ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की परमाणु धमकियों को बर्दाश्त करेगा.