01 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
फूलों की खेती किसानों के लिए कमाई का एक बेहतर जरिया मानी जाती है. लेकिन जैसे ही सर्दी का मौसम आता है, वैसे ही फूलों के पौधों पर कम फूल आने लगते हैं.
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ये परेशानी घर के गमलों में लगे पौधों के साथ भी होता है. सर्दियों में तापमान गिरने के साथ फूलों की ग्रोथ प्रभावित होती है.
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ऐसे में अगर किसान सही तकनीक अपनाएं, तो ठंड के मौसम में भी फूलों का उत्पादन और उनकी चमक बनी रह सकती है.
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एक्सपर्ट की मानें तो इश मौसम में फूलों की खेती में पानी की जरूरत बहुत कम होती है. ज्यादा पानी देने से पौधे कमजोर हो जाते हैं और गलने लगती है.
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ऐसे में फूलों में चमक लाने के लिए बोरान, मोलिब्डेनम, जिंक, कॉपर, सल्फर और एनपीके जैसे पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं.
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इनका प्रयोग चाहे छिड़काव के रूप में या बेसल डोज के रूप में करें. इससे पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है और फूलों की चमक लंबे समय तक बनी रहती है.
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फूलों की खेती दो तरीकों से की जाती है. एक प्रोटेक्टिव कल्टीवेशन के तहत, जहां पॉलीहाउस में फूल उगाए जाते हैं, और दूसरा खुले खेतों में.
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दोनों ही तरीको में किसानों को सीमित मात्रा में ही सिंचाई करनी चाहिए. इसके साथ ही मिट्टी में बेंटोनाइट सल्फर और जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट का प्रयोग करना चाहिए.
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गलने से बचाव के लिए किसानों को कार्बेंडाजिम और मैंकोजेब के मिश्रण का उपयोग करना चाहिए. इसकी 3 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर फूलों के पौधों पर छिड़काव करना चाहिए.
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अगर किसान सर्दियों में पानी और पोषण का सही संतुलन बनाए रखें, तो फूलों की खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है.
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