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'बाढ़ आ रही है...' सिर्फ 14 मिनट और 900 जिंदगियां, एक फोन कॉल ने नेपाल में यूं टाला बड़ा स्कूल हादसा

नेपाल में बाढ़ की चेतावनी मिलने के बाद स्कूल के अकाउंटेंट और हेडमास्टर की तत्परता से 900 से ज्यादा छात्रों और 16 शिक्षकों की जान बच गई. रसुवा से फोन पर मिली सूचना के बाद स्कूल को खाली कराने के लिए सिर्फ 14 मिनट मिले, जिसके बाद तेज लहरों ने स्कूल और आसपास के पुलों को तबाह कर दिया.

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नेपाल में बाढ़ के बीच 14 मिनट की चेतावनी से 900 छात्रों की बची जान. (Photo- Reuters)
नेपाल में बाढ़ के बीच 14 मिनट की चेतावनी से 900 छात्रों की बची जान. (Photo- Reuters)

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बीच एक स्कूल में समय रहते दी गई चेतावनी ने 900 छात्रों और 16 शिक्षकों की जान बचा ली. पिछले बुधवार नेपाल के बिदुर स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में हेडमास्टर राजेंद्र दवाड़ी मौजूद थे, तभी स्कूल के अकाउंटेंट ने आकर चिल्लाते हुए कहा, 'बाढ़ आ रही है, बाढ़ आ रही है.'

अकाउंटेंट को रसुवा में रहने वाले एक रिश्तेदार का फोन आया था. रसुवा उन इलाकों में था, जहां बाढ़ सबसे पहले पहुंची. इस चेतावनी के बाद स्कूल को छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित निकालने के लिए सिर्फ 14 मिनट मिले. उस समय करीब 1,600 छात्रों में से 900 से ज्यादा स्कूल परिसर में मौजूद थे.

 रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हेडमास्टर दवाड़ी ने बताया कि चेतावनी मिलते ही उन्होंने क्लास बंद करने और घंटी बजाने के निर्देश दिए. स्कूल आने वाली बसों को भी सुरक्षित जगह जाने के लिए कहा गया. इसके बाद छात्रों और शिक्षकों को तेजी से बाहर निकाला जाने लगा.

पुल ठह गया 

अफरा-तफरी के बीच कम से कम एक छात्र बेहोश हो गया. माता-पिता, शिक्षक और छात्र मोटरसाइकिल लेकर बच्चों को लेने पहुंचे. कुछ लोगों को बसों से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जबकि कई लोग ऊंची जगहों की ओर भागे. करीब 14 मिनट बाद जब आखिरी बस नदी पर बने पास के पुल से गुजरी, तब तक करीब 60,000 आबादी वाले शहर की ओर पानी की तेज लहर बढ़ रही थी. दवाड़ी ने बताया कि जब उनकी बस नए पुल से गुजर रही थी, उसी दौरान पुराना पुल ढह गया.

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अब स्कूल का अस्तित्व नहीं

2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद दोबारा बनाया गया यह स्कूल त्रिशूली नदी और एक हाइड्रोपावर नहर के बीच स्थित था. अब स्कूल की जगह मौजूद नहीं है और उसका पूर्व स्थान नदी के तल में है. दवाड़ी खुद भी इसी स्कूल में छात्र रह चुके हैं. अब वह चाहते हैं कि अधिकारियों की ओर से स्कूल को जल्द से जल्द किसी सुरक्षित जगह पर दोबारा बनाया जाए. कई अभिभावक हेडमास्टर दवाड़ी को अपने बच्चों की जान बचाने का श्रेय दे रहे हैं. एक अभिभावक मन माया तामांग ने कहा कि उन्होंने उनकी बेटी और कई दूसरे बच्चों की जान बचाई.

कई लोग अब भी लापता

हालांकि, बिदुर में कई लोगों तक चेतावनी समय पर नहीं पहुंच सकी. दवाड़ी के मुताबिक, स्कूल का कम से कम एक कर्मचारी और स्कूल के अकाउंटेंट की मां अब भी लापता हैं. स्कूल को चेतावनी देने के बाद अकाउंटेंट अपने माता-पिता को बचाने के लिए उनके घर भागा था. वह अपने पिता को पहाड़ी की ओर ले जाने में कामयाब रहा, लेकिन जब अपनी मां को लेने वापस लौटा तो घर बह चुका था.

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