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संभल में 100 करोड़ का स्कैम: 60 साल पुराना फर्जीवाड़ा उजागर, सरकार ने वापस ली 38 बीघा जमीन

संभल जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भू-माफियाओं के चंगुल से 101 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को मुक्त करा लिया है. 60 साल पहले नगर पालिका के फर्जी पट्टे के जरिए इस बेशकीमती जमीन को निजी हाथों में सौंपने का यह खेल खेला गया था.

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संभल में सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराई गई (Photo- ITG)
संभल में सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराई गई (Photo- ITG)

यूपी के संभल में जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. मुरादाबाद स्टेट हाईवे पर तख्त गोसाईं में स्थित 101 करोड़ रुपये कीमत की 38 बीघा सरकारी जमीन को भू-माफियाओं से मुक्त करा लिया गया है. इस जमीन को अब राज्य सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया है. डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने खुद राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचकर पैमाइश कराई और जमीन पर ग्राम सभा का बोर्ड लगवाया. 

आपको बता दें कि यह कार्रवाई हाल ही में डीडीसी कोर्ट द्वारा निजी भू-स्वामियों को अवैध कब्जेदार घोषित करने के बाद की गई. दरअसल, साल 1967 में नगर पालिका ने बिना किसी अधिकार के फर्जी पट्टा जारी कर इस नवीन परती की भूमि को निजी लोगों के नाम कर दिया था. 

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. बताया गया कि साल 1954 में यह जमीन संभल नगर पालिका को केवल प्रबंधन के लिए सौंपी गई थी. इसके 13 साल बाद यानी 1967 में नगर पालिका ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी तरीके से इसका पट्टा निजी लोगों को आवंटित कर दिया, जबकि उस समय यह क्षेत्र नगर पालिका में आता ही नहीं था. इसके बाद से भू-माफिया इस बेशकीमती जमीन को अपना बताकर बेचने और व्यावसायिक इस्तेमाल करने में जुट गए थे. खुलासा होने पर एक्शन लिया गया.

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इस जमीन को लेकर लंबा कानूनी विवाद चला

1991 में तहसीलदार कोर्ट और 1992 में एडीएम कोर्ट ने इसे सरकारी माना. इसके बाद 2005 में चकबंदी अधिकारी ने भी इसे ग्राम समाज की भूमि घोषित किया. मगर 2008 में तत्कालीन डीडीसी ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर गलत तथ्यों के आधार पर इसे निजी भूमि घोषित कर दिया. हद तो तब हो गई जब 2013 में नगर पालिका के तत्कालीन ईओ ने हाईकोर्ट में पैरवी न करने की अर्जी दे दी, जिससे मामला फाइलों में दब गया.

बुलडोजर एक्शन और FIR की तैयारी

वर्तमान जिला प्रशासन ने जब 1954 से अब तक के रिकॉर्ड खंगाले, तो परत दर परत पूरा घोटाला खुल गया. डीडीसी कोर्ट में रोजाना सुनवाई कराकर जमीन को वापस सरकार के नाम कराया गया. मौके पर फिलहाल मेंथा फैक्ट्री और कुरैशी बोन मिल संचालित हो रही है, जिन्हें कब्जा हटाने का निर्देश दिया गया है. 

अब प्रशासन 1967 के दोषी अधिकारियों, साल 2008 के डीडीसी प्रेम सिंह खड़क और 2013 के तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता समेत संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने जा रहा है. 

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