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ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय मिसाइल नहीं रोक पाया था PAK, अगर ईरान ने दागे ड्रोन तो क्या होगा हाल?

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान भारतीय ब्रह्मोस जैसी हाई-स्पीड मिसाइल नहीं रोक पाया, जिससे उसके एयरबेस को भारी नुकसान हुआ. अगर ईरान शाहेद-136 जैसे सस्ते, कम स्पीड वाले हजारों ड्रोन दागे तो पाकिस्तान की HQ-9, LY-80 डिफेंस ओवरलोड हो सकती है. ईरान की संख्या और सस्ते ड्रोन से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा, भले ही पाकिस्तान मिलिट्री में थोड़ा मजबूत हो.

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ईरान के पास हजारों की संख्या में शाहेद ड्रोन हैं, जिससे वो पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम को बर्बाद कर सकता है. (Photo: ITG)
ईरान के पास हजारों की संख्या में शाहेद ड्रोन हैं, जिससे वो पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम को बर्बाद कर सकता है. (Photo: ITG)

ऑपरेशन सिंदूर 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ एक छोटा लेकिन तेज संघर्ष था, जिसमें भारत ने ब्रह्मोस, स्कैल्प और क्रिस्टल मेज जैसे क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस पर सटीक हमले किए. पाकिस्तान की एयर डिफेंस सिस्टम जैसे HQ-9, LY-80 और FM-90 इन हाई-स्पीड मिसाइलों को रोक नहीं पाईं. पाकिस्तान की एयर डिफेंस को बायपास कर दिया गया.

11 एयरबेस पर हमले सफल रहे. अब सवाल है कि अगर ईरान अपने ड्रोन (जैसे शाहेद-136) पाकिस्तान पर दागे तो स्थिति क्या होगी? ईरान के ड्रोन सस्ते, कम स्पीड वाले लेकिन संख्या में ज्यादा होते हैं, जो पाकिस्तान की डिफेंस को ओवरलोड कर सकते हैं. दोनों देशों की मिलिट्री ताकत, हथियारों की स्पेसिफिकेशन और तुलना से समझते हैं कि क्या होगा.

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Iran attacks Pakistan

दोनों देशों की मिलिट्री ताकत की तुलना 

2026 के ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में पाकिस्तान 14वें स्थान पर है, जबकि ईरान 16वें स्थान पर. पाकिस्तान की कुल मिलिट्री ताकत थोड़ी ज्यादा मानी जाती है क्योंकि उसके पास ज्यादा सक्रिय सैनिक (लगभग 6.5 लाख), बेहतर एयर फोर्स (JF-17 फाइटर जेट्स) और न्यूक्लियर कैपेबिलिटी है. 

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ईरान के पास ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हैं लेकिन एयर फोर्स पुरानी है. ईरान की स्ट्रेंथ असिमेट्रिक वॉरफेयर में है – ड्रोन और मिसाइल से सस्ते हमले. पाकिस्तान की ताकत कन्वेंशनल फोर्स और एयर डिफेंस में ज्यादा है. कुल मिलाकर पाकिस्तान ज्यादा पावरफुल माना जाता है लेकिन ईरान की ड्रोन और मिसाइल संख्या से लंबे समय तक दबाव डाल सकता है.

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ईरान के मुख्य हथियार: ड्रोन और मिसाइल स्पेसिफिकेशन

ईरान दुनिया में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल का बड़ा उत्पादक है. मुख्य ड्रोन शाहेद-136 है – लंबाई 3.5 मीटर, विंगस्पैन 2.5 मीटर, स्पीड 185 किमी/घंटा, रेंज 1000 से 2500 किमी, वॉरहेड 50-90 किलोग्राम, कीमत सिर्फ 20,000-50,000 डॉलर. 

यह कम स्पीड वाला है लेकिन सस्ता और बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है. ईरान हजारों ड्रोन लॉन्च कर सकता है. बैलिस्टिक मिसाइल में शाहब-3 (1300-2000 किमी), खोर्रमशहर-4 (2000 किमी), सेज्जिल (2000 किमी), फतह-1 (हाइपरसोनिक क्लेम) शामिल हैं. ईरान की रणनीति संख्या से ओवरव्हेल्म करना है.

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पाकिस्तान के मुख्य हथियार: एयर डिफेंस और अन्य स्पेसिफिकेशन

पाकिस्तान की एयर डिफेंस चाइनीज सिस्टम पर आधारित है – लेयर्ड डिफेंस (CLIAD). लॉन्ग रेंज HQ-9/P या HQ-9BE (रेंज 125-300 किमी, 8-10 टारगेट एक साथ एंगेज, एयरक्राफ्ट और क्रूज मिसाइल इंटरसेप्ट). मीडियम रेंज LY-80 (HQ-16A, रेंज 40-70 किमी, स्पीड Mach 2.5 तक). 

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Iran attacks Pakistan

शॉर्ट रेंज FM-90 (रेंज 15 किमी, ड्रोन और हेलीकॉप्टर के खिलाफ). पाकिस्तान के पास JF-17 फाइटर जेट्स, F-16, मिसाइल जैसे फतह-1/2 (शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक), अब्दाली, गौरी, शाहीन सीरीज हैं. ड्रोन में शाहपर-II/III (MALE, रेकॉन और अटैक) और नए लॉयटरिंग मुनिशन जैसे यालघार-200 (200 किमी रेंज) हैं. एयर डिफेंस सिस्टम हाई-स्पीड मिसाइल रोक सकती हैं लेकिन कम स्पीड, सस्ते ड्रोन की बड़ी संख्या से परेशान हो सकती हैं.

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ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ था?

ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने ब्रह्मोस (सुपरसोनिक क्रूज, स्पीड Mach 3, रेंज 290-800 किमी), स्कैल्प (रेंज 300+ किमी) और अन्य मिसाइलों से पाकिस्तान के 11 एयरबेस और आतंकी कैंपों पर हमला किया. पाकिस्तान की HQ-9 और LY-80 सिस्टम इन हाई-स्पीड, लो-फ्लाइंग मिसाइलों को नहीं रोक पाईं. 

कई मिसाइलें सफल रहीं. पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ. पाकिस्तान ने जवाब में फतह-2 जैसी मिसाइल दागीं लेकिन भारत की S-400 और आकाश ने उन्हें इंटरसेप्ट कर लिया. यह दिखाता है कि पाकिस्तान की डिफेंस हाई-टेक मिसाइलों के खिलाफ कमजोर है.

अगर ईरान ड्रोन दागे तो पाकिस्तान पर क्या असर होगा?

ईरान के शाहेद-136 ड्रोन पाकिस्तान तक पहुंच सकते हैं क्योंकि रेंज 2000+ किमी है. ईरान-पाकिस्तान बॉर्डर से कराची या इस्लामाबाद तक 1000-1500 किमी है. लेकिन पाकिस्तान की HQ-9 और LY-80 सिस्टम ड्रोन इंटरसेप्ट कर सकती हैं क्योंकि ड्रोन कम स्पीड और आसानी से डिटेक्ट होते हैं. 

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समस्या संख्या में है – ईरान सैकड़ों-हजारों ड्रोन एक साथ लॉन्च कर सकता है, जो पाकिस्तान की डिफेंस को ओवरलोड कर देगा (जैसे यूक्रेन में रूस के खिलाफ हुआ). पाकिस्तान की FM-90 शॉर्ट रेंज ड्रोन रोक सकती है लेकिन लंबे समय तक नहीं टिकेगी. ईरान के ड्रोन सस्ते हैं, इंटरसेप्ट महंगे हैं. 

पाकिस्तान ज्यादा पावरफुल है लेकिन ड्रोन स्वार्म से आर्थिक और मिलिट्री दबाव झेल सकता है. कुल मिलाकर पाकिस्तान डिफेंस कर सकता है लेकिन बड़ा नुकसान हो सकता है अगर ईरान संख्या बढ़ाए तो. 

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