यूक्रेन एलन मस्क के स्टारलिंक की धीमी गति को लेकर चिंतित है, लेकिन राष्ट्रपति जेलेंस्की के तकनीकी सलाहकार सर्ही बेस्क्रेस्तनोव इससे बड़ा अलार्म बजा रहे हैं. वे रूस के रासवेत सैटेलाइट कॉन्स्टीलेशन को मौजूदा तकनीकी चुनौतियों में खतरा नंबर एक बता रहे हैं. उनके अनुसार इस नेटवर्क का पूरी तैनाती बड़ी तबाही साबित हो सकती है.
बेस्क्रेस्तनोव का कहना है कि रूस पहले से ही सैटेलाइट के जरिए हल्की क्रूज मिसाइल बंदरोल और डैन-एम जैसे विस्फोटक युक्त कामीकेज ड्रोन को रियल-टाइम में कंट्रोल करने की क्षमता हासिल कर रहा है. पूरा नेटवर्क तैयार होने पर रूसी ऑपरेटर ड्रोन और मिसाइलों को सीधे उपग्रह से नियंत्रित कर सकेंगे. इससे यूक्रेन का इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर नेटवर्क बेअसर हो जाएगा. वे चेतावनी देते हैं कि रूस पूरे देश पर रियल-टाइम और बहुत सटीक हमले कर सकेगा.
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मार्च 2026 में रूस ने रासवेत के पहले 16 सैटेलाइट लॉन्च किए. इनमें 5जी एनटीएन कम्युनिकेशन, लेजर इंटर-सैटेलाइट लिंक और प्लाज्मा प्रोपल्शन लगे हैं. सैकड़ों और सैटेलाइट जोड़ने की योजना है. लक्ष्य 1 जीबीपीएस तक की स्पीड और कम लेटेंसी वाला संप्रभु डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यह सिस्टम अटैक ड्रोन का सपोर्ट कर सकता है और स्टारलिंक से कमतर नहीं है.
स्टारलिंक से तुलना और सैन्य उपयोग
स्टारलिंक यूक्रेन की सेना के लिए महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन रूस अपना विकल्प बना रहा है ताकि बाहरी निर्भरता खत्म हो. रासवेत लो-अर्थ ऑर्बिट में काम करेगा. फिलहाल यूक्रेन पर कवरेज सीमित है. केवल 30-40 मिनट के लिए उपलब्ध होता है. लेकिन सैटेलाइट की संख्या बढ़ने पर यह निरंतर हो जाएगा. इससे ड्रोन और मिसाइलों का मिड-फ्लाइट कंट्रोल आसान हो जाएगा, जो मौजूदा जैमिंग सिस्टम को चुनौती देगा.
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यह विकास न सिर्फ यूक्रेन बल्कि यूरोप के लिए भी चिंता का विषय है. रासवेत रूस को युद्धक्षेत्र में संचार की स्वतंत्रता देगा. यूक्रेन काउंटरमेजर विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोकथाम की कोशिश कर रहा है. रूस के लिए सैटेलाइट उत्पादन और लॉन्च रेट चुनौती है, लेकिन प्रगति जारी है.
रासवेत रूस की तकनीकी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है. अगर यह सफल रहा तो युद्ध की प्रकृति बदल सकती है, जहां सैटेलाइट नियंत्रित हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे. यूक्रेन और पश्चिमी देश इसे गंभीरता से ले रहे हैं.
ऋचीक मिश्रा