अगर आप अपने गार्डन के फूलों को घर सजाने के लिए तोड़ते हैं, तो सिर्फ तरीका ही नहीं बल्कि समय भी बेहद मायने रखता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि गलत समय पर तोड़े गए फूल जल्दी मुरझा जाते हैं, जबकि सही समय पर कटाई करने से उनकी ताजगी कई दिनों तक बनी रहती है.
बारिश का मौसम सिर्फ हरियाली बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि घर में सब्जियां उगाने के लिए भी बेहतरीन माना जाता है. नमी वाली मिट्टी और अनुकूल तापमान में कई सब्जियां तेजी से बढ़ती हैं.
करेले की काशी प्रतिष्ठा वैरायटी के बीज अब बाजार में उपलब्ध है, जो बुवाई के 50-55 दिनों में ही तुड़ाई के लिए फसल तैयार कर देते हैं. नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के अनुसार, इसके 5 ग्राम हाइब्रिड बीज मात्र 45 रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध हैं.
केंद्र सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 'कपास उत्पादकता मिशन' शुरू किया है, जिसके तहत गुजरात को 134.80 करोड़ रुपये का बजट मिला है. राज्य के 21 कपास उत्पादक ज़िलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को मिशन में शामिल किया जाएगा. आधुनिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 7,500 से 14,000 रुपये तक की सहायता मिलेगी.
गमले की मिट्टी में रेत मिलाना हर पौधे के लिए जरूरी नहीं है. अगर आपके पौधे को अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी चाहिए, तभी साफ और मोटे दानों वाली रेत का इस्तेमाल करें.
हरी-भरी पत्तियां होने के बावजूद अगर गुलाब में फूल नहीं खिल रहे हैं, तो इसकी वजह देखभाल में की गई कुछ सामान्य गलतियां हो सकती हैं. इन बातों का ख्याल रखा जाए तो पौधा भरपूर फल देता रहेगा.
भारत में कश्मीर में चेरी ब्लॉसम के पेड़ देखने को मिलते हैं. इसके अलावा उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में भी चेरी ब्लॉसम जैसे फूलों वाले पेड़ लगाए जाते हैं.
एक तरफ पर्यावरण और पानी बचाने के नाम पर धान छोड़ने और मक्का उगाने का उपदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मिलों के स्तर पर ही नियमों का 'चोगा' बदलकर कॉर्पोरेट हितों के लिए सस्ते कच्चे माल की सप्लाई चेन सुनिश्चित की जा रही है. टैक्सपेयर्स के पैसे और 'वेलफेयर स्टेट' के मुखौटे में छिपे इस अजीबोगरीब अर्थशास्त्र का पूरा विश्लेषण.
घर में उगाई गई पालक को अगर सही तरीके से तोड़ा जाए तो पौधे से कई बार पत्तियां मिल सकती हैं. जानिए कब करें कटाई और कौन-सी गलती करने से पौधा जल्दी खराब हो सकता है.
गार्डन में हर पौधे को बीज से उगाना आसान नहीं होता. कुछ पौधों के बीज जल्दी अंकुरित नहीं होते तो कुछ को फूल या फल देने में कई साल लग जाते हैं. ऐसे में कटिंग, बल्ब, कंद या नर्सरी से पौधे लगाना ज्यादा बेहतर विकल्प साबित होता है.
Subsidy Scheme: बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य घटती देसी मछलियों की प्रजातियों का संरक्षण और मछली पालकों की आय बढ़ाना है. इस योजना के तहत देसी मछली पालन पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी. जिसके लिए 31 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं.
अगर आपकी गाय या भैंस का दूध पतला आ रहा है और उसमें मलाई कम है, तो इसका सीधा संबंध उनके खान-पान और देखभाल से होता है. सही आहार, संतुलित चारा और नियमित मैनेजमेंट से दूध की गुणवत्ता को आसानी से बेहतर किया जा सकता है.
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म मौसम में बोई गई कुछ फास्ट-ग्रोइंग सब्जियां सितंबर तक भरपूर फसल देने लगती हैं. कुछ बातों का ख्याल रखकर घर पर ही ताज़ी सब्जियां उगाई जा सकती हैं.
लखनऊ में 'उत्तर प्रदेश मैंगो फेस्टिवल 2026' का शानदार आगाज हो चुका है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इस महोत्सव का उद्घाटन करते हुए बताया कि प्रदेश देश के कुल आम उत्पादन में अकेले 26 प्रतिशत का योगदान देता है.
कम पानी और कम समय में अधिक पैदावार देने वाली उन्नत धान की किस्में किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. पूसा बासमती 1121, 1509, 1718, PR 121 और बासमती 386 जैसी किस्में ना सिर्फ बेहतर गुणवत्ता और सुगंध के लिए जानी जाती हैं, बल्कि फसल प्रबंधन को भी आसान बनाती हैं.
आम के बागों में कीटों का हमला फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. मंकी हॉपर्स और मिलीबग जैसे कीट फूलों और नई पत्तियों का रस चूसकर पेड़ को कमजोर कर देते हैं, जिससे पैदावार घट जाती है.
Bhavantar Yojana: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धान उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना शुरू करने का ऐलान किया है. जिसमें MSP और बाजार मूल्य के बीच का अंतर किसानों को दिया जाएगा.
देश में खेती से लगातार मुश्किल होती जा रही है. कहीं बारिश कम हो रही है तो कहीं समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे ऐसी फसलें चुनें जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन दे सकें और नुकसान का जोखिम भी कम हो.
Kharif Sowing: धान, दलहन, तिलहन और कपास की खेती पर मॉनसून की सुस्ती का गहरा असर पड़ा है. खासकर सोयाबीन और तिलहन की फसलों की बुवाई में भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे खाद्य तेल उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों की कुल बुवाई क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में करीब 23 फीसदी की कमी आई है.
गर्मियों में सही तरीके से की गई हल्की छंटाई फलदार पेड़ों के लिए वरदान साबित हो सकती है. इससे बेकार शाखाएं हटती हैं, पेड़ को बेहतर धूप और हवा मिलती है और उसकी सारी ऊर्जा फल बनने में लगती है.
Maharashtra Monsoon: महाराष्ट्र सरकार ने मॉनसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगाया गया प्रतिबंध 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है. मछुआरों को आर्थिक सहायता के लिए 50,000 रुपये तक की मदद देने का प्रस्ताव भी वित्त विभाग को भेजा गया है.