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मक्का समझौते का पहला टेस्ट! ईरान के 'दोस्त' पर बम बरसाएगा PAK, लेगा सऊदी का बदला

पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए मक्का पैक्ट एक्टिवेट कर सकता है और हूतियों के ठिकानों पर हमला कर सकता है. तुर्की के अखबार तुर्की टुडे ने इस बाबत एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. सऊदी अरब पर हूतियों के हमले ने मक्का पैक्ट को लेकर कई चर्चाएं छेड़ दी हैं.

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पाकिस्तान मक्का पैक्ट का हस्ताक्षरकर्ता है. (Photo: File/Reuters)
पाकिस्तान मक्का पैक्ट का हस्ताक्षरकर्ता है. (Photo: File/Reuters)

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले के बाद पाकिस्तान मक्का पैक्ट को एक्टिवेट कर सकता है. पाकिस्तान यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमले करने की तैयारी कर रहा है. मंगलवार को सऊदी अरब पर हूथी हमलों के बाद, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी इलाके में फैलता है, तो समझौते की सामूहिक रक्षा वाली शर्त लागू हो सकती है.

बुधवार को 'तुर्की टुडे' ने एक सूत्र के हवाले से खबर दी कि ईरान के प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों पर पाकिस्तान जल्द ही हवाई हमले कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों की जानकारी हमले के कुछ समय बाद सार्वजनिक की जाएगी.

पाकिस्तान के एक सूत्र ने 'तुर्की टुडे' को बताया, "पाकिस्तानी हमलों की सैन्य प्राथमिकताओं में से एक सद्दा और अन्य इलाकों से हूतियों को खदेड़ना होगा."

पाकिस्तान के शामिल होने की संभावना पर बात करते हुए वॉशिंगटन में रहने वाले पॉलिटिकल एनालिस्ट ज़ीशान शाह ने 'तुर्की टुडे' को बताया कि जहां तक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ की बात है, तो "वे कई बार बिना सोचे-समझे या अचानक ऐसी बातें कह देते हैं जो ज़रूरी नहीं कि सरकार का आधिकारिक रुख हो."

उन्होंने याद दिलाया कि रक्षा मंत्री ने 2015 में भी इसी तरह के बयान दिए थे, जब हूतियों के ख़िलाफ़ सऊदी-UAE ऑपरेशन पहली बार शुरू हुआ था.

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शाह की राय में, "अगर सऊदी अरब हूतियों पर हमला करने का फैसला करता है, जिसकी संभावना अब ज़्यादा लग रही है तो पाकिस्तान की मदद सिर्फ़ लॉजिस्टिकल और पर्दे के पीछे के सहयोग तक ही सीमित रहेगी न कि हूतियों पर असल में बमबारी करने तक."

ख्वाजा आसिफ़ की यह टिप्पणी मंगलवार को सऊदी अरब में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए हूती ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद आई है, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हो गए थे.

तुर्की के अलावा, पाकिस्तान और सऊदी अरब भी मक्का पैक्ट के सदस्य हैं. इस्लामाबाद और रियाद ने 2025 में एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे, जिसके आधार पर मक्का समझौते के सिद्धांत तैयार किए गए थे.

हूती, जो ईरान समर्थित एक प्रॉक्सी समूह है, खाड़ी देश यमन में सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है. 2015 में, रियाद ने हूतियों को कुचलने के लिए यमन में हस्तक्षेप किया था जो विफल रहा; इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच बीच-बीच में मिसाइल और हवाई हमले होते रहे हैं. 

जियो न्यूज ने जब आसिफ़ से जब पूछा गया कि क्या हुतियों के हालिया हमलों के बाद मक्का समझौता एक्टिवेट होगा, यानी क्या पाकिस्तान यमन पर हमला करेगा तो रक्षा मंत्री ने हां में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि इसमें कोई "अस्पष्टता" नहीं है क्योंकि समझौते में यह तय किया गया था कि किसी एक सदस्य के ख़िलाफ़ आक्रामकता की किसी भी कार्रवाई को सभी के ख़िलाफ़ हमला माना जाएगा.

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आसिफ़ ने जियो न्यूज़ से कहा, "हम इस समझौते की शर्तों और नियमों से बंधे हैं, और ज़रूरत पड़ने पर हम उनका पालन करेंगे."

आसिफ़ ने कहा कि समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधान तब लागू होंगे जब किसी सदस्य देश के ख़िलाफ़ बिना उकसावे के कोई आक्रामकता होगी या यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलेगा. 

इससे पहले इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा था कि सऊदी अरब पर हूतियों के हमले को पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा. 

जब उनसे पूछा गया कि क्या हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच कोई बातचीत हुई है, तो आसिफ ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है. फिर भी उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान "समझौते के तहत प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य है" क्योंकि इसमें हमले की स्थिति में संयुक्त रक्षा और सामूहिक कार्रवाई का प्रावधान है.

आसिफ ने उम्मीद जताई कि स्थिति "नियंत्रण में आ जाएगी और शांत हो जाएगी", और साथ ही उन्होंने हूतियों को चेतावनी दी कि "अपने आंतरिक मामलों को बाहर फैलाने" की कोशिशें समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधानों को सक्रिय कर सकती हैं. 

क्या सऊदी हितों पर हूती हमलों से मक्का समझौता लागू होगा?

मक्का समझौते पर 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि इस्लामाबाद और रियाद के बीच 2025 से एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता लागू था. 

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हूतियों साथ सऊदी का संघर्ष इन दोनों समझौतों से कहीं पुराना है. सऊदी अरब ने 2015 में ईरान समर्थित इस्लामी चरमपंथी समूह को कुचलने की कोशिश की थी लेकिन असफल रहा जिससे यमन में गृह युद्ध छिड़ गया. 

तब से हूती और सऊदी दोनों ही बीच-बीच में एक-दूसरे पर हमले करते रहे हैं. और इस साल फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद हूती भी इस संघर्ष में शामिल हो गए. तब से दर्जनों ड्रोन और मिसाइलों ने सऊदी के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है. 

पूरे घटनाक्रम में यूके में बर्मिंघम विश्वविद्यालय में मध्य पूर्व के विशेषज्ञ और किंग फैसल सेंटर फॉर रिसर्च एंड इस्लामिक स्टडीज के एसोसिएट फेलो उमर करीम ने बीबीसी उर्दू को बताया कि हूती हमलों से रियाद को जो "बड़ा खतरा" है, उसे देखते हुए "ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें मक्का समझौता और पाकिस्तान-सऊदी आपसी रक्षा समझौता दोनों ही लागू किए जा सकें."

करीम ने आगे कहा कि इस्लामाबाद के पास पहले से ही "सऊदी अरब की रक्षा के लिए किसी भी अभियान में शामिल होने" के लिए ज़मीन पर सैन्य मौजूदगी है और आसिफ के बयानों को देखते हुए इस्लामाबाद में ऐसा करने की "राजनीतिक इच्छाशक्ति" है. 

इसके बावजूद अगर पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए मक्का समझौते को लागू करने के पक्ष में होता है, तो यह पूरी तरह से डिफेंसिव नेचर  का होगा.

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जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी कतर के प्रोफेसर और अरब सेंटर फॉर रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज में रिसर्च यूनिट के निदेशक मेहरान कामरावा ने बीबीसी उर्दू को बताया कि ऐसे "संकेत" थे कि 2015 की तरह ही, रियाद यमन में एक और ज़मीनी घुसपैठ की तैयारी कर रहा था, जहां हूती का ठिकाना है.

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