भारत में गायों की कई देसी नस्लें पाई जाती हैं, जिनकी अपनी-अपनी विशेषताएं होती हैं. पशुपालक अपनी जरूरत और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार इन नस्लों का पालन कर सकते हैं और इनसे भरपूर लाभ कमा सकते हैं. सही नस्ल की गाय चयन न केवल दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि पशुपालक को आर्थिक रूप से मजबूत भी बना सकता है.
पशुपालक गाय की खास नस्लों की जानकारी रखकर उनका पालन करें, तो उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाला दूध, अधिक मात्रा में उत्पादन, और लंबे समय तक फायदे मिल सकते हैं. पशुपालन और डेयरी विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गाय की खास नस्लों की जानकारी शेयर की है.
ये 5 खास नस्ल की गाय देंगी पशुपालकों को फायदा
थारपारकर गाय
थारपारकर गाय भारत की एक प्रमुख देसी नस्ल है, जिसका मूल क्षेत्र राजस्थान का थर मरुस्थल माना जाता है. यह नस्ल कठोर जलवायु में भी आसानी से ढल जाती है और अपनी मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है. इस गाय का रंग सफेद से हल्का स्लेटी होता है. यह न केवल उच्च गुणवत्ता वाला दूध देती है बल्कि कृषि कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकती है. थारपारकर गाय संतुलित देखभाल और सही पोषण मिलने पर पर्याप्त मात्रा में बेहतर दूध देती है. इससे पशुपालकों की आय बढ़ने में मदद मिलती है.
गिर गाय
गिर गाय भारत की सबसे मशहूर देसी दुग्ध नस्लों में से एक है. इसका मूल क्षेत्र गुजरात के गिर जंगल और आसपास का इलाका माना जाता है. यह नस्ल खास तौर पर ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती है और लंबे समय से भारतीय खेती और पशुपालन में अहम भूमिका निभाती रही है. गिर गाय का शरीर मजबूत होता है और इसका रंग लाल‑भूरा होता है. यह गाय कम चारे में भी अच्छा दूध देने की क्षमता रखती है. यह गाय एक दिन में लगभग 50 लीटर तक दूध दे सकती है.
देओनी गाय
देओनी गाय, भारत की एक मजबूत देसी नस्ल है. यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र में पाई जाती है. ये नस्ल कम देखभाल में भी अच्छा दूध उत्पादन करती है और अपनी रोग‑प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है. देओनी गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो आपके परिवार की सेहत को बेहतर बना सकता है और साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है. छोटे और मध्यम स्तर के किसानों के लिए यह नस्ल भरोसेमंद और लाभकारी साबित हो सकती है. यह गाय सालाना लगभग 1500 लीटर तक दूध उत्पादन कर सकती है.
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साहीवाल गाय
साहीवाल गाय भारत की मशहूर देसी नस्लों में से एक है. इस गाय का रंग लाल‑भूरा से गहरे भूरा होता है. यह नस्ल ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती है।.साहीवाल गाय गर्म मौसम को आसानी से सह लेती है. इस गाय में परजीवियों से लड़ने की क्षमता होती है. इसका स्वभाव भी शांत माना जाता है. इसलिए इसे पालना आसान बन सकता है. यह गाय पशुपालकों के लिए बेहतर मानी जाती है.
मालवी गाय
भारत की एक स्वदेशी नस्ल है, जिसका नाम इसके मूल क्षेत्र मालवा (मध्य प्रदेश) से जुड़ा है. यह खास गाय मजबूत शरीर और उचित दूध उत्पादन जैसी खूबियों के कारण भारतीय पशुपालन में अपनी खास पहचान रखती है.