पुणे में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने देश के दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के कथित डीपफेक का इस्तेमाल कर 38 साल की एक नर्स को अपना शिकार बना लिया. पुणे के अंबेगांव इलाके में रहने वाली महिला को फर्जी ऑनलाइन निवेश योजना में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया. ठगों ने सोशल मीडिया पर रतन टाटा का डिजिटल तरीके से तैयार किया गया वीडियो दिखाकर महिला का भरोसा जीता और इसके बाद उसे एक कथित Investment Platform से जोड़ा गया.
FIR के मुताबिक, अक्टूबर 2024 में महिला ने इंस्टाग्राम पर रतन टाटा का एक वीडियो देखा था. इस वीडियो में कथित तौर पर रतन टाटा शेयर मार्केट में निवेश के मौकों के बारे में बात करते हुए दिखाई दे रहे थे. महिला को यह वीडियो असली लगा और उसने उसमें दिए गए विज्ञापन पर क्लिक कर दिया. इसके बाद उसने मांगी गई अपनी निजी जानकारी साझा कर दी. इसी के बाद साइबर ठगों ने महिला से संपर्क किया और उसे ऑनलाइन निवेश के नाम पर पैसे लगाने के लिए तैयार किया.
ठगों ने महिला को एक फर्जी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म का लिंक दिया, जहां उसके निवेश पर लगातार अच्छा मुनाफा होता हुआ दिखाई देता था. इस फर्जी पोर्टल को इस तरह तैयार किया गया था कि महिला को लगे कि उसके लगाए पैसे तेजी से बढ़ रहे हैं. पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2024 से 13 जून 2025 के बीच महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 11 ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए 4 लाख 9 हजार 100 रुपये ट्रांसफर किए. स्क्रीन पर बढ़ता मुनाफा देखकर उसे शुरुआत में किसी तरह के फर्जीवाड़े का शक नहीं हुआ.
मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की. आरोप है कि ठगों ने रकम वापस देने के बजाय उससे अतिरिक्त पैसे जमा करने की मांग शुरू कर दी. इसके बाद महिला को पूरे मामले पर शक हुआ और उसे एहसास हुआ कि जिस इनवेस्ट प्लेटफॉर्म पर वह पैसा लगा रही थी, वह असल में फर्जी था. उसे समझ आ गया कि रतन टाटा के डीपफेक वीडियो के जरिए उसे निवेश के नाम पर साइबर ठगी के जाल में फंसाया गया था.
ठगी का अहसास होने के बाद महिला ने 4 मार्च 2026 को पुणे साइबर पुलिस से शिकायत की. शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद पुलिस ने शनिवार को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली. पुलिस अब उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लिंक की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी के लिए किया गया. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और डीप फेक को किस तरह तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया.
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के साथ IT Act की धारा 66D के तहत केस दर्ज किया है. अब साइबर पुलिस फर्जी निवेश पोर्टल और उससे जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट की जांच कर रही है. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि AI और डीप फेक तकनीक का इस्तेमाल किस तरह साइबर ठगों द्वारा लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया जा सकता है. सोशल मीडिया पर किसी सेलिब्रिटी या बड़े कारोबारी का वीडियो देखकर निवेश करने से पहले उसके स्रोत और प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी है.