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शादी, कत्ल और टुकड़ों में लाश... मुस्कान-साहिल की साजिश से फांसी तक, नीले ड्रम हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन

मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई गई. जानिए सौरभ राजपूत हत्याकांड की साजिश से अदालत के फैसले तक की पूरी सिलसिलेवार कहानी.

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अदालत ने दोनों को सजा-ए-मौत सुनाई है (फोटो-ITG)
अदालत ने दोनों को सजा-ए-मौत सुनाई है (फोटो-ITG)

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है. यह मामला मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है, जिनकी लाश मार्च 2025 में एक नीले प्लास्टिक के ड्रम से बरामद हुई थी. पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, हत्या के बाद लाश के टुकड़े करके उन्हें सीमेंट से भरे ड्रम में छिपाया गया था.

करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों के बाद 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी ठहराया गया था. इसके बाद अदालत ने 14 अक्टूबर को सजा का ऐलान कर दिया. चलिए जान लेते हैं इस सनसनीखेज हत्याकांड में कब, क्या और कैसे हुआ?

साल 2016: परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी

मेरठ के सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी एक-दूसरे से प्यार करते थे. दोनों ने साल 2016 में परिवार की मर्जी के खिलाफ घर से निकलकर शादी कर ली थी. बाद में दोनों परिवारों ने इस शादी को स्वीकार कर लिया. शादी के बाद सौरभ और मुस्कान मेरठ में रहने लगे, लेकिन कुछ समय बाद दोनों अपने परिवारों से अलग किराये के मकान में रहने लगे. इस रिश्ते से जुड़ी शुरुआती जानकारी बाद में हत्याकांड की जांच और मीडिया रिपोर्टों में सामने आई.

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साल 2019: सौरभ की नौकरी, बेटी का जन्म

सौरभ पहले मर्चेंट नेवी में काम करते थे. रिपोर्टों के मुताबिक, साल 2019 में उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और लंदन के एक मॉल में सेल्स मैनेजर के तौर पर काम करने लगे. इसी साल सौरभ और मुस्कान की बेटी का जन्म हुआ. परिवार की जिम्मेदारियों के बीच सौरभ विदेश में काम करते थे, जबकि उनकी पत्नी और बेटी मेरठ में रहते थे. बाद में सौरभ की विदेश से वापसी हो गई. इसके बाद उन्होंने बेटी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया. सौरभ ने परिवार के साथ काफी अच्छा वक्त बिताया और फिर वो वापस विदेश चले गए.

24 फरवरी 2025: सौरभ की लंदन से मेरठ वापसी

सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे. वह अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी के साथ समय बिताने के लिए भारत आए थे. उनकी वापसी के पीछे परिवार के दो जन्मदिन मनाने का अवसर भी था. अगले दिन यानी 25 फरवरी को मुस्कान का जन्मदिन था, जबकि 28 फरवरी को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया जाना था. उस वक्त परिवार के भीतर आगे क्या होने वाला था, इसकी किसी को जानकारी नहीं थी.

25 फरवरी 2025: मुस्कान का जन्मदिन

सौरभ के मेरठ लौटने के अगले दिन यानी 25 फरवरी को मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया. इसके बाद 28 फरवरी को बेटी पीहू का जन्मदिन था. सौरभ के परिवार के लिए ये दिन सामान्य पारिवारिक अवसरों की तरह थे. हालांकि, पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में रखे गए मामले के मुताबिक, कुछ ही दिनों बाद सौरभ की हत्या कर दी गई. 

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3 मार्च 2025: सौरभ की हत्या

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या की गई. जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, मुस्कान ने सौरभ को नशीली या नींद लाने वाली दवा दी, जिसके बाद वह बेहोश हो गए. इसके बाद साहिल शुक्ला को घर बुलाया गया और दोनों ने कथित तौर पर सौरभ पर चाकू से हमला किया. सौरभ की मौत के बाद उनके शव के कई टुकड़े किए गए. 

3-4 मार्च 2025: नीले ड्रम में छिपाई लाश

हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए एक नीले प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किया गया. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, शव के टुकड़ों को ड्रम में रखा गया और उसमें सीमेंट का घोल भरकर उसे छिपाने की कोशिश की गई. इस तरह लाश को लोगों की नजरों से दूर रखने की कोशिश की गई. बाद में यही नीला ड्रम इस पूरे हत्याकांड की पहचान बन गया. जब पुलिस ने ड्रम से लाश के अवशेष बरामद किए, तो मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा.

4 मार्च 2025: साहिल के साथ हिमाचल गई मुस्कान

टाइमलाइन के मुताबिक, 4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी को अपने मायके छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश की ओर चली गई. रिपोर्ट बताती हैं कि दोनों शिमला घूमने गए थे. इस दौरान सौरभ के फोन से परिवार के लोगों को संदेश भेजे गए, जिससे उनकी गैरमौजूदगी को लेकर परिवार को तत्काल पूरी जानकारी नहीं मिल सकी. जांच एजेंसियों ने बाद में इस अवधि की घटनाओं और दोनों आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की. हिमाचल प्रदेश की यात्रा भी मामले की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी.

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मार्च 2025: सौरभ के परिवार को हुआ शक

सौरभ से संपर्क नहीं होने और हालात संदिग्ध लगने पर परिवार के लोगों की चिंता बढ़ने लगी. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसी दौरान मुस्कान ने अपने मायके पक्ष को हत्या के बारे में बताया. इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और सौरभ की तलाश शुरू हुई. पुलिस ने मेरठ स्थित उस मकान की जांच की, जहां सौरभ अपनी पत्नी के साथ रहते थे. जांच के दौरान घर के अंदर रखे नीले ड्रम तक पुलिस पहुंची, जिसके बाद इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा हुआ.

17 मार्च 2025: नीले ड्रम से बरामद हुए लाश के टुकड़े

17 तारीख को मेरठ पुलिस ने नीले ड्रम से सौरभ राजपूत के शव के टुकड़े बरामद किए. शव की हालत और उसे छिपाने के तरीके ने जांच को बेहद गंभीर बना दिया. शुरुआती जांच में हत्या और सबूत मिटाने के आरोपों पर ध्यान केंद्रित किया गया. पुलिस ने मौका-ए-वारदात से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल शुरू की. नीले ड्रम में सीमेंट के बीच छिपाए गए शव की बरामदगी के बाद यह मामला देशभर में चर्चित हो गया.

18 मार्च 2025: मुस्कान और साहिल की गिरफ्तारी

लाश के टुकड़े बरामद होने के बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने दोनों से पूछताछ की और हत्या से जुड़ी घटनाओं, शव को छिपाने तथा हिमाचल प्रदेश जाने के हालात की जांच की. मामले में दोनों की भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ी. इसके बाद पुलिस ने तमाम सबूतों, गवाहों के बयानों और अन्य जांच सामग्री के आधार पर केस तैयार करना शुरू किया. गिरफ्तारी के साथ ही यह मामला हत्या की जांच से आगे बढ़कर एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया में दाखिल हो गया.

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19 मार्च 2025: न्यायिक हिरासत में भेजा

गिरफ्तारी के बाद मुस्कान और साहिल को अदालत में पेश किया गया. 19 मार्च 2025 को दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई. इसके बाद दोनों जेल में रहे और पुलिस ने मामले से जुड़े सबूत जुटाने का काम आगे बढ़ाया. जांच के दौरान मौका-ए-वारदात, शव की बरामदगी और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े पहलुओं को खंगाला गया. आगे चलकर यही साक्ष्य अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश किए गए.

12 मई 2025: पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट

मामले की जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 12 मई 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह चार्जशीट करीब 1,000 पन्नों की थी. इसमें हत्या और सबूत मिटाने से संबंधित आरोपों के साथ जांच के दौरान मिली तमाम जानकारी शामिल की गई. कई रिपोर्टस् में करीब 34 गवाहों के बयानों का भी उल्लेख किया गया. चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे की सुनवाई और अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज करने की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी.

24 नवंबर 2025: जेल में बच्ची को दिया जन्म

मामले की सुनवाई के दौरान मुस्कान की निजी जिंदगी से जुड़ी एक और घटना सामने आई. 24 नवंबर 2025 को उसने जेल में एक बच्ची को जन्म दिया. रिपोर्टों के मुताबिक, मां और नवजात को जेल के महिला बैरक में रखा गया. इसी दौरान सौरभ के परिवार की ओर से बच्ची के पितृत्व की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की मांग किए जाने की खबरें भी आईं. यह घटनाक्रम मुकदमे की सुनवाई के बीच सामने आया, लेकिन हत्या के आरोपों पर अदालत की कार्यवाही अलग से जारी रही.

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मार्च 2025 से सितंबर 2026: करीब 13 महीने चली सुनवाई

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ी. इस दौरान अभियोजन पक्ष ने सबूत और गवाह पेश किए, जबकि अदालत ने मामले के विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई की. रिपोर्टों के मुताबिक, मुकदमे में कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 126 पेशियां हुईं. अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, मेडिकल और फॉरेंसिक सबूतों और गवाहों के बयानों पर भी विचार किया.

17 सितंबर 2026: आखिरी बहस पूरी

सितंबर 2026 में मुकदमा अपने अंतिम चरण में पहुंचा. 17 सितंबर को अदालत में अंतिम बहस पूरी हुई. अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना पक्ष रखा. सौरभ के परिवार की ओर से भी अदालत में पैरवी की गई. अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा, यानी सजा-ए-मौत देने की मांग की.

30 सितंबर 2026: मुस्कान और साहिल दोषी करार

30 तारीख को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी करार दिया. इस फैसले के साथ करीब 13 महीने चली सुनवाई का एक अहम चरण पूरा हुआ. अदालत ने सजा की मात्रा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की. दोषसिद्धि के बाद सौरभ के परिवार ने आरोपियों को अधिकतम सजा दिए जाने की मांग की. इसके बाद सभी की निगाहें सजा के ऐलान पर टिक गईं.

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14 अक्टूबर 2026: दोनों को मौत की सजा

14 अक्टूबर को मेरठ की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई. दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा पर फैसला सुनाया गया. अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखने और मृत्युदंड देने की मांग की थी. अदालत के इस फैसले के साथ ब्लू ड्रम हत्याकांड की सुनवाई का अहम चरण पूरा हुआ. हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता खुला है.

कुल मिलाकर 22 गवाहों, 126 पेशियों और करीब 13 महीने की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और 14 अक्टूबर 2026 को सजा-ए-मौत सुना दी.

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