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अफगानिस्तान: महिलाओं के मंत्रालय में महिलाएं ही बैन, तालिबान ने चार कर्मचारियों को वापस भेजा

अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद तालिबान अपने हिसाब से नियम कानून बना रहा है. वह महिला मामलों के मंत्रालय में महिला कर्मचारियों को ही एंट्री नहीं लेने दे रहा.

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अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ काफी प्रदर्शन भी हो रहे हैं (फाइल फोटो)
अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ काफी प्रदर्शन भी हो रहे हैं (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महिलाओं के मंत्रालय में महिलाओं को एंट्री नहीं
  • तालिबान के आदेश का महिलाओं ने किया विरोध

अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) की सरकार आने के बाद जिन चीजों का डर था, वह सब होना शुरू हो चुका है. ताजा जानकारी के मुताबिक, महिला मामलों के मंत्रालय में महिला कर्मचारियों को ही जाने से रोक दिया है. वहां सिर्फ पुरुषों को काम करने की इजाजत दी गई है.

तालिबान ने कुछ दिन पहले ही ऐलान किया था कि जिस दफ्तर में पुरुष कर्मचारी काम करते होंगे, वहां महिलाएं काम नहीं कर सकेंगी.

रूस की न्यूज एजेंसी Sputnik की खबर में दावा किया गया है कि तालिबान के कुछ प्रतिनिधियों ने महिला मामलों के मंत्रालय में महिला कर्मचारियों को ही जाने से रोक दिया. एक कर्मचारी ने ही न्यूज एजेंसी को इसकी जानकारी दी. बताया गया कि चार महिला कर्मचारियों को अंदर नहीं जाने दिया गया. इसके खिलाफ महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया.

तालिबान राज के बाद से ही आशंका थी कि महिलाओं के प्रति उसका व्यवहार ठीक नहीं होगा. यहां तक कि तालिबान ने जिस सरकार का गठन किया है उसमें एक भी महिला शामिल नहीं है. इसपर सवाल पूछने पर तालिबान के प्रवक्ता ने मीडिया के सामने यह तक कह दिया था कि महिलाएं मंत्री नहीं बन सकती, वे सिर्फ बच्चे पैदा करें.

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कई ऐसी महिलाएं हैं जो तालिबान द्वारा महिलाओं पर की जाने वाली क्रूरता की गवाही देती हैं. तालिबान के कब्जे के बाद अफगान छोड़कर आईं शोधकर्ता और कार्यकर्ता हुमैरा रियाजी ने कहा था कि ‘वे महिलाओं को इंसान नहीं समझते.’

हजारों कैदियों को तालिबान ने किया आजाद

तालिबान ने सरकार बनाने के बाद हजारों कैदियों को भी काबुल की जेल से आजाद कर दिया है. ये अफगान की सबसे बड़ी जेल थी. इसमें कई हत्यारे, रेपिस्ट और चोर भी शामिल हैं.

पूरे अफगान पर तालिबान का कब्जा

बता दें कि तालिबान ने लगभग एक ही महीने के अंदर पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया था. 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद साफ हो गया था कि अब तालिबान वहां सरकार बनाएगा. फिर 34वें और आखिरी प्रांत पंजशीर के कुछ हिस्सों पर भी तालिबान ने कब्जा कर लिया. पंजशीर के लड़ाके अभी भी तालिबान को चुनौती दे रहे हैं लेकिन उसका बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ. फिलहाल अफगान में तालिबान की सरकार बन चुकी है.

तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार में मोहम्मद हसन अखुंद को प्रधानमंत्री बनाया है. वह तालिबान के पिछले शासन काल में विदेश मंत्री था. अखुंद पर यूएन ने 2001 में कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे, जो कि अबतक लागू हैं.

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