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नेपाल से पहले सैलाब ने ऊपर ऐसे मचाई थी तबाही, तिब्बत का ये वीडियो नहीं देखा होगा!

नेपाल से पहले मडस्लाइड और फ्लैश फ्लड ने तिब्बत में भयानक तबाही मचाई. वहां से उफनती हुई नदी जंगल, पहाड़, पुल, बांध और इमारतों को ध्वस्त करती आगे बढ़ी और नेपाल में तबाही का मंजर ला दिया.

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तिब्बत में आई भीषण मडस्लाइड और फ्लैश फ्लड ने नेपाल में मचाई तबाही (Photo - X/@@XueJia24682)
तिब्बत में आई भीषण मडस्लाइड और फ्लैश फ्लड ने नेपाल में मचाई तबाही (Photo - X/@@XueJia24682)

नेपाल फ्लैश फ्लड की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. वहां आई तबाही का मंजर दिल दहलाने वाला है. लेकिन, ऊपर यानी तिब्बत के साइड हालात कैसे थे और अब वहां क्या हो रहा है? उधर की तस्वीरें ज्यादा सामने नहीं आई हैं. चलिए देखते हैं नेपाल की सीमा से पार तिब्बत में क्या हालात हैं?

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में हुई लैंडस्लाइडिंग और अचानक आई बाढ़ की वजह से नेपाल में भारी तबाही मच गई. लैंड स्लाइड के बाद पहाड़ी नदियों में सुनामी सा वेग उठा और ये अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा भी बहाकर नीचे नेपाल की तरफ काफी तेज गति से चल पड़ी.

 

नेपाल से पहले तिब्बत में फ्लैश फ्लड और मडस्लाइडिंग ने भारी तबाही मचाई.  पहाड़ों से नीचे गिरने वाले इस मडस्लाइडिंग से धूल और पानी के फवारे का ऐसा गुबार उठा, जिसकी जद में जो कुछ भी आया तबाह होता चला गया. सबसे पहले तिब्बत और नेपाल बॉर्डर पर बने इमीग्रेशन बिल्डिंग को इसने ध्वस्त कर दिया. 

तिब्बत की तरफ के जो वीडियो सामने आए हैं. उसमें नदी का प्रचंड वेग देखकर कोई भी डर जाए. वीडियो नदी पूरी तरह से लकड़ी, कीचड़ और मलबों से भरी दिखाई दे रही है. इसी उफनते सैलाब ने इमीग्रेशन बिल्डिंग को हिट किया और फिर बाढ़ और भी प्रचंड रूप दिखाते हुए आगे नेपाल की तरफ बढ़ गई. 

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तिब्बत की तरफ भी राहत बचाव शुरू हो चुका है. तिब्बत में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है और 265 लोग लापता हैं.नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस इलाके में 484 पर्यटक लापता हैं. इनमें कम से कम 26 देशों के 391 विदेशी नागरिक शामिल हैं. इनमें 142 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल हैं.

यह भी पढ़ें: नेपाल फ्लैश फ्लड में जो जगह सबसे ज्यादा वायरल हुई... वहां ऐसे थे हालात

तिब्बत में फायर फाइटिंग और रेस्क्यू टीम के 600 मेंबर तैनात किए गए हैं. इसके साथ ही इंजीनियरों की भी भारी- भरकम टीम वहां मौजूद है. वहां भी राहत बचाव का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. 

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