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फैक्ट चेक: ‘चीनी अतिक्रमण’ के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश में हुए प्रदर्शन का नहीं है ये वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें झंडे-बैनर लिए हुए कई लोग सड़कों पर नारे लगाते दिख रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये अरुणाचल प्रदेश का वीडियो है और इसमें दिख रहे लोग चीन के अतिक्रमण के बाद सड़कों पर उतर आए हैं.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये वीडियो अरुणाचल प्रदेश का है. इसमें दिख रहे लोगों ने चीनी अतिक्रमण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये वीडियो सिक्किम के गंगटोक का है और तिब्बत के समर्थन में हुए प्रदर्शन को दिखाता है.

अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास तनाव की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें झंडे-बैनर लिए हुए कई लोग सड़कों पर नारे लगाते दिख रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये अरुणाचल प्रदेश का वीडियो है और इसमें दिख रहे लोग चीन के अतिक्रमण के बाद सड़कों पर उतर आए हैं.

ये वीडियो किसी पहाड़ी इलाके का लगता है. इसमें लोग “हमें क्या चाहिए…भारत की सुरक्षा” जैसे नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं.

ऐसे ही एक पोस्ट में एक लड़की वायरल वीडियो पर टिप्पणी करते हुए कहती है कि अरुणाचल प्रदेश की जनता बेहद परेशान है, और उसे डर है कि कहीं चीन पूरी तरह से कब्जा न कर ले, इसी वजह से लोग सुरक्षा की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं.

fact check

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो सिक्किम के गंगटोक का है और तिब्बत के समर्थन में हुए प्रदर्शन को दिखाता है.

कैसे पता लगाई सच्चाई?

वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें Tenzing Solden नाम के फेसबुक अकाउंट पर इसका असली वर्जन मिल गया. बायो के मुताबिक Tenzing सिक्किम के गंगटोक की रहने वाली हैं.

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fact check

9 अगस्त के इस वीडियो पर ‘Gangtok Sikkim’ लिखा हुआ है, और कैप्शन में ‘#FreeTibet’, और ‘#StandWithTibet’, जैसे हैशटैग्स का इस्तेमाल किया गया है. इससे लगता है कि ये वीडियो तिब्बत मामलों से संबंधित हो सकता है.

Tenzing Solden ने 9 अगस्त को एक और वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वो खुद इस रैली में शामिल नजर आ रही हैं. कैप्शन के मुताबिक लोग Lobga Rangzen को न्याय दिलाने के लिए और चीन के नए ‘एथनिक यूनिटी कानून’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. 

Pawo Lobga Rangzen एक प्रमुख तिब्बती एक्टिविस्ट और तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक थे. उन्होंने 2 जुलाई, 2026 की शाम को यूनाइटेड नेशन्स मुख्यालय के सामने पारंपरिक तिब्बती वेशभूषा में तिब्बती झंडा फहराया था, और चीनी नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए खुद को आग लगा ली थी, जिससे उनकी मौत हो गई.

वहीं 1 जुलाई, 2026 से चीन में एक ‘एथनिक यूनिटी कानून’ लागू किया गया है, जिसके तहत तिब्बत, शिनजियांग और मंगोलिया जैसे क्षेत्रों में स्थानीय संस्कृति और भाषा की जगह चीनी भाषा और मुख्यधारा की संस्कृति को अनिवार्य किया गया है.

‘सिक्किम एक्सप्रेस’ और ‘इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट’ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, RTYC (रीजनल तिब्बती युवा कांग्रेस) ने सिक्किम की राजधानी गंगटोक में चीन के इस नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया था. साथ ही इस दौरान Lobga Rangzen को श्रद्धांजलि भी दी गई थी. तिब्बती समुदाय के 500 से अधिक लोग इस रैली में शामिल हुए थे.

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RTYC गंगटोक के फेसबुक पेज पर भी इस रैली का एक वीडियो शेयर किया गया था. वायरल वीडियो गंगटोक की जिस जगह का है, उसे गूगल मैप्स पर भी देखा जा सकता है.

हालांकि असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. ये दोनों राज्यों के बीच एक सीमा विवाद है. लेकिन इसका चीन से कोई लेना-देना नहीं है. इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में ‘चीनी अतिक्रमण’ की खबरों को सरकार ने लगातार खारिज किया है.

साफ है कि सिक्किम में हुए एक प्रदर्शन को गलत दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.

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