अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुरू हुई शांति वार्ता बीच में ही अटकती दिख रही है. भले ही दोनों देशों के बीच समझौते पर साइन हो गए हों, लेकिन ग्राउंड पर ये फेल हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता के बीच ईरान पर दोबारा हमले करने की धमकी दी. ऐसे में ईरान ने बातचीत की मेज से उठकर चला गया.
स्विट्जरलैंड में वार्ता के दौरान ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कोई भी बाधा डाली या उसके 'प्रॉक्सिस' ने लेबनान में गड़बड़ी की, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगा.
अमेरिका की धमकियों के बाद ईरान ने चौतरफा बातचीत रोक दी. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत का दिन बहुत लंबा रहा और मीटिंग रविवार सुबह से शुरू हुईं. लेकिन चौतरफा मीटिंग के दौरान, अमेरिका की तरफ से एक धमकी भरा बयान दिया गया, जिसके बाद ईरान ने ऐलान किया कि वो ऐसे हालात में बातचीत जारी रखने को तैयार नहीं है.
ईरान ने वार्ता से किया वॉकआउट
बघाई ने कहा कि कतर और पाकिस्तान ने बातचीत जारी रखने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने जोर दिया कि चौतरफा फॉर्मेट में बातचीत जारी नहीं रहेगी. बघाई के मुताबिक, ईरानी डेलीगेशन का मानना है कि फोकस दूसरे पक्ष को उसके कमिटमेंट को लागू करने के लिए जिम्मेदार ठहराने पर होना चाहिए.
इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि लेबनान डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल डील का पहला टेस्ट होगा. उन्होंने कहा कि तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट माफ कर दिए गए हैं, ब्लॉकेड हटा दिया गया है, कुछ फ्रीज किए गए एसेट्स जारी किए गए हैं और ईरान के लिए एक बड़ा रीकंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट प्लान शुरू किया गया है.
अराघची ने ये भी कहा कि बातचीत के दौरान बनी सहमति का पहला असली टेस्ट लेबनान में कॉन्फ्लिक्ट-रिजॉल्यूशन मैकेनिज्म का परफॉर्मेंस होगा, जिससे सीजफायर से जुड़े झगड़ों और उल्लंघनों की देखरेख और उन्हें सुलझाने की उम्मीद है.
ईरान का बातचीत की मेज पर लौटने से इनकार
लेकिन ट्रंप की इन धमकियों के बाद ईरान भड़क गया और इसे सीजफायर समझौते के 'अनुच्छेद 1' का उल्लंघन बताया. ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरानी डेलिगेशन ने वार्ता से वॉकआउट कर दिया और वापस लौटने से भी साफ इनकार कर दिया. हालांकि, कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश स्थिति को संभालने में जुटे हैं.
अब तक की वार्ता 'बेनतीजा'
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, भले ही ईरान और अमेरिका की मीटिंग बीच में ही रुक गई हो, लेकिन मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है. हालांकि, अभी तक इस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है. वहीं, अमेरिकी सेना सेंटकॉम ने बताया कि अमेरिकी एयर फोर्स के दो A-10 अटैक एयरक्राफ्ट रूटीन पेट्रोल के दौरान मिडिल ईस्ट में मौजूद है. अमेरिकी फोर्स पूरे इलाके में आसमान, जमीन और समुद्र में मौजूद हैं. ऐसे में एक बार फिर ईरान और अमेरिका की शांति वार्ता पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है.
60 दिन का रोडमैप तैयार
ईरान के वॉकआउट के बाद कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिशें जारी रखीं. इसके बाद कतर और पाकिस्तान ने लेक ल्यूसर्न समिट में US-ईरान बातचीत में प्रोग्रेस का ऐलान किया. पाकिस्तान ने फाइनल डील के लिए 60-दिन का रोडमैप भी बताया. इससे ईरान और अमेरिका के बीच शांति स्थापित होने की उम्मीद बरकरार है.
कतर और पाकिस्तान ने बताया कि वार्ता के दौरान हाई-लेवल कमेटी बनाई गई और टेक्निकल बातचीत शुरू हुई. घटनाओं से बचने के लिए डायरेक्ट कम्युनिकेशन लाइन बनाई गई. इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुजसेफ-पैसेज मैकेनिज्म पर भी चर्चा हुई.
कतर और पाकिस्तान ने कहा कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत हाई-लेवल बातचीत का पहला राउंड बर्गेनस्टॉक, स्विट्जरलैंड में खत्म हो गया है, जिसमें ईरान, अमेरिका, कतर और पाकिस्तान शामिल हुए.
नेतन्याहू का 'एकला चलो' रवैया
दूसरी तरफ, इजरायल का 'एकला चलो' रवैया इस मामले में आग में घी डालने का काम कर रहा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ मिलकर ये जंग शुरू की थी. लेकिन अब वो ट्रंप की किसी भी सलाह को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा है कि वो अपनी सुरक्षा के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएंगे.
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नेतन्याहू ने अमेरिकी रुख से अलग रास्ता अपना लिया है और ट्रंप के मना करने के बावजूद लगातार लेबनान पर हमले कर रहे हैं. इसे लेकर नेतन्याहू ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप वो सब कुछ नहीं करते जो मैं चाहता हूं और न ही मैं वो सब करता हूं जो वो चाहते हैं. हम स्वतंत्र और गौरवान्वित देशों के नेता हैं; कभी-कभी हमारी सोच आपस में मेल नहीं खाती.'
वहीं, ट्रंप का कहना है कि इजरायल के मुकाबले हिज्बुल्लाह का बेहतर तरीके से ध्यान रख सकता है. लेबनान पर बात करते हुअ ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, 'मुझे निराशा है कि इजरायल हिज्बुल्लाह से दूर नहीं कर सकता. वो इमारतें गिराए बिना कुछ नहीं कर सकते. मैं ये काम सीरिया को देने के करीब हूं क्योंकि वो बेहतर तरीके से काम करेगा.'
हालांकि, सीरिया के प्रेसिडेंट अहमद अल-शारा ने ट्रंप के इस बयान के बाद लेबनान में दखल देने से इनकार कर दिया है.
फिर जंग का अखाड़ा बन सकता है मिडिल-ईस्ट
नेतन्याहू के इस बयान से साफ है कि इजरायल अब अमेरिका-ईरान वार्ता से खुद को अलग करके चल रहा है और वो लेबनान में हमले जारी रखेगा. अगर ऐसा हुआ तो मिडिल ईस्ट के दोबारा जंग का अखाड़ा बनने में देर नहीं लगेगी और इसका नतीजा पहले से ज्यादा भयानक हो सकता है.