02 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
आमतौर पर दलहनी फसलों में कई तरह के कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है, जो फसल के लिए नुकसानदायक होते हैं.
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बात करें कीट की तो मुख्य रूप से माहू, फली छेदक कीट और तना मक्खी शामिल हैं. इनके बचाव के लिए किसानों को फसल की निगरानी करनी होती है. आइए जानते हैं इसके उपाय
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शुरुआती स्थिति में नीम आधारित कीटनाशकों का छिड़काव करें, जबकि अधिक प्रकोप की स्थिति में एक्सपर्ट की राय के अनुसार रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए.
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इतना ही नहीं खेत में जलभराव से बचाव, फसल चक्र अपनाना और रोगग्रस्त पौधों को नष्ट करना भी कीट नियंत्रण में प्रभावी उपाय है.
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कृषि एक्सपर्ट की मानें तो ठंड के मौसम में दलहनी फसलों में विशेष रूप से कीट प्रकोप देखने को मिलता है.
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दो प्रकार के कीट नुकसान पहुंचाते हैं, पहला रस चूसने वाले कीट होते हैं, जो पत्तियों और कोमल भागों से रस चूसते हैं.
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दूसरा प्रकार फली छेदक कीट होते हैं, जो फली या पॉड बनने के बाद उसमें छेद कर अंदर के दानों को खाते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
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फसल में रस चूसने वाले कीट दिखाई दे रहे हैं, तो उनके नियंत्रण के लिए सिस्टमिक कीटनाशक का प्रयोग करें.
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अगर फसल में फली छेदक कीट हैं, तो कीटनाशी दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं, जैसे कि कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड.
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इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक का छिड़काव 1 से 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से करते हैं, तो फसल में मौजूद सभी प्रकार के रस चूसने वाले कीट से छुटकारा मिल सकता है.
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सही मात्रा में और सही समय पर छिड़काव करने से फली छेदक कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.
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