मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ के वाहन पर हुए फायरिंग हमले ने बॉलीवुड की सुरक्षा व्यवस्था को फिर हिला दिया है. 18 अक्टूबर 2026 की शाम को जब टाइगर फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे, तब अज्ञात हमलावरों ने उनके बीएमडब्ल्यू पर कई राउंड दागे. उनके ड्राइवर फिरदौस घायल हो गए, लेकिन अभिनेता खुद सुरक्षित रहे.
पुलिस की प्रारंभिक जांच में अब हथियार और कारतूस की अहम जानकारियां सामने आई हैं, जो इस हमले की गंभीरता को और बढ़ा रही हैं. घटनास्थल से मिले कारतूसों और खोखों की जांच में पता चला है कि गोलियां 7.62 मिमी कैलिबर की हैं. कुल सात राउंड दागे गए. इनमें से पांच खाली मिले, जबकि दो भरे हुए बरामद हुए.
विशेषज्ञों का मानना है कि हमलावरों में से एक के हथियार में खराबी आ गई होगी, जिसके कारण भरा कारतूस बिना दागे निकल गया. यह खराबी शायद मैकेनिकल फेल्योर या अनुचित हैंडलिंग की वजह से हुई. 7.62 मिमी कैलिबर आमतौर पर राइफल या कुछ खास पिस्तौलों में इस्तेमाल होता है.
पुलिस को शक है कि इनमें से एक हथियार तुर्की निर्मित जिगाना पिस्तौल हो सकती है. हालांकि जिगाना मुख्य रूप से 9 मिमी जैसी गोलियों के लिए जानी जाती है, लेकिन विभिन्न वैरिएंट और लोकल मॉडिफिकेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जांच एजेंसियां अब इन कारतूसों की मैचिंग और हथियार का पता लगाने में जुटी हैं. इसी का इस्तेमाल सिद्धू मूसेवाला, अतीक अहमद, बाबा सिद्दीकी के मर्डर में हुआ था. इसी पिस्तौल से दिशा पाटनी के घर भी फायरिंग की गई थी.
जिगाना पिस्तौल को कई खासियतों के कारण पसंद किया जाता है. इस पर एडजस्टेबल साइट लगाई जा सकती है, जिससे निशाना लगाने में आसानी होती है. यह जल्दी गर्म नहीं होती, इसलिए लंबे समय तक चलाने पर भी सुरक्षित रहती है. इसका फ्लैट फेस्ड ट्रिगर उंगलियों को सरकने नहीं देता, जिससे नियंत्रण बेहतर रहता है.
जिगाना से निकली गोली सटीकता के साथ लक्ष्य पर लगती है. हैरानी की बात यह है कि तुर्की में बनी यह पिस्तौल अमेरिकी कोस्ट गार्ड भी इस्तेमाल करती है. मलेशिया की सेना, अजरबैजान की सेना और फिलिपींस की नेशनल पुलिस भी इसी हथियार से लैस हैं.
यह सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल 2001 से तुर्की की कंपनी टीआईएसएएस द्वारा बनाई जा रही है. दुनिया भर में इसके 11 वैरिएंट उपलब्ध हैं, जो लंबाई, मैगजीन साइज और वजन के हिसाब से अलग-अलग हैं. जिगाना के ज्यादातर 10 वैरिएंट में 15 राउंड की मैगजीन लगती है.
इसमें चार तरह की गोलियां इस्तेमाल हो सकती हैं- 9x19 मिमी पैराबेलम, 9x21 मिमी आईएमआई, .40 एसएंडडब्ल्यू और .45 एसीपी. हर गोली की रेंज और मारक क्षमता अलग है, इसलिए जरूरत के हिसाब से चुना जा सकता है. आमतौर पर सभी वैरिएंट की चौड़ाई 37 मिमी होती है, सिर्फ एम16 वैरिएंट की चार मिमी कम है. ऊंचाई 139 मिमी है, जबकि एम16 की 142 मिमी. वजन 720 ग्राम से 920 ग्राम के बीच रहता है.
सबसे हल्की पीएक्स-9 वैरिएंट का वजन 720 ग्राम है और इसमें 18+1 राउंड की मैगजीन लगती है. इसे तुर्की और इटली के सहयोग से मलेशिया में बनाया जाता है, क्योंकि मलेशिया की सेना इसकी बड़ी खरीदार है. डबल एक्शन रिकॉइल सिस्टम वाले इन वैरिएंट में बैरल की लंबाई 130 मिमी होती है. मैगजीन आसानी से निकलती-लगती है और लोडिंग तेज होती है. इसकी कीमत भारत में अवैध बाजार में 6 से 9 लाख रुपये तक बताई जाती है.
पाकिस्तान में जिगाना को स्थानीय बंदूक फैक्ट्रियों में भी बनाया जाता है और अवैध तरीके से लाया जाता है. यह ब्राउनिंग टाइप पिस्तौल से प्रेरित है, इसलिए डिजाइन और लॉकिंग सिस्टम लगभग वैसा ही है. यही वजह है कि यह हल्की, सटीक और घातक मानी जाती है. अमेरिका में इसे अमेरिकी टैक्टिकल इंपोर्ट के तहत मंगाया जाता है और नाम बदलकर एफएस9 या एफएस40 कर दिया जाता है.
अजरबैजान में इसे जफर, जफर-के जैसे नामों से जाना जाता है. दुनिया की टॉप टेन पिस्तौलों में जिगाना का नाम नहीं आता. ग्लॉक-17, सिग सॉर पी320, बेरेटा 92 जैसी पिस्तौलें उस लिस्ट में हैं. फिर भी जिगाना अपनी मारक क्षमता और विश्वसनीयता के लिए जानी जाती है.
टाइगर श्रॉफ पर हमले में जिगाना जैसी विदेशी पिस्तौल की आशंका इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत में अवैध हथियारों की सप्लाई चेन कितनी सक्रिय है. 7.62 मिमी कारतूस और सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल का संयोजन हमलावरों की तैयारी को दर्शाता है. पुलिस अब हथियार की सोर्सिंग, हमलावरों की पहचान और मकसद की जांच कर रही है. जुहू इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अन्य सेलिब्रिटीज की सुरक्षा भी कड़ी की गई है.
यह घटना बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठाती है. अवैध हथियारों पर अंकुश और खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत साफ नजर आती है. जांच आगे बढ़ने पर और तथ्य सामने आएंगे, लेकिन प्रारंभिक सबूत बताते हैं कि हमला सोचा-समझा और पेशेवर अंदाज में किया गया था.