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53 साल पहले वियतनाम में क्या हुआ था जिसे याद दिला रही दुनिया, कहीं ईरान में फंस तो नहीं गए ट्रंप?

ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ हॉरिजोंटल एस्केलेशन रणनीति अपनाई है, यानी युद्ध को खाड़ी देशों, तेल, जहाजरानी और अर्थव्यवस्था तक फैलाया. 53 साल पहले वियतनाम में अमेरिका ने हर लड़ाई जीती लेकिन राजनीतिक-आर्थिक दबाव से हार गया. आज ट्रंप की ईरान नीति से वही खतरा मंडरा रहा है – तेल महंगा, जनता विरोधी, सहयोगी दूरी बना रहे हैं, युद्ध लंबा खिंच सकता है.

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डोनाल्ड ट्रंप कहीं ईरान जंग में फंसते तो नहीं जा रहे हैं. क्योंकि ईरान ने वियतनाम वॉर वाली रणनीति अपना ली है. (Photo: ITG)
डोनाल्ड ट्रंप कहीं ईरान जंग में फंसते तो नहीं जा रहे हैं. क्योंकि ईरान ने वियतनाम वॉर वाली रणनीति अपना ली है. (Photo: ITG)

1973 में पेरिस पीस एकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर हुए थे, जिससे अमेरिका ने वियतनाम से अपनी सेना वापस बुला ली थी. अमेरिका ने हर लड़ाई जीती थी, लेकिन वियतनाम से युद्ध हार गया क्योंकि उसने हॉरिजोंटल एस्केलेशन रणनीति अपनाई – यानी युद्ध को एक जगह से कई इलाकों में फैलाया. पड़ोसी देशों को शामिल किया . अमेरिका को राजनीतिक, आर्थिक और जनमत के दबाव में ला दिया.

आज दुनिया इसी की याद दिला रही है क्योंकि ईरान भी अमेरिका-इजरायल के खिलाफ ऐसी ही हॉरिजोंटल वारफेयर कर रहा है. ट्रंप की ईरान पर कार्रवाई से क्या अमेरिका फिर वियतनाम जैसी फंसने वाली स्थिति में तो नहीं पहुंच गया?

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वियतनाम युद्ध में हॉरिजोंटल एस्केलेशन क्या था?

वियतनाम युद्ध में अमेरिका के पास हवाई श्रेष्ठता थी, उसने उत्तर वियतनाम की सेना और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया, लेकिन फिर भी हार गया. कारण था उत्तर वियतनाम और वियतकॉन्ग की रणनीति – उन्होंने युद्ध को हॉरिजोंटल रूप से फैलाया. यानी एक इलाके में सीधे लड़ाई के बजाय दक्षिण वियतनाम के शहरों, गांवों और पड़ोसी देशों (लाओस, कंबोडिया) में छापेमारी की.

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इससे अमेरिका को युद्ध कई मोर्चों पर लड़ना पड़ा. जनता में विरोध बढ़ा. खर्च बढ़ा और अंत में 1973 में पीस एकॉर्ड्स से सेना वापस लेनी पड़ी. दो साल बाद 1975 में साइगॉन गिर गया. वियतनाम एक हो गया. अमेरिका ने सैन्य रूप से जीत हासिल की लेकिन राजनीतिक हार मानी क्योंकि वह लंबे समय तक नहीं टिक सका.

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ईरान आज वही रणनीति क्यों अपना रहा है?

प्रोफेसर रॉबर्ट पेप के अनुसार, ईरान कमजोर होने के बावजूद अमेरिका को सीधे नहीं हरा सकता, इसलिए वह हॉरिजोंटल एस्केलेशन कर रहा है. ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से खाड़ी देशों (सऊदी, यूएई, कतर आदि) के तेल, गैस, पानी, जहाजरानी और पर्यटन पर हमले किए. यह सिर्फ बदला नहीं, बल्कि युद्ध को फैलाने की रणनीति है.

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ईरान का मकसद अमेरिका और इजरायल के सहयोगियों को दबाव में लाना है ताकि वे ट्रंप से दूरी बना लें. खाड़ी देशों में जनता में गुस्सा बढ़ रहा है. तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. महंगाई बढ़ रही है. ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से माफी मांगी लेकिन हमले जारी रखे – यह संदेश जनता के लिए था, शासकों के लिए नहीं. ईरान रूस और चीन से भी समर्थन पा रहा है, जिससे युद्ध लंबा खिंच सकता है.

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ट्रंप की ईरान नीति और वियतनाम की समानताएं

ट्रंप ने ईरान पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू की, जिसमें भारी हवाई हमले किए गए. ट्रंप कहते हैं कि युद्ध 'बहुत हद तक पूरा' हो गया है, लेकिन रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने कहा कि अब तक का सबसे तीव्र हमला होगा. ईरान ने गल्फ में बुनियादी ढांचे पर हमले किए, जिससे अमेरिका के सहयोगी देश दबाव में आ गए.

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अमेरिका में जनता युद्ध के खिलाफ है. तेल महंगा हो रहा है. गैस पंप पर लोग परेशान हैं. वियतनाम की तरह अमेरिका के पास सैन्य श्रेष्ठता है लेकिन राजनीतिक सहनशक्ति कम है. ट्रंप को अब बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना पड़ रहा है, वरना यह युद्ध लंबा खिंच सकता है.

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नेतन्याहू कह रहे हैं कि इजरायल का अभियान अभी खत्म नहीं हुआ. ईरान में रेजीम चेंज चाहिए, लेकिन ट्रंप के लिए यह घरेलू राजनीति का खतरा बन सकता है.

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ईरान युद्ध के अमेरिका पर क्या परिणाम हो सकते हैं? 

वियतनाम में अमेरिका ने 58,000 सैनिक खोए, अरबों डॉलर खर्च किए, जनता में विरोध बढ़ा और अंत में हार मानी. आज ईरान युद्ध से अमेरिका को ये खतरे हैं –  

  • आर्थिक नुकसान: तेल की कीमतें तीन अंकों में पहुंच गईं, महंगाई बढ़ी, अमेरिका ने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व छोड़ा लेकिन यह अस्थाई है.  
  • राजनीतिक दबाव: अमेरिका में बहुमत युद्ध के खिलाफ है. ट्रंप की लोकप्रियता गिर सकती है.  
  • सहयोगी दूरी: खाड़ी देश, यूरोप, तुर्की, इराक आदि ट्रंप से दूरी बना रहे हैं.  
  • लंबा युद्ध: ईरान के नए नेता मोजतबा खामेनेई ने परिवार खोया है. समझौता नहीं करेंगे. ईरान ने युद्ध को एपिक मिस्टेक कहा और कहा कि अंत वे तय करेंगे.  
  • वियतनाम सिंड्रोम दोबारा: अगर युद्ध लंबा चला तो अमेरिका फिर फंस सकता है, जहां सैन्य जीत हो लेकिन राजनीतिक हार हो.

यह स्थिति दिखाती है कि अमेरिका ने वियतनाम से सबक नहीं सीखा. ट्रंप का लक्ष्य रेजीम चेंज है लेकिन ईरान की रणनीति से युद्ध लंबा और महंगा हो सकता है. दुनिया परेशान है कि क्या ट्रंप ईरान में वियतनाम जैसी जाल में फंस गए हैं.

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