सिंधु नदी प्रणाली- इंडस, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज, हिमालय से निकल‑कर भारत‑पाकिस्तान के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है. 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty, IWT) ने इन नदियों के जल‑विनियोजन को अंतर‑राष्ट्रीय कानून का रूप दिया. समझौते ने लगभग 65 वर्षों से दोनों परमाणु‑संपन्न पड़ोसियों के बीच “जल‑युद्ध” रोकने का काम किया है, परंतु कुछ घटनाक्रम ने इसकी स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं.
22 अप्रैल 2025 को हुए कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पहली बार IWT को स्थगित करने की घोषणा की, पाकिस्तानी राजनयिकों को तलब किया और ‘खून व पानी साथ‑साथ नहीं बह सकते’ की नीति दोहराई (Pahalgam Terror Attack).
बात 1948 की है. पूर्वी पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी. इस सरकार ने पाकिस्तान की नहरों में जाने वाले पानी को रोक दिया था. लगभग एक महीने तक ऐसी स्थिति रही. पाकिस्तान के नहर सूख गए जनता हाहाकार कर उठी, जिन्ना बात करने के लिए मजबूर हो गए. लेकिन तत्कालीन पीएम नेहरू की राय अलग थी.
पाकिस्तानी सेना ने 276वें कोर कमांडर्स सम्मेलन के बाद बयान जारी किया है. इसमें कश्मीर मुद्दे का भी जिक्र है. आसिम मुनीर की अगुवाई में हुए इस सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के 24 अप्रैल 2025 वाले निर्देश की भी पुष्टि की गई.
पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के न पालन होने का सारा दोष भारत पर मढ़ता है लेकिन आतंकवाद पर चुप्पी साध लेता है. दुनिया के कई ताकतवर देशों ने ऐसे समझौतों को खत्म कर दिया जो उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं थे. चीन, रूस और अमेरिका इसके उदाहरण हैं.
चिनाब नदी पर बने बगलिहार, सलाल और दुल्हस्ती जैसे हाइड्रो प्रोजेक्ट भारत के सबसे बड़े रणनीतिक हथियार बनकर उभरे हैं. आखिर ये तीनों परियोजनाएं पाकिस्तान की कृषि, अर्थव्यवस्था और कथित वॉटर सिक्योरिटी पर कितना असर डाल सकती हैं? पूरी कहानी समझिए.
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत को लेकर तीखा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी को रोकने की कोशिश हुई तो इसे देश के अस्तित्व पर हमला माना जाएगा और यह परमाणु प्रतिक्रिया जैसी स्थिति पैदा कर सकता है.
पाकिस्तान के मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी ने भी पाकिस्तान के हिस्से का पानी समझौते के तहत छिना, तो इस्लामाबाद उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा. यह बयान इस्लामाबाद की पुझरती हुई जल नीति की ओर इशारा करता है. पानी के महत्व को ध्यान में रखते हुए यह साफ किया गया है कि सिंधु जल अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पाकिस्तान टू-फ्रंट वॉर में फंसता दिख रहा है. एक तरफ भारत के साथ सिंधु जल संधि पर तनाव बढ़ रहा है. दूसरी तरफ अफगानिस्तान से टीटीपी हमलों की मार झेल रहा है.
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है. भारत की तरफ से संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार दुनिया से गुहार लगा रहा है. अब इस्लामाबाद में इस मामले पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें पाकिस्तानी मंत्रियों और सांसदों ने भारत को धमकी देने की कोशिश की.
मुसादिक मलिक ने साफ किया कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से के पानी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. भारत को पाकिस्तान के लिए निर्धारित जल प्रवाह को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
सिंधु जल संधि पर विवाद के बीच पाकिस्तान लगातार भारत पर "पानी रोकने" का आरोप लगा रहा है. रक्षा मंत्री से लेकर सेना प्रमुख तक युद्ध की भाषा बोल रहे हैं. लेकिन क्या वाकई में भारत ने पाकिस्तान का पानी रोक दिया है या फिर यह दुनिया के सामने खुद को विक्टिम दिखाने की एक बड़ी साजिश है? समझिए पाकिस्तान का पूरा नैरेटिव वॉर.
'कूटनीति' में 'सिंधु जल समझौता' (Indus Waters Treaty) पर बात की गई. आज इस समझौते के सामने इतिहास का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है. पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को स्थगित करने यानी इस पर फिलहाल रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है. इसके बाद से दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है. यह लड़ाई किसी ज़मीन या व्यापार के लिए नहीं है, बल्कि पानी के लिए है. और इसी के साथ एक बड़ा सवाल उठ रहा है-क्या दक्षिण एशिया अब एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां पानी कूटनीति का नया हथियार बनने वाला है?
पाकिस्तान सिंधु घाटी सभ्यता पर अपना दावा नई ताकत से कर रहा है. यह उस देश के लिए एक अहम शिफ्ट है जो 712 ईसवी में बिन कासिम द्वारा सिंध की विजय को अपनी नींव का क्षण मानता था. पाकिस्तान को अचानक हड़प्पा और मोहन जोदड़ो से इतना लगाव क्यों हो गया है?
सिंधु जल संधि विवाद के बीच पाकिस्तान सिंधु घाटी सभ्यता, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की विरासत पर नया जोर दे रहा है. जानिए पानी के विवाद, ऐतिहासिक दावों और पाकिस्तान के बदलते नैरेटिव के पीछे की कहानी. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिंधु जल का मुद्दा मौजूदा संधियों, जल उपलब्धता और दोनों देशों की जरूरतों से जुड़ा विषय है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की युद्ध संबंधी चेतावनी पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों और पीओके में मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने के लिए भड़काऊ बयान दे रहा है.
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने यूएन सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वो भारत पर सिंधु जल समझौते के कथित उल्लंघन को लेकर ध्यान दे. ये समझौता 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था, जो अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सस्पेंड कर दिया गया था. इस हमले में 26 आम नागरिक मारे गए थे.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा कि सिंधु नदी न केवल उनके देश के लिए पानी का एकमात्र प्रमुख स्रोत है, बल्कि यहां के लोगों के संपूर्ण इतिहास से भी गहराई से जुड़ी हुई है.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत ने चिनाब नदी में संभावित बाढ़ को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है. प्रशासन का दावा है कि भारत ने जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल डैम के स्पिलवे गेट खोले हैं, जिससे पानी का स्तर बढ़ सकता है. सियालकोट और मराला बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है और इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं.
भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को फिर खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस अवैध रूप से गठित अदालत को कभी मान्यता नहीं देता और इसके सभी फैसले शून्य है.
पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी ने सिंधु जल संधि और कश्मीर को लेकर एक भड़काऊ बयान दिया है. उन्होंने दावा किया कि कश्मीर विवाद सुलझने के बाद सिंधु नदी तंत्र की सभी छह नदियां पाकिस्तान के नियंत्रण में होंगी.
पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था. अब इस फैसले को एक साल पूरा हो चुका है. इस दौरान भारत ने सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर सख्ती नहीं दिखाई, बल्कि अपने हिस्से के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए बड़े स्तर पर काम भी शुरू किया.
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद जम्मू-कश्मीर में हिमालयी नदियों के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है. चिनाब नदी में पहली बार ड्रेजिंग और गाद निकालने का काम शुरू किया गया है.