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ट्रंप की 'नॉटी एंड नाइस' लिस्ट, ईरान जंग को लेकर तैयार किया सजा और इनाम का नया फॉर्मूला

विश्लेषकों का मानना है कि यह लिस्ट अमेरिका और नाटो के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है. इस सूची के संभावित प्रभाव भी गंभीर माने जा रहे हैं. इससे ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में दरार गहराने की आशंका भी जताई जा रही है.

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 ट्रंप ने नाटो को "बेकार" करार दिया है और सहयोगियों की एक नई लिस्ट तैयार की है. (Photo- Agency)
ट्रंप ने नाटो को "बेकार" करार दिया है और सहयोगियों की एक नई लिस्ट तैयार की है. (Photo- Agency)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच एक नई खलबली मचा दी है. ट्रंप प्रशासन ने एक 'नॉटी और नाइस' (Naughty or Nice) लिस्ट तैयार की है, जिसमें नाटो देशों को ईरान के साथ चल रहे युद्ध में उनकी भूमिका और रक्षा खर्च के आधार पर बांटा गया गया है. 

यह सूची सीधे तौर पर उन देशों को पुरस्कृत करने या दंडित करने की योजना है, जिन्होंने वाशिंगटन के सैन्य अभियानों का समर्थन किया या उससे दूरी बनाए रखी. 'पॉलिटिको' की रिपोर्ट के अनुसार, यह सूची नाटो महासचिव मार्क रुटे की वाशिंगटन यात्रा से ठीक पहले तैयार की गई थी. 

इस विचार के पीछे रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का हाथ माना जा रहा है, जिन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि 'आदर्श सहयोगियों' को अमेरिका से विशेष रियायत मिलेगी, जबकि सामूहिक रक्षा में विफल रहने वाले देशों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. 

दंड के तौर पर अमेरिका इन देशों से अपनी सेना हटा सकता है या उन्हें अमेरिकी रक्षा तकनीक की बिक्री पर रोक लगा सकता है.सूची में पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों को 'नाइस' यानी अच्छे देशों की श्रेणी में रखा जा सकता है. 

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हालांकि व्हाइट हाउस ने इस सूची के अस्तित्व की पुष्टि नहीं की है लेकिन पोलैंड ने अपनी जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च किया है, वहीं रोमानिया ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. दूसरी ओर अधिकांश यूरोपीय नाटो देशों ने खाड़ी के इस संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया है जिससे ट्रंप बेहद नाराज हैं.

हाल ही में एरिजोना में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने नाटो की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा, 'जब हमें आपकी मदद चाहिए थी, तब आप बिल्कुल बेकार थे. अब मुझे आपकी मदद की जरूरत नहीं है.' उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि नाटो तब वहां नहीं था जब अमेरिका को उसकी जरूरत थी. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को अब बाहरी देशों के बजाय खुद पर निर्भर रहना चाहिए.

विशेषज्ञों की चिंता
हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में इस लिस्ट को लेकर चिंता जताई जा रही है. कुछ यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि अगर अमेरिका दंड स्वरूप अपनी सेना हटाता है, तो इससे उन देशों से ज्यादा अमेरिका का रणनीतिक नुकसान होगा. ईरान युद्ध के बाद से व्हाइट हाउस और नाटो के बीच तनाव अपने चरम पर है, जिससे इस ऐतिहासिक सैन्य गठबंधन के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

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