FSSAI ने फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल्स के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी है. इसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फल मंडियों, गोदामों और थोक विक्रेताओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी.
किसानों के लिए जायद सीजन में करेले की खेती करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है. करेले की नट्टू वैरायटी के 25 ग्राम हाइब्रिड बीज सिर्फ 450 रुपये में मिल रहे हैं, जिन्हें घर बैठे ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं. इस वैरायटी के करेले जल्दी बढ़ते हैं और बाजार में इनकी मांग भी अधिक रहती है.
Delhi-Kashmir Parcel Train Service: जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के बीच 17 अप्रैल 2026 से नियमित पार्सल ट्रेन सर्विस शुरू होने जा रही है. यह ट्रेन बड़गाम से अदर्श नगर तक 23-24 घंटे में सफर पूरा करेगी. जिससे सेब, चेरी जैसे ताजे फल और हस्तशिल्प उत्पाद तेजी से पहुंचेंगे. इससे कश्मीर के व्यापारियों और किसानों को फायदा होगा.
Vegetable Farming: तोरई की काशी रक्षिता वैरायटी कम लागत में अधिक उत्पादन और बढ़िया मुनाफा देती है. ऐसे में किसानों की नकदी कमाई के लिए तोरई की खेती करना अच्छा विकल्प है. नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के अनुसार, काशी रक्षिता किस्म 50-60 दिनों में तैयार हो जाती है.
Farmer Friend Stick: किसानों की सुरक्षा के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने किसान मित्र छड़ी विकसित की है. यह छड़ी 100 मीटर दूर से ही सांप और जहरीले जीवों का पता लगा सकती है. यह छड़ी वाइब्रेशन अलर्ट और सोलर टॉर्च से लैस है.
उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. प्रदेश ने न सिर्फ दुध उत्पादन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे दुग्ध उत्पादक राज्यों को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है. इसमें ग्रामीण महिलाओं की अहम भूमिका रही है, जो डेयरी बिजनेस में एक्टिव हैं.
गन्ने की खेती में बेहतर पैदावार के लिए सही समय पर सही फैसले और कीट नियंत्रण के घरेलू उपाय जरूरी हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाया जा सके.
मधुमक्खी पालन से कम जगह, कम खर्च और कम मेहनत से अच्छा मुनाफा मिल सकता है. मधुमक्खी पालन से शहद, मोम, पराग जैसी चीजें मिलती हैं. साथ ही फसलों का उत्पादन भी बढ़ता है क्योंकि मधुमक्खियां फसलों का परागण (पोलिनेशन) करती हैं. अगर आप भी मधुमक्खी पालन करना चाहते हैं तो आइए जानते हैं इसका पूरा तरीका.
कश्मीर का 'लाल सोना' अब किसी जानी-पहचानी वजह—जैसे जलवायु परिवर्तन या बाज़ार के उतार-चढ़ाव से नहीं, बल्कि 'इंडियन क्रेस्टेड साही' (Indian Crested Porcupine) से खतरे का सामना कर रहा है. किसानों को रात भर टॉर्च लेकर पहरा देना पड़ता है, क्योंकि साही झुंड बनाकर आते हैं. वे सिर्फ़ फूल ही नहीं खाते, बल्कि ज़मीन खोदकर केसर की जड़ें भी निकाल लेते हैं. देखें आजतक संवाददाता मीर फरीद की ये रिपोर्ट.
बेमौसम बारिश से उत्तर प्रदेश में गेहूं, सरसों, चना और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है. कई जिलों में खेतों में पानी भर गया है. वहीं, कुछ जगहों पर खेत-खलिहानों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं. ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने और नुकसान से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है.
हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में हाल ही में हुई बर्फबारी से सेब के बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है. भारी बर्फबारी से सेब के पेड़ टूट गए हैं. फूल और कलियां भी खराब हो रही हैं. इससे किसानों की टेंशन बढ़ गई है.
पुणे में बेमौसम बारिश और तेज ओलावृष्टि ने जैविक तरबूज की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है. किसानों की उम्मीद थी कि इस साल 100 टन तरबूज की पैदावार होगी, लेकिन अब केवल 6 से 7 टन उत्पादन की संभावना है.
Strawberry Cultivation: विदर्भ के चिखलदरा हिल स्टेशन में किसान पारंपरिक फसलें छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. किसान सीधे खेत से स्ट्रॉबेरी बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं. स्ट्रॉबेरी का सीजन नवंबर से अप्रैल तक चलता है और यह फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है.
इस तरह घर पर सिंदूर का पौधा उगाकर आप रासायनिक सिंदूर से छुटकारा पा सकते हैं और प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह न केवल देखने में सुंदर है, बल्कि उपयोग में भी सुरक्षित और पारंपरिक है.
सरकार के ऐलान के बावजूद पंजाब में मंडियों में फसल की खरीद शुरू नहीं हुई. 1 अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू करने का ऐलान पंजाब सरकार ने हाल ही में किया था, लेकिन आढतिया एसोसिएशन के हड़ताल पर जाने कारण मंडियों में फसल ज्यों-की-त्यों पड़ी है. एसोसिएशन की मांग है कि 1995 से चली आ रही 2.5% कमीशन को जारी रखा जाए. अब सरकार प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे देती है जो की 45 रूपये बनते है और 2.5% के हिसाब से काफ़ी कम है.
Pumpkin Farming: नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन की काशी हरित वैरायटी के कद्दू के बीज किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, सही समय पर बुवाई, सिंचाई, खाद और कीट प्रबंधन से प्रति एकड़ 15 से 20 टन तक फसल की पैदावार हो सकती है.
यूरिया (नाइट्रोजन) के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है. जिससे मिट्टी की उर्वरता घट रही है और फसलें कमजोर हो रही हैं. इससे न केवल कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि भूजल और वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान संतुलित उर्वरक उपयोग करें तो भारत यूरिया आयात पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बन सकता है.
नेशनल सीड्स कार्पोरेशन (NSC) की Summer Hero सब्जी बीज किट में लौकी, तुरई, करेला और कद्दू के हाई क्वालिटी वाले बीज शामिल हैं, जो गर्मी के मौसम में आसानी से उगाए जा सकते हैं. खुरपी के साथ यह किट सिर्फ 240 रुपये में NSC के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं.
खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण भारत की खेती पर असर पड़ने की संभावना है, खासकर खरीफ सीजन से पहले फर्टिलाइजर की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. अप्रैल से जून तक राजस्थान में फर्टिलाइजर का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन जुलाई-अगस्त में मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सप्लाई और मांग के बीच बड़ा गैप बन सकता है.
कंटेनर गार्डनिंग के जरिए लोग बिना बड़े बगीचे के भी घर पर किचन गार्डन तैयार कर रहे हैं. सही बर्तन, पर्याप्त पानी और थोड़ी देखभाल के साथ कई तरह की सब्ज़ियां आसानी से उगाई जा सकती हैं, जो न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद हैं बल्कि रोज़मर्रा की जरूरत भी पूरी करती हैं.
Mango Farming: गुजरात के वलसाड जिले के किसान शैलेश पटेल ने 12 फुट ऊंचे आम के पेड़ पर 80 अलग-अलग किस्मों का ग्राफ्टिंग कर बागवानी में अद्भुत सफलता हासिल की है. 10 महीने की मेहनत और प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद 62 किस्में सुरक्षित हैं, जिनमें से 20 से 23 किस्मों में फल भी लग चुके हैं.