अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. यह करीब 88 घंटे का सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों के साथ-साथ पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
हाल ही में एक पॉडकास्ट में पश्चिमी वायु कमान के तत्कालीन प्रमुख एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) ने इस अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) को पहुंचाए गए नुकसान को विस्तार से बताया. उन्होंने दावा किया कि भारतीय सेनाओं को सैन्य कार्रवाई में कोई प्रतिबंध नहीं था. भारत पाकिस्तान के अंदर कहीं भी हमला कर सकता था जबकि पाकिस्तान कुछ नहीं कर पाया.
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ये खुलासे अभियान के करीब डेढ़ साल बाद आए हैं. हालांकि पाकिस्तान इन दावों से इनकार करता रहा है. दोनों पक्षों के बीच नुकसान के आंकड़ों को लेकर मतभेद जारी हैं. एयर मार्शल मिश्रा ने पॉडकास्ट में बताया कि भारतीय वायुसेना ने हवा में 5 लड़ाकू विमान और एक एईडब्ल्यूएंडसी (एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल) विमान को मार गिराया. इसके अलावा एक सी-130 या आईएल-78 जैसे ट्रांसपोर्ट विमान को भी नुकसान पहुंचाया गया.
भोलारी हैंगर में एक और एईडब्ल्यूएंडसी को नष्ट किया गया. कई एफ-16 विमानों को भी निशाना बनाया गया. जमीनी ठिकानों पर छह रडार सिस्टम और एक एलवाई-80 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को नष्ट किया गया. ये आंकड़े पहले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों से मेल खाते हैं जिनमें चार से पांच एफ-16 या जेएफ-17 श्रेणी के विमान, एक बड़े निगरानी विमान और हैंगरों तथा रनवे को नुकसान पहुंचाने का जिक्र था.
सैटेलाइट इमेजरी और खुफिया रिपोर्टों के आधार पर भारतीय पक्ष ने इन दावों को मजबूत बताया है. एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे नुकसान पाकिस्तानी वायुसेना की निगरानी और कमांड क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं क्योंकि एईडब्ल्यूएंडसी विमान युद्धक्षेत्र की पूरी तस्वीर देते हैं और रडार सिस्टम रक्षा की आंखें होते हैं.
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सेनाओं की फ्रीडम और रणनीतिक स्वतंत्रता का महत्व
एयर मार्शल मिश्रा का सबसे महत्वपूर्ण बयान यह था कि सैन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिबंध नहीं था. उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान में कहीं भी हमला कर सकता था. पाकिस्तान इसके खिलाफ कुछ नहीं कर सका. यह बयान ऑपरेशन की प्रकृति को स्पष्ट करता है.
पहलगाम हमले के तुरंत बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व को लक्ष्य चयन और हमले के तरीके तय करने की पूरी आजादी दी गई थी. जब पाकिस्तान ने ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की बौछार की तो भारतीय पक्ष ने सबक सिखाने का फैसला किया. उन्होंने रडार और भूमिगत कमांड-कंट्रोल नोड्स पर हमला किया ताकि यह साबित हो सके कि भारत चिट्ठी लिखकर नहीं बल्कि मिसाइल गिराकर जवाब देता है.
यह रणनीति पाकिस्तान की हवाई रक्षा को अंधा और सुन्न करने वाली साबित हुई. S400 डिफेंस सिस्टम से 314 किलोमीटर दूर लक्ष्य को मार गिराने का जिक्र भी किया गया जो सतह से हवा में मार करने का अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्डेड किल माना जाता है.
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स्लीपर सेल्स, महिला पायलट और अन्य खुलासे
एयर मार्शल ने बताया कि पाकिस्तान ने भारत के S400 डिफेंस सिस्टम की लोकेशन पता लगाने के लिए स्लीपर सेल्स को एक्टिव किया था. यह खुलासा दर्शाता है कि पाकिस्तान भारतीय एयर डिफेंस को निष्क्रिय करने की कोशिश में लगा था लेकिन सफल नहीं हो सका. उन्होंने यह भी बताया कि एक से अधिक महिला पायलटों ने कई मिशन उड़ाए.
महिला पायलटों का आतंकी ठिकानों और सैन्य लक्ष्यों पर मिशन उड़ाना न सिर्फ पेशेवर क्षमता का प्रमाण है बल्कि सामाजिक संदेश भी देता है. अभियान के दौरान ब्राह्मोस जैसी स्वदेशी मिसाइलों और ड्रोन युद्ध की भूमिका पर भी चर्चा हुई. भारतीय पक्ष ने ड्रोन हमलों का मुकाबला करते हुए दुश्मन के रडार और कंट्रोल नोड्स को निशाना बनाया जिससे पाकिस्तान की प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर पड़ी.
ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था जिसमें नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया. इसके बाद तनाव बढ़ने पर हवाई ठिकानों पर भी हमले हुए. भारतीय वायुसेना ने दावा किया कि 11 एयरफील्ड्स पर हमला किया गया और कुल 13 पाकिस्तानी विमान हवा या जमीन पर नष्ट हुए.
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पाकिस्तान ने इन दावों से इनकार किया और खुद भारतीय विमानों के नुकसान का दावा किया. कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दोनों पक्षों के नुकसान की संभावना जताई गई है हालांकि स्वतंत्र सत्यापन सीमित रहा.
एयर मार्शल मिश्रा के बयान भारतीय आधिकारिक रुख को दोहराते हैं कि भारतीय पक्ष ने हवाई श्रेष्ठता हासिल की और पाकिस्तान को संघर्ष विराम की ओर धकेला. उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य मानसिकता पर भी टिप्पणी की और कहा कि भारतीय पायलटों का मानसिक मेकअप मजबूत था.
रणनीतिक सबक और भविष्य की तैयारी
यह अभियान सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है जिसमें ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें, नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अहम भूमिका निभाते हैं. भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी कमान के नेतृत्व में समन्वय स्थापित कर सटीक हमले किए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदमपुर एयरबेस दौरा भी अभियान के दौरान हुआ था जो मनोबल बढ़ाने वाला साबित हुआ. एयर मार्शल मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया. विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे अभियान भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का मॉडल बन सकते हैं लेकिन परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी के साथ तनाव नियंत्रण रखना भी जरूरी है.
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के खुलासे ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय वायुसेना की सफलता के रूप में पेश करते हैं. पांच फाइटर्स, एईडब्ल्यूएंडसी विमान, रडार और अन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के दावे भारतीय हवाई श्रेष्ठता को रेखांकित करते हैं. सैन्य स्वतंत्रता, महिला पायलटों की भागीदारी और सटीक हमलों की रणनीति भविष्य के लिए सबक हैं.
हालांकि युद्ध के दावे अक्सर विवादित होते हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने बयान पेश करते हैं. वास्तविकता यह है कि इस अभियान ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित किया. भारत की जवाबी क्षमता को दुनिया के सामने रखा.