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Food Vastu Tips: क्या आप भी खाना खाने के बाद जूठी थाली में धोते हैं हाथ? जानें क्या कहता है वास्तु नियम

Vastu tips for food: क्या आप भी भोजन समाप्त करने के बाद उसी प्लेट में हाथ साफ कर लेते हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह छोटी सी लापरवाही घर की सुख-समृद्धि और बरकत को पूरी तरह रोक देती है. जूठी थाली में हाथ धोने से कुंडली के ग्रह कैसे प्रभावित होते हैं, चलिए जानते हैं इससे जुड़े वास्तु नियम.

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खाने के वास्तु नियम (Photo: ITG)
खाने के वास्तु नियम (Photo: ITG)

Food Vastu Tips: हमारे सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन को केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि एक पवित्र यज्ञ माना गया है. अन्नं ब्रह्म यानी अन्न को ब्रह्म का रूप माना गया है. अक्सर आपने अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को टोकते हुए सुना होगा कि खाना खाने के बाद थाली में हाथ मत धोओ. यह केवल एक टोकने की आदत नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक, वास्तु और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं. आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र और शास्त्रों के अनुसार भोजन के तुरंत बाद थाली में हाथ धोने की मनाही क्यों है.

1. मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा का अनादर 

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस थाली में हमने भोजन किया है, वह हमारे लिए पूजनीय है. भोजन समाप्त होने के बाद भी थाली में अन्न के कुछ कण या अंश रह जाते हैं. जब हम उसी थाली में हाथ धोते हैं, तो वह बचा हुआ अन्न दूषित और अपमानित होता है. इससे धन की देवी मां लक्ष्मी और अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं, जिससे घर में दरिद्रता आती है.

नकारात्मक ऊर्जा का वास- वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूठी थाली में हाथ धोने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बिगड़ता है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.

पुण्यों का नष्ट होना- पुराणों में कहा गया है कि भोजन के बाद थाली में हाथ धोने से व्यक्ति के द्वारा अर्जित किए गए पुण्य कर्म नष्ट होने लगते हैं और भाग्य उसका साथ छोड़ देता है.

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2. वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण

स्वच्छता (Hygiene)- थाली में हाथ धोने से वह पानी और जूठन आपस में मिल जाते हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है. यदि उसी थाली को बाद में साफ भी किया जाए, तो भी उसे एक अस्वच्छ आदत माना जाता है.

अन्न की बर्बादी रोकना- जब हम थाली में हाथ धोते हैं, तो बचे हुए भोजन के कण पानी के साथ मिलकर नाली में बह जाते हैं, जो कि पूरी तरह से अन्न का अपव्यय है. सनातन संस्कृति में अन्न के एक भी दाने को बर्बाद करना पाप माना गया है.

क्या कहता है नियम?

भोजन करने का सही नियम यह है कि खाना खाने के बाद आदरपूर्वक थाली से उठें. हाथ और मुंह धोने के लिए बेसिन या किसी अन्य निश्चित स्थान का उपयोग करें. भोजन के बाद थाली को भी उसके सही स्थान पर (सिंक या साफ करने की जगह) तुरंत रख देना चाहिए, उसे लंबे समय तक जूठा नहीं छोड़ना चाहिए. ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है.

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