भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिका में 20 अरब डॉलर से ज्यादा के नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कंपनियों की सराहना की है.
गोर ने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) में बोलते हुए कहा कि IACC के लगभग 70% सदस्य भारतीय कंपनियां हैं और 1,400 से अधिक सदस्यों ने पहले ही अमेरिका में निवेश किया है या अमेरिकी फर्मों के साथ साझेदारी की है.
गोर ने कहा कि भारत में अमेरिकी अम्बेसी, अमेरिका में निवेश लाने के मामले में दुनिया में पहले स्थान आई है और हम बेहद खुश हैं. हमें भारत से 20 अरब डॉलर से ज्यादा का नया निवेश मिला हुआ है.
सर्जियो गोर ने कई भारतीय कंपनियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने अमेरिका में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है. उन्होंने कहा कि 8 अरब डॉलर के टीवीएस समूह का हिस्सा, सुंदरम क्लेटन ने दक्षिण कैरोलिना में अपना निवेश बढ़ाकर 200 मिलियन डॉलर कर दिया है, जिससे 230 अमेरिकी नौकरियां पैदा होंगी.
इन जगहों पर अपने ऑपरेशन का विस्तार
हैदराबाद स्थित नैटको फार्मा और ऑरोबिंदो फार्मा ने न्यू जर्सी, प्यूर्टो रिको और अन्य जगहों पर अपने ऑपरेशन का विस्तार किया है. गोर ने कहा कि अलबामा में रूट्स ग्रुप ने 10 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और मैन्युफैक्चरिंग कार्यों के लिए 30 से ज्यादा अमेरिकियों को काम पर रखा है.
उन्होंने कहा कि जब भारतीय कंपनियां अमेरिका में निवेश करती हैं, तो यह सबके लिए फायदेमंद स्थिति होती है. आपको दुनिया के सबसे गतिशील बाजार तक पहुंच मिलती है, और आप भारत और अमेरिका दोनों जगह रोजगार पैदा करते हैं.
गोर ने ज्यादा निवेश की रिक्वेस्ट की
इस साल जनवरी में पदभार संभालने वाले अमेरिकी राजदूत ने विदेशों में विस्तार करने की इच्छुक भारतीय कंपनियों से अमेरिका को चुनने का निवेदन किया. उन्होंने कहा कि मेरी हर कंपनी से ये गुजारिश है कि अगर आप अगले विदेशी निवेश पर विचार कर रहे हैं, तो अमेरिका को चुनें. अपनी ग्रीनफील्ड परियोजना, अपना अनुसंधान एवं विकास केंद्र, अपनी विनिर्माण लाइन अमेरिकी धरती पर लाएं और मेरी टीम को वहां तक पहुंचने में आपकी मदद करने दें.
अमेरिका में निवेश का यही सही समय
उन्होंने आगे कहा कि अगर आपने पहले ही अमेरिका में निवेश कर दिया है, तो उस प्रतिबद्धता को और गहरा करें. यही सही समय है. गोर ने कहा कि अमेरिका कंपनियों को वह पैमाना, स्थिरता, नवाचार और पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है जिसकी वे तलाश कर रही हैं. उन्होंने कहा कि आईएसीसी के 1,400 से अधिक सदस्य पहले से ही संयुक्त राज्य अमेरिका को अपना घर मानते हैं.
भारत-अमेरिका व्यापार
गोर ने कहा कि वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार महज दो दशकों में लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 240 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 500 अरब डॉलर तक पहुंचने की है, और उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत AI, टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस, डिफेंस और एनर्जी के सेक्टर में मिलकर काम कर रहे हैं.
गोर ने कहा कि जब संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत एक साथ काम करते हैं, तो हम सप्लाई चेन को यूनिफाइड करते हैं, महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में सफलताओं को गति देते हैं और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलता को मजबूत करते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी दूत ने कहा कि ट्रंप ने इस रिश्ते में भारी निवेश किया है और उन्हें भारत पर भरोसा है.
उन्होंने कहा कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरू होने के कुछ हफ्तों बाद ही, ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को गति देने के लिए एक "विश्वास पहल" शुरू की.
भारत में निवेश करेंगी ये कंपनियां
गोर ने कहा कि इसके बाद से अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने भारत में अरबों डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई समिट का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाग लेने वाली 90% कंपनियां अमेरिकी थीं.
गोर ने कहा कि वह नियमित रूप से भारत आने वाले अमेरिकी सीईओ और अमेरिका में निवेश करने के इच्छुक भारतीय सीईओ से मिलते हैं. उन्होंने हाल ही के एक दिन का जिक्र किया जब उनकी मुलाकात मेटा, नेटफ्लिक्स के सीईओ और रोल्स-रॉयस के सीईओ से दोपहर से पहले हुई थी. उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एक जनरल डे है. गोर ने कहा कि इस रिश्ते में इस आर्थिक इंजन की पूरी शक्ति को उजागर करने की अविश्वसनीय और अद्भुत क्षमता है.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के एलएनजी और एलपीजी के आयात और निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 40% की वृद्धि हुई है. गोर ने कहा कि अमेरिका अपनी लगभग 40% जेनेरिक दवाइयां भारत से प्राप्त करता है, और इसे दोनों देशों के बीच विश्वास का प्रतिबिंब बताया.