
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बरामद शवों की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है. पोखरा के सरकारी अस्पताल में रखे एक शव नंबर 1003 पर तीन परिवारों ने अपने-अपने लापता परिजन होने का दावा किया है. मामला अब डीएनए जांच तक पहुंच गया है. वहीं चितवन में बरामद 272 शवों में अब तक सिर्फ 12 की पहचान हो सकी है.
पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज में रखे शव नंबर 1003 पर दावा करने वाले परिवारों में बरदिया के हाइड्रोपावर कर्मचारी गोपाल दहित और रुपनदेही के टूरिस्ट गाइड दामोदर बसयाल के परिवार शामिल हैं. रविवार को एक अन्य परिवार ने भी इस शव को अपने रिश्तेदार का बताया था, लेकिन बाद में वह परिवार पीछे हट गया.
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गोपाल दहित बाढ़ के बाद से लापता थे. उनकी बहन मांजी थारू और परिवार के दूसरे सदस्य शवों की तस्वीरें देखने के बाद नंबर 1003 को गोपाल का शव मानकर पोखरा पहुंचे थे. लेकिन शव लेने से पहले दामोदर बसयाल के परिवार ने भी उस पर दावा कर दिया.

अब शव का डीएनए टेस्ट होगा, लगेंगे एक-डेढ़ महीने
दोनों परिवारों ने शव के चेहरे, माथे, होंठ, दांत, हाथ और शरीर की बनावट समेत कई निशानों को अपने-अपने लापता परिजन से मिलता-जुलता बताया. अब डीएनए जांच से ही सही पहचान हो सकेगी. अधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में सैंपल की जांच होने के कारण डीएनए मैचिंग में एक से डेढ़ महीने तक का समय लग सकता है.
पोखरा में 102 शव गोरखा, तनहूं, धादिंग और नवलपरासी ईस्ट जिलों से लाए गए हैं. इनमें 16 शवों की पहचान कर उन्हें परिवारों को सौंपा जा चुका है, जबकि 87 शवों का पोस्टमार्टम किया गया है. कई मामलों में परिजनों से डीएनए सैंपल भी लिए गए हैं.
नेपाल में परिवार अपने प्रियजनों की कैसे कर रहे पहचान?
बाढ़ के बाद कई परिवार तस्वीरों और शरीर पर मौजूद छोटे-छोटे निशानों के जरिए अपने रिश्तेदारों की पहचान कर रहे हैं. एक मामले में नुवाकोट के पांच साल के प्रिंस की पहचान स्कूल टाई, नेकलेस और कान की बाली से हुई. इसी तरह भक्तपुर के सत्य सुंदर प्रजापति की पहचान कंधे पर बने टैटू से की गई.

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हालांकि, कई शव लंबे समय तक पानी में रहने के कारण बुरी तरह खराब हो चुके हैं. इससे उनकी पहचान और मुश्किल हो रही है. काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में 94 शव लाए गए, जिनमें सिर्फ 9 की पहचान हो सकी. वहीं चितवन में 272 शव बरामद हुए, लेकिन केवल 12 की पहचान हो पाई. 199 अज्ञात शवों को डीएनए और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित रखने के बाद दफना दिया गया.