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पाकिस्तान-नॉर्वे की बैठक में जम्मू-कश्मीर का जिक्र, PoK पर चुप्पी!

भारत ने साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर इंडिया-पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मसला है. भारत ने इस मुद्दे पर किसी भी देश की मध्यस्थता को साफ खारिज किया है. भारत के ऐसे माहौल के बीच नॉर्वे के विदेश मंत्री का ये बयान हैरान करने वाला है.

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नॉर्वे के विदेश मंत्री पाकिस्तान दौरे पर हैं. (Photo: X/@ForeignOfficePk)
नॉर्वे के विदेश मंत्री पाकिस्तान दौरे पर हैं. (Photo: X/@ForeignOfficePk)

पाकिस्तान दौरे पर आए नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा है कि उन्होंने पाकिस्तान सरकार के साथ जम्मू-कश्मीर पर चर्चा की है. भारत जम्मू-कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा मानता है और इस मुद्दे पर किसी भी पक्ष की दखलंदाजी को खारिज करता है. इस लिहाज से नॉर्वे के विदेश मंत्री का ये बयान अहम है. 

भारत ने साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर हिन्दुस्तान का अविभाजित हिस्सा है.

एक दशक बाद पाकिस्तान का दौरा करने वाले नॉर्वे के पहले विदेश मंत्री एडे ने कहा कि उन्होंने कश्मीर से लेकर अफ़गानिस्तान तक के अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की है. 

पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने भारत के खिलाफ नॉर्वे के विदेश मंत्री के खूब कान भरे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने नॉर्वे के विदेश मंत्री को जम्मू-कश्मीर विवाद के बारे में भी जानकारी दी और सिंधु जल संधि के रुके हुए मामलों पर बात की. 

नॉर्वे के विदेश मंत्री को उलाहना

'द ट्रिब्यून पाकिस्तान' पाकिस्तान की रिपोर्ट के अनुसार इशाक डार ने जम्मू -कश्मीर को "लंबे समय से चले आ रहे अनसुलझे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में से एक" बताया. उन्होंने दावा किया कि ये मुद्दा 1948 से UN सुरक्षा परिषद के एजेंडे में शामिल रहा है. 

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आतंकवाद की चर्चा पर मुंह सिलते हुए पाकिस्तान ने नॉर्वे के विदेश मंत्री से कहा कि भारत की खूब शिकायतें की. इशाक डार ने कहा कि भारत ने 
एकतरफा तौर पर सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा करके  पहले से ही तनावपूर्ण सुरक्षा स्थिति में एक नया पहलू जोड़ दिया है. 

इस दौरान इशाक डार ने कहा कि हम फिर से कहते हैं कि भारत को पानी का हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना बंद करना चाहिए और संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए. 

PoK पर चुप्पी

हालांकि पाकिस्तान दौरे पर आए नॉर्वे के विदेश मंत्री को कई हफ्तों से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे प्रदर्शन नहीं दिखाई दिए. उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली. PoK में पाकिस्तान की सेना कई दिनों से स्थानीय लोगों पर जुल्म ढा रही है.

ईरान के सुरक्षा के अधिकार का समर्थन

नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने गुरुवार को एक देश के तौर पर ईरान के अपनी सुरक्षा करने के अधिकार का समर्थन किया. साथ ही, उप-प्रधानमंत्री इशाक डार के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका का भी समर्थन किया और द्विपक्षीय सहयोग व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की. 

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विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, समुद्री मामलों और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की. 

इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की. 

पाकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर आए ईडे ने डार के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं उस अहम भूमिका के लिए हमारे मज़बूत समर्थन को फिर से दोहराना चाहता हूं जो पाकिस्तान ने 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के हमले से शुरू हुई इस ज़बरदस्त जंग में निभाई है."

उन्होंने कहा कि हालांकि नॉर्वे के "दूसरे मुद्दों पर ईरान के साथ काफ़ी मतभेद हैं, फिर भी एक देश के तौर पर उनकी सुरक्षा का अधिकार भी है."

उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि आपने कितना बड़ा काम अपने हाथ में लिया था जब आपने इस्लामाबाद को न सिर्फ़ इन बातचीत की जगह के तौर पर, बल्कि इनके सूत्रधार के तौर पर भी पेश किया." उन्होंने पाकिस्तान की उन कोशिशों का ज़िक्र किया जो उसने अमेरिका-ईरान जंग को खत्म करने और इस अस्थिर इलाक़े में कथित तौर पर शांति लाने के लिए की थीं. 

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नॉर्वे के विदेश मंत्री ने आगे कहा, "आप जो काम कर रहे हैं, वह असल में दुनिया की सेवा है और इसलिए, हमारी भी सेवा है." उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्वे उन पश्चिमी देशों में से एक था, जिसने "सबसे पहले और सबसे साफ़ तौर पर" यह कहा था कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. 
 

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