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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को भारत आने में कितने दिन लगते हैं... कौन बचाएगा इन्हें ड्रोन-मिसाइलों से?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरात (कांडला) तक 1000 किमी और मुंबई तक 1550 किमी दूरी है. तेल टैंकर 24-31 km/hr की गति से चलते हैं, इसलिए कांडला पहुंचने में 37 घंटे और मुंबई में 53 घंटे लगते हैं. स्ट्रेट का ट्रैफिक ईरान-ओमान और IMO कंट्रोल करते हैं. भारतीय नौसेना एस्कॉर्ट देगी. ओमान रूट से जहाज मिसाइल-ड्रोन हमलों से बचकर सुरक्षित भारत आएंगे.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल के जहाजों और टैंकरों को ईरानी नौसेना सुरक्षा मुहैया कराती है. (Photo: Getty)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल के जहाजों और टैंकरों को ईरानी नौसेना सुरक्षा मुहैया कराती है. (Photo: Getty)

भारत के लिए तेल और गैस का बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी (पर्सियन गल्फ) से आता है. यह सब जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्री रास्ते से गुजरते हैं. अगर कोई तेल टैंकर या भारतीय जहाज इस स्ट्रेट से गुजरकर गुजरात के कांडला बंदरगाह या मुंबई पहुंचना चाहे तो कितना समय लगेगा? दूरी कितनी है? और सबसे जरूरी – मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच ये जहाज सुरक्षित कैसे आएंगे? 

दूरी कितनी है और कितना समय लगेगा?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर निकलने के बाद गुजरात के कांडला बंदरगाह तक लगभग लगभग 1000 किलोमीटर की दूरी है. मुंबई तक यह दूरी करीब 1450-1560 किलोमीटर तक है. तेल टैंकर आमतौर पर  24-31 km/hr की रफ्तार से चलते हैं.

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Strait of Hormuz India oil tanker route  

औसत गति 27.78 किलोमीटर प्रति घंटा मानें तो कांडला पहुंचने में लगभग 37 घंटे यानी डेढ़ दिन लगेंगे. मुंबई पहुंचने में करीब 53 घंटे यानी दो दिन से थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. असल में मौसम, लोड और रूट के हिसाब से यह समय 2 से 3 दिन तक हो सकता है. ये जहाज बहुत भारी होते हैं इसलिए तेज नहीं चलते, लेकिन लगातार चलते रहते हैं. 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का ट्रैफिक कौन कंट्रोल करता है?

यह स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच है. इसका सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 21-33 किलोमीटर चौड़ा है. ट्रैफिक को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) और IMO (International Maritime Organization) के ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम के तहत नियंत्रित किया जाता है. लेकिन असल में ईरान की नौसेना और IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) इस इलाके पर मजबूत पकड़ रखती हैं.

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Strait of Hormuz India oil tanker route

ओमान दक्षिणी हिस्से को देखता है. अमेरिका की Fifth Fleet भी यहां सुरक्षा के लिए तैनात रहती है. सामान्य दिनों में हर दिन 80-130 जहाज गुजरते हैं, लेकिन तनाव के समय ईरान इसे ब्लॉक कर सकता है. 

भारतीय जहाजों को सुरक्षित कौन ले आएगा?

भारत सरकार और भारतीय नौसेना इस समय बहुत सतर्क है. 28 से 36 भारतीय झंडे वाले जहाज (जिनमें तेल और एलएनजी टैंकर शामिल) अभी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. सरकार ने कहा है कि भारतीय नौसेना युद्धपोत भेजकर इन जहाजों को एस्कॉर्ट दे सकती है. 

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पहले भी ऑपरेशन संकल्प के तहत नौसेना ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा की थी. अब भी उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है कि नौसेना के जहाज टैंकरों के साथ चलेंगे. उन्हें स्ट्रेट से बाहर निकालेंगे. 778 भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहा है. 

Strait of Hormuz India oil tanker route

मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचते हुए भारत कैसे पहुंचेंगे?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से है. ईरान ने चेतावनी दी है कि दुश्मन देशों के जहाज पर हमला होगा. बचने के मुख्य तरीके ये हैं... 

  • नौसेना का एस्कॉर्ट: भारतीय नौसेना या अमेरिकी युद्धपोत आगे-पीछे चलेंगे, ड्रोन और मिसाइल को मार गिराएंगे.
  • ओमान की तरफ रूट: जहाज जितना हो सके ओमान के पानी में रहकर चलेंगे जहां ईरानी खतरा कम है.
  • न्यूट्रल सिग्नल: कुछ जहाज अपना मालिक देश (जैसे चीन या तुर्की) दिखाकर गुजर गए. लेकिन भारतीय जहाजों के लिए नौसेना एस्कॉर्ट सबसे सुरक्षित है.
  • तेज निगरानी: रडार और हवाई कवर से हमलों का पता लगाकर जवाब दिया जाता है.

Strait of Hormuz India oil tanker route

अभी ट्रैफिक 97% कम हो गया है, लेकिन भारतीय जहाजों को निकालने के लिए नौसेना तैयार है. अगर ईरान हमला करे तो भी एस्कॉर्ट वाली टीम जवाब भी दे सकती है.

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा का रास्ता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए जीवन रेखा है. यहां से तेल न आया तो पेट्रोल की कीमतें बढ़ेंगी. अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. सरकार, नौसेना और शिपिंग कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं. आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं – जहाजों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम हो रहे हैं. अगर स्थिति और बिगड़ी तो वैकल्पिक रूट जैसे चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है. लेकिन फिलहाल नौसेना का एस्कॉर्ट सबसे बड़ा भरोसा है.

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