देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है, वहीं पश्चिम चंपारण के बगहा का दोन क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. इसी परेशानी को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने के लिए शुक्रवार को ग्रामीणों ने नदी के बीच उतरकर तिरंगा यात्रा निकाली.
यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए. सभी के हाथों में तिरंगा था और वे पानी के बीच से नदी पार करते हुए अपनी मांगों को आवाज दे रहे थे. ग्रामीणों का कहना है कि उनका यह प्रदर्शन किसी विरोध से ज्यादा अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश है.
ग्रामीणों ने तिरंगे के साथ नदी पार करते हुए क्षेत्र में सड़क, पुल, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई. उनका कहना है कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी कई गांव जरूरी संसाधनों से दूर हैं. बारिश के दौरान नदी और जलभराव की स्थिति उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है.
सड़क-पुल से लेकर बिजली और स्वास्थ्य तक की मांग
दोन क्षेत्र के ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने और जगह-जगह पानी जमा होने के कारण आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है. कई बार जरूरी काम से बाहर जाने के लिए भी लोगों को पानी के बीच से गुजरना पड़ता है. ऐसे हालात में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है.
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में बेहतर सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने के कारण सामान्य आवाजाही भी चुनौती बन जाती है. बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी उनकी चिंता का विषय है. ग्रामीण लंबे समय से इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं.
इसी वजह से इस बार तिरंगा यात्रा को समस्याओं की आवाज बनाने का फैसला लिया गया. ग्रामीणों ने राष्ट्रीय ध्वज को हाथों में लेकर नदी में उतरते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि देश आजादी का उत्सव मना रहा है, लेकिन कई इलाकों में लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
कांग्रेस नेता जय सिंह भी यात्रा में हुए शामिल
ग्रामीणों की इस पहल में कांग्रेस नेता जय सिंह भी शामिल हुए. उन्होंने ग्रामीणों के साथ नदी में उतरकर तिरंगा यात्रा में हिस्सा लिया और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उनकी मांगों का समर्थन किया. यात्रा के दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ कदम मिलाकर उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश की.
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए तिरंगा केवल देश की आन-बान-शान का प्रतीक नहीं है. यह उनकी उम्मीदों और अधिकारों की आवाज भी है. नदी के बीच से निकाली गई यात्रा के जरिए वे सरकार और प्रशासन तक अपनी स्थिति पहुंचाना चाहते हैं.
ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी यह अनोखी पहल जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान दोन क्षेत्र की समस्याओं की ओर खींचेगी. उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की उपलब्धियों के साथ उन इलाकों की चुनौतियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में हैं.
आजादी के 79 साल बाद भी सुविधाओं का इंतजार
दोन क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 79 साल बाद भी उनके गांवों में सड़क, पुल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं. बारिश के मौसम में उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं और नदी पार करना मजबूरी बन जाता है.
तिरंगा यात्रा के जरिए ग्रामीणों ने सरकार से क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है. अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचेगी और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.