अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े दो मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है. एजेंसी के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े मामले में कथित अपराध की रकम ₹40,185 करोड़ आंकी गई है. ईडी ने इस मामले में ₹8,078 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं और अब उनकी जब्ती की मांग की है.
ईडी ने रविवार को बताया कि दोनों मामले अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप की कंपनियों और उनके कुछ पूर्व अधिकारियों से जुड़े हैं. पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट शनिवार को द्वारका की विशेष अदालत में दाखिल की गई, जबकि दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में दाखिल हुई. रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में मुख्य चार्जशीट इस साल मार्च में दाखिल की गई थी.
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा पहला मामला
पहले मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पूर्व अधिकारी सतीश सेठ और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है. ईडी के मुताबिक, 70 वर्षीय सतीश सेठ को इस साल जून में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. उन्होंने 2025 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड छोड़ दिया था. यह मामला फरवरी में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. ईडी का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के जरिए शेल कंपनियां बनाई और संचालित की गईं. इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर अधिक मूल्य वाले हीरा निर्यात के फर्जी इनवॉइस के जरिए फंड और आउटवर्ड रेमिटेंस भेजने में किया गया. आउटवर्ड रेमिटेंस का मतलब भारत से किसी व्यक्ति या व्यवसाय द्वारा विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) देश के बाहर किसी लाभार्थी के खाते में पैसे भेजना.
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NHAI के 4 प्रोजेक्ट्स से ₹187 करोड़ डायवर्ट
ईडी के मुताबिक, जांच में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के चार टोल रोड प्रोजेक्ट्स से कलेक्ट पब्लिक फंड्स को डायवर्ट करने की प्लानिंग सामने आई है. इनमें त्रिची-करूर NH-67, त्रिची-डिंडीगुल NH-45, सेलम-उलुंदुरपेट NH-68 और जयपुर-रींगस NH-11 शामिल हैं. एजेंसी के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स को NHAI ग्रांट और बैंकों व वित्तीय संस्थानों से मिले कर्ज के जरिए फंड किया गया था. ईडी का आरोप है कि सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग काम दिखाकर करीब ₹187 करोड़ निकाले गए.
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रकम रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, उसकी स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) या EPC कॉन्ट्रैक्टरों से निर्माण ठेकेदारों तक पहुंची. इसके बाद कथित तौर पर इसे ऐसी शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनका सड़क निर्माण से कोई वास्तविक संबंध नहीं था. ईडी का दावा है कि बाद में इन लेन-देन को वास्तविक प्रोजेक्ट खर्च के रूप में दिखाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए. एजेंसी ने इस मामले में करीब ₹187 करोड़ की अचल संपत्तियां अटैच की हैं. इनमें रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्द कंस्ट्रक्शंस के नाम पर दर्ज जमीन शामिल है. ईडीने कहा कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है.
₹40,185 करोड़ के अपराध की आय का आरोप
दूसरा मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़ा है. इसमें आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, सतीश सेठ, गौतम दोशी, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को आरोपी बनाया गया है. ईडी के मुताबिक, गौतम दोशी को जून में और सतीश सेठ को जुलाई में गिरफ्तार किया गया था और दोनों न्यायिक हिरासत में हैं. दोशी 2020 में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड छोड़ चुके थे. यह मामला सीबीआई के कई एफआईआर से सामने आया, जिनमें आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड पर फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के कथित डायवर्जन के आरोप हैं.
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लोन लेकर पुराने कर्ज चुकाने का लगा है आरोप
ईडी का आरोप है कि जिन उद्देश्यों के लिए नई क्रेडिट सुविधाएं (लोन) ली गईं, उसका उपयोग पुराने घरेलू और विदेशी दायित्वों (कर्ज) को चुकाने, फंड को घुमाने और कथित तौर पर कर्ज को एवरग्रीन करने के लिए किया गया. एजेंसी के मुताबिक, रकम को रिलायंस ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों, स्पेशल कंड्यूइट यूनिट्स, कई बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड्स के जरिए लेयर किया गया. जांच में इन पैसों के इस्तेमाल को पहले के एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) के भुगतान से भी जोड़ा गया है. ईडी का दावा है कि लोन की रकम रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड समेत ग्रुप की अन्य कंपनियों में डायवर्ट की गई. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इस रकम का इस्तेमाल विदेशों में प्रमोटरों की निजी संपत्तियां खरीदने में भी किया गया.
इस मामले में ₹8,078 करोड़ की संपत्तियां अटैच
ईडी के मुताबिक, कथित लेन-देन से आरकॉम के मुनाफे को बढ़ाकर दिखाया गया. एजेंसी ने इस मामले में कथित अपराध की रकम ₹40,185 करोड़ आंकी है. जांच एजेंसी ने अब तक ₹8,078 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं और अदालत से इनकी जब्ती की मांग की है. दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब आगे की कार्रवाई विशेष अदालतों में होगी.