ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस दौरान'आजतक' से खास बातचीत की. इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि छह महीने चले युद्ध के बावजूद ईरान कमजोर नहीं हुआ, बल्कि इस संकट ने देश को और ज्यादा एकजुट किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बिना किसी उकसावे के ईरान पर हमला किया, क्योंकि उसे अपनी सैन्य ताकत पर भरोसा था.
सऊदी अरब को लेकर क्या बोले ईरानी राष्ट्रपति?
इस खास बातचीत में उन्होंने चाहबहार पोर्ट, होर्मुज, ईरान के परमाणु प्रोग्राम और अमेरिका से संघर्ष और भारत के साथ रिश्ते जैसे विषयों पर खुलकर बात की और जरूरी सवालों के जवाब दिए. इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कहा कि ईरान, सऊदी अरब के साथ युद्ध में नहीं है, बल्कि उन्होंने हूती के हमलों को अलग मुद्दा बताया.
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हूती की हैं अपनी समस्याएं, बोले- पेजेश्कियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मक्का समझौते और सऊदी अरब के साथ संबंधों को लेकर साफ किया कि ईरान सऊदी अरब के साथ युद्ध में नहीं है. उन्होंने हूती के हमलों को अलग मुद्दा बताते हुए कहा, 'हम सऊदी अरब के साथ युद्ध में नहीं हैं. हूती की अपनी समस्याएं हैं.' पेजेश्कियन ने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों को एक साथ बैठकर शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए.
इस क्षेत्र में आपसी संघर्ष का कोई कारण नहीं है. उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के देशों ने सैकड़ों वर्षों तक एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध किए, लेकिन बाद में साथ बैठकर नियम बनाए, एक-दूसरे के लिए रास्ते खोले और आपसी व्यापार तथा सहयोग को आगे बढ़ाया. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि हर देश अपने हितों, विचारों और पहचान को बरकरार रखते हुए सुरक्षा के एक साझा ढांचे के भीतर बातचीत और सहयोग कर सकता है.
पेजेश्कियन ने कहा कि युद्ध और संघर्ष किसी समस्या का समाधान नहीं हैं. सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और क्षेत्र के दूसरे देश अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए मिलकर एक मजबूत और गतिशील अर्थव्यवस्था खड़ी कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ईरान मानव एकता और क्षेत्रीय सहयोग में विश्वास करता है.