सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान न सिर्फ जापान की हार हुई बल्कि उसके कुछ भूभाग पर भी दूसरे देशों ने कब्जा कर लिया था. प्रशांत महासागर में स्थित कुरील आईलैंड ऐसा ही क्षेत्र है जिस पर अभी भी रूस का नियंत्रण है, लेकिन लेकिन दोनों देश इस पर अपना दावा करते हैं. इसे लेकर जापान और रूस के बीच तनाव रहता है.
हाल ही में रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने इस द्वीप समूह के सबसे दक्षिण में स्थित चार द्वीपों में से एक इतुरुप का दौरा किया. जापान इन द्वीपों को 'उत्तरी क्षेत्र' कहता है.
दूसरे विश्व युद्ध के आखिरी दिनों में सोवियत संघ ने जापान से ये द्वीप ले लिए थे. इस विवाद के कारण दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए कोई शांति समझौता नहीं हो पाया है.
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने पुतिन के इस दौरे की तीखी आलोचना की थी. जापान की पीएम ने कहा कहा कि पुतिन का यह दौरा उत्तरी क्षेत्रों पर जापान के रुख के खिलाफ है और "बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं" है.
बता दें कि इन द्वीपों पर ये पुतिन की पहली यात्रा थी.
PM तकाइची ने कहा कि यूक्रेन मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के लिए यह दौरा एक और झटका है और मॉस्को को इसके नतीजों को समझना चाहिए.
इसी आलोचना से नाराज रूस ने जापान के राजदूत को तलब किया है.
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि टोक्यो पुतिन की इतुरूप यात्रा का "कड़ा विरोध" करता है. उन्होंने कहा कि 'एतोरोफु' (इतुरुप ) द्वीप समेत उत्तरी इलाके, ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून, दोनों ही नज़रिए से जापान का अपना इलाका हैं." जापान इस द्वीप को 'एतोरोफु' कहते हैं.
मंगलवार को रूस के उप-विदेश मंत्री मिखाइल गलुज़िन ने जापानी राजदूत अकीरा मुतो से मुलाकात की और ताकाइची और मोतेगी के "रूस-विरोधी" बयानों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया.
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार गलुज़िन ने मुतो से कहा, "दक्षिणी कुरील द्वीपों पर रूस की संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र पूरी तरह से अटूट है."
रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार. "ये इलाके दूसरे विश्व युद्ध के बाद हमारे देश को मिले थे जिसे मित्र देशों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के संबंधित समझौतों में शामिल किया गया था." "जापानी पक्ष द्वारा इस स्पष्ट सच्चाई पर सीधे या परोक्ष रूप से सवाल उठाने की कोई भी कोशिश पूरी तरह से अस्वीकार्य और गैर-कानूनी है."
गलुज़िन ने राजदूत से कहा कि रूस के ख़िलाफ़ पश्चिमी प्रतिबंधों को मानने और यूक्रेन का समर्थन करने के टोक्यो के रुख को देखते हुए, मॉस्को के पास उचित जवाबी कदम उठाने का अधिकार है.
1945 में रूस ने द्वीप पर किया था कब्जा
बता दें कि फरवरी 1945 में हुए याल्टा समझौते अमेरिका, ब्रिटेन और सोवियत संघ ने सहमति दी कि अगर सोवियत संघ जापान के खिलाफ युद्ध में शामिल होता है तो उसे कुरील द्वीप मिलेगा.
अगस्त 1945 में सोवियत संघ ने युद्ध घोषित किया और जापान के आत्मसमर्पण के बाद भी दक्षिणी चार द्वीपों पर कब्जा कर लिया और लगभग 17,000 जापानी निवासियों को जबरन निकाल दिया. इसके बाद से इस द्वीप पर रूस का कब्जा है, लेकिन जापान भी इस द्वीप पर दावा करता रहता है.
इस विवाद को खत्म करने के लिए दशकों की कूटनीतिक कोशिशों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. मॉस्को ने पिछले कुछ सालों में कुरील द्वीपों पर अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई है, जिससे विवाद पर उसका मज़बूत रुख ज़ाहिर होता है.
पिछले हफ़्ते प्रशांत महासागर में युद्धाभ्यास में शामिल रूसी युद्धपोत पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि मॉस्को ने पहले कई जापानी नेताओं के साथ रचनात्मक संबंध बनाए थे, जिनमें दुखद रूप से दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी शामिल थे, जिन्होंने जापान और रूस को करीब लाने के लिए बहुत काम किया था. "