जुलाई के महीने में रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ गया है. आलू, प्याज और टमाटर जैसी बुनियादी सब्जियों की कीमतों में आई तेजी के कारण शाकाहारी थाली महंगी हो गई है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की हालिया 'ब्रेड राइस रेट' रिपोर्ट के मुताबिक, महीने-दर-महीने के आधार पर जहां वेज थाली की लागत बढ़ी है, वहीं चिकन के दाम घटने से मांसाहारी थाली थोड़ी सस्ती हुई है.
क्रिसिल के आंकड़ों के अनुसार, घर में बनने वाली शाकाहारी थाली की औसतन कीमत जून में 27.1 रुपये थी, जो जुलाई में 4 प्रतिशत बढ़कर 28.1 रुपये पर पहुंच गई. यह इंडेक्स देश के चारों हिस्सों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम) में कच्चे माल की कीमतों के आधार पर औसतन लागत तय करता है. इसके ठीक उलट, ब्रॉयलर चिकन की दरें कम होने से मांसाहारी थाली जून के 54.8 रुपये के मुकाबले 2 प्रतिशत सस्ती होकर जुलाई में 53.5 रुपये रह गई.
भले ही पिछले महीने के मुकाबले वेज थाली महंगी हुई हो, लेकिन अगर पिछले साल जुलाई से तुलना करें तो आम जनता को काफी राहत मिली है. पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल शाकाहारी थाली 14 प्रतिशत और मांसाहारी थाली करीब 13 प्रतिशत सस्ती रही है. इससे साफ होता है कि पिछले साल के ऊंचे दामों की तुलना में इस बार खाने-पीने की चीजों के दाम काफी नियंत्रण में हैं.
टमाटर हुआ 'लाल'
शाकाहारी थाली की लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह टमाटर की कीमतों में आया उछाल रहा, जुलाई महीने में मंडियों में टमाटर की आवक में 27 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते इसकी कीमतों में अचानक 31 प्रतिशत की तेजी आ गई. यह उछाल मॉनसून के मौसम में हर साल होने वाले आपूर्ति संकट को फिर से उजागर करता है. इसके अलावा, आलू में 2 प्रतिशत और प्याज के दामों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव को और बढ़ा दिया.
जुलाई में आई इस हालिया तेजी के बावजूद, पिछले साल की तुलना में प्रमुख सब्जियों के दाम काफी नियंत्रण में हैं. उदाहरण के तौर पर, टमाटर की कीमतें सालाना आधार पर 36 प्रतिशत कम रही हैं. पिछले साल जुलाई में जहां टमाटर ₹66 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, वहीं इस साल यह ₹42 प्रति किलोग्राम के आसपास बना रहा.